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Yeshu Masih ki Jivan jine ka tarika kaisa tha

Yeshu Masih ki Jivan jine ka tarika kaisa tha

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प्रभु  यीशु मसीह को अपने पूरे जीवन में केसे उदाहरण के रूप में ले सकते हैं ? अाईये देखतें हैं  यीशु मसीह में केसा गुण था ?👇

[हमने मसीह का परिणाम या पालन किया है या नहीं ] महान परिणाम या पालन। हमारे पास उससे सीखने की ज़िम्मेदारी है, जो चीज़ें उसने सिखाईं और जो बातें उसने अपने सांसारिक मंत्रालय के दौरान कीं।

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इन पाठों को सीखने के बाद, हम उनके उदाहरण का पालन करने की आज्ञा के अधीन हैं, और ये कुछ उदाहरण हैं जो उन्होंने हमारे लिए निर्धारित किए हैं:

  • यीशु मसीह, आज्ञाकारी और बहादुर जीवन में, इस प्रकार मृत्यु को आने और मांस और हड्डियों का एक शरीर प्राप्त करने का विशेषाधिकार थे ।

  • उन्हें इस तथ्य के लिए बपतिस्मा दिया गया था कि आकाशीय राज्य का द्वार खोले ।

  • उन्होंने पुरोहितत्व का आयोजन किया और सभी बचत और प्रचारक अध्यादेश प्राप्त किए।

  • यीशु ने सुसमाचार सिखाने, सच्चाई का गवाह बनने और इंसानों को यह सिखाने के लिए और इस दुनिया में आने वाले अनन्त वैभव को पाने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए, यह सिखाने के लिए लगभग तीन साल तक सेवा की।

  • उन्होंने बच्चों के आशीर्वाद, बपतिस्मा, बीमारों के लिए प्रशासन और पुरोहित के लिए आज्ञा सहित कई कार्य किए।

  • उन्होंने चमत्कार किया। उसकी आज्ञा पर अंधे को दृष्टि दी गई, बहरे ने सुना, लंगड़ा हुआ, और मृतक जीवन में लौट आया।

  • पिता के मन और इच्छा के अनुरूप, यीशु ने पाप के बिना एक आदर्श जीवन जीया और ईश्वरत्व के सभी गुणों को प्राप्त किया।

  • उन्हों ने दुनिया को हरा दिया; इसीलिए, उन्होंने हर जुनून का पोषण किया और शारीरिक या सांसारिक और कामातुर से दूर रहते थे , ताकि वे जीवित रहें और आत्मा के मार्गदर्शन में चल सकें।

  • उन्होंने पूरी मानव जाति के पाप के प्रायश्चित के लिए परमेश्वर के द्वारा लाए गये थे , जिससे आदम के पराजय से उत्पन्न [आध्यात्मिक और शारीरिक] मृत्यु से इंसानों को राहत मिली।

  • अब, पुनर्जीवित और महिमावान, उसने स्वर्ग और पृथ्वी में सभी शक्ति प्राप्त कर ली है, पूर्णता प्राप्त कर ली है और पिता के साथ एक होके दाहिने जा बैठे ।

  • यदि हम मसीह के उदाहरण का अनुसरण करते हैं और उसके नक्शेकदम पर चलते हैं, तो हमें वही चीजें करने की तलाश करनी चाहिए जो ढाँचा के चुनाव होने के बाद है।

  • हमारे प्रभु के नश्वर मंत्रालय के दौरान बार-बार उन्होंने एक कॉल जारी किया जो एक बार निमंत्रण और एक चुनौती के रूप में था।

पतरस और उसके भाई आंद्रियास के लिए, मसीह ने कहा, “मेरा अनुसरण करो, और मैं तुम्हें इंसानों का मछुआरा बना दूंगा।”उस धनी युवक से जिसने पूछा कि उसे अनन्त जीवन जीने के लिए क्या करना चाहिए, यीशु ने उत्तर दिया, “जाओ और अपना धन बेच कर , गरीबों को दो … और आओ और मेरे पीछे होलो ।”👉

मत्ती  19:21 और हम में से प्रत्येक व्यक्ति को जो  यीशु कहते हैं, “यदि कोई भी व्यक्ति मेरी सेवा करता है, तो उसे मेरे पीछे आने दो।”👉 (यूहन्ना 12:24)

मत्ती 4:19👇Yeshu Masih ki Jivan jine ka tarika kaisa tha

19) और उस ने उन से कहा, मेरे पीछे आओ, और मैं तुम लोगों को मछुआरे बनाऊंगा।

  • मनुष्यों के मछुवारे होने का मतलब अपने फ़ायदों के लिए लोगों को पकड़ना नहीं था। यीशु के शिष्यों का काम था लोगों को मसीह और अनन्त मुक्‍ति तक लाना।

दुनिया में यह सब से बड़ा और अच्छा काम है। ध्यान दें, यह मसीह हैं जो लोगों को “मछुवारा” (पकड़ने वाला) बनाते हैं – यह उनके मन की उपज नहीं है और अपने आप कुछ नहीं कर सकते।

यीशु उन्हें बनाते हैं, जैसे-जैसे वे यीशु की शिक्षाओं को अपना लेते हैं – यीशु के रास्ते को लेकर उनकी बातों को सुनते हैं और मिलने वाले पवित्र आत्मा को हासिल करते हैं,

प्रेरितों के काम और प्रेरितों के खतों से हम देखते हैं कि किस तरह वे मनुष्यों के पकड़ने वाले बन गए।

आइए हम सभी तरीकों से परमेश्वर के पुत्र यीशु  का अनुसरण करें और जीवन को जिये : 👇

1 कुरिन्थ. 11:1👇

1) जिस तरह से यीशु मसीह मेरे लिए एक उदाहरण हैं, मेरा जीवन तुम्हारे लिए एक उदाहरण बने।

  • पौलुस इस बात का कारण देता है कि उसके नमूने को क्यों अपनाना चाहिये – प्रभु यीशु के समान जीवन जीने के लिए परमेश्‍वर ने उसे योग्य बनाया।

सच पूछें तो उसमें प्रभु यीशु जीवित रहकर कार्य कर रहे थे (गल. 2:20)। वही एक मार्ग हैं जिनके ज़रिये वह या और कोई पौलुस के आदर्श जीवन को अपना सकता है।

लोगों को कैसा जीना चाहिए ? इसके बारे में देखते हैं ? 👇

1 कुरिन्थ. 4:16👇

16) इसलिए ज़ोर डाल कर कहना चाहता हूँ, मेरी तरह जीवन जीओ।

  • पौलुस लोगों को अपनी ओर खींच नहीं रहा था, किंतु उसे मालूम था कि परमेश्‍वर ने उसे इस बात का नमूना बनाया कि लोगों को कैसे जीना चाहिये, और उस सुसमाचार को प्रगट किया था, जिसका वह ऐलान करता था।

वह मसीह का अनुकरण करने वाला था। इसलिए उसकी नकल करना लोगों के लिए ठीक था – वह उन लोगों के समान नहीं था जो कहते कुछ हैं और करते कुछ ।

झूठे शिक्षकों के पीछे चलना सुरक्षित नहीं था जो उन्हें परेशान करने आ गए थे। इस आयतें को कहां पाते हैं  👉मत्ती 23:3 देखें👇

मत्ती 23:3👇

3) इसलिए जो कुछ मानने के लिए वे कहते हैं, मानो और करो, लेकिन उन सब बातों को मत करो जो वे तुम से करने के लिए कहते हैं, लेकिन खुद करते नहीं हैं।

  • जहाँ तक उन्हों ने मूसा द्वारा दिए गए नियमशास्त्र से जो कुछ सिखाया, अवश्य था कि इस्राएली उसको मानें। इस से कुछ लेना देना नहीं, कि वे खुद उसका पालन करते थे या नहीं।👉

रोमि. 2:17-24 से तुलना करें। हर एक अगुवे को चाहिए कि वह खुद वह सब करे जो दूसरों को सिखाता है। (1 तीमु. 4:12; 1 पतर. 5:3)।

तीतुस 2:7👇

7) हर दायरे में दूसरों के लिए अच्छे नमूना बनो। शिक्षा में ईमानदारी, गंभीरता, पवित्रता,

  • दूसरों को सच्चाई सिखाना काफ़ी नहीं है। शिक्षकों को एक नमूना होना चाहिए – 👉1 तीमु. 4:12.

फ़िलिप्पि. 3:17👇

17) भाइयो-बहनो, हम तुम्हारे लिए एक नमूना हैं इसलिए दूसरों के साथ मिलकर मेरी तरह जीवन जियो और उन्हें भी देखते रहो जो ऐसा करते हैं।

  • प्रेरित पौलुस ने सिर्फ़ यह नहीं दिखाया कि उनका चालचलन कैसा हो, उसने वैसा कर के दिखाया। देखिए 👉प्रे.काम 20:18👇

प्रे.काम 20:18👇

18) जब वे वहाँ आए तो उसने उन से कहा, “तुम्हें मालूम है कि पहले दिन ही से जब से मैं एशिया आया, मैं तुम्हारे साथ था और तुम ने मेरा जीवन देखा।

  • एक मसीह के सेवक को क्या होना चाहिए, पौलुस इसका नमूना था। दूसरों को सिखाने के लिए खुद परमेश्‍वर ने उसे ठहराया था।

अपना बड़प्पन दिखाने के लिए अगुवों से ये शब्द पौलुस ने नहीं कहे थे। लेकिन इसलिए कि अगुवे होने के नाते उन्हें कैसा होना चाहिए।

उसे मालूम था कि वह क्या है। वह खुद पर घमण्ड नहीं करता था। तुलना करे 👉1 तीम. 1:16

1 तीम. 1:16👇

16) परन्तु मुझ पर इसलिए दया हुई कि मुझ सब से बड़े अपराधी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाएँ, ताकि जो लोग उन (यीशु मसीह) पर अनन्त जीवन✽ के लिए विश्‍वास करेंगे, उनके लिए मैं एक नमूना बनूँ।

  • पौलुस जो कि सभी बुरे लोगों का मुखिया था, उस पर दया दिखाकर और उसे बचाकर मसीह ने यह दिखा दिया कि वह एक दुष्ट व्यक्‍ति को भी बचा सकते हैं।

किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि बहुत बुरा है और मसीह की दया एवं शक्‍ति से परे है। यदि मसीह दुष्ट, निर्बल, मूर्ख लोगों के साथ धीरज नहीं रखते, तो कोई भी बच नहीं सकता था।👉

2 पतर. 3:9, 15. यह परमेश्‍वर की कामना है कि हर इन्सान मन बदले। इससे तुलना करे 👉2 पतर. 3:15

2 पतर. 3:15👇

15) यह भी जानो कि हमारे प्रभु का धीरज ही हमारे लिए कल्याणकारी और सुरक्षा है, जैसा कि हमारे प्यारे भाई पौलुस ने प्राप्त हुए ज्ञान के आधार पर तुम्हें लिखा है।

  • “अनन्त जीवन”- मसीह पर विश्‍वास करने के द्वारा हम इसे प्राप्त कर सकते हैं।

रोमि 2:17-24👇

17) तुम यदि अपने आप को यहूदी कहते हो, तुम नियमशास्त्र पर भरोसा करते हो और परमेश्‍वर के साथ सम्बन्ध के बारे में घमण्ड करते हो।

18) और तुम उनकी इच्छा जानते हो और उत्तम बातों को सही ठहराते हो, क्योंकि तुम्हें वे बातें नियमशास्त्र से सिखायी गयी हैं।

19) तुम्हें यह भरोसा है कि तुम खुद अन्धों को रास्ता दिखाने वाले और जो अन्धेरे में हैं उनके लिए रोशनी हो।

20) तुम मूर्खों को सिखाने वाले, छोटे बच्चों को शिक्षा देने वाले हो, क्योंकि तुम्हारे पास नियमशास्त्र में ज्ञान और सत्य के ज़रूरी तत्व हैं।

21) इसलिए तुम, जो दूसरों को सिखाते हो, क्या अपने आप को नहीं सिखाते? तुम सिखाते तो हो कि चोरी नहीं करनी चाहिए, लेकिन खुद चोरी करते हो?

22) तुम कहते हो, कि व्यभिचार नहीं करना चाहिए लेकिन खुद ही ऐसा करते हो? तुम जो मूर्तियों से नफ़रत करते हो, क्या खुद मन्दिर को नहीं लूटते हो?

23) तुम तो नियमशास्त्र पर घमण्ड तो करते हो, लेकिन नियमशास्त्र का पालन नहीं करने के द्वारा क्या परमेश्‍वर की बेईज़्जती नहीं करते हो?

24) जैसा कि लिखा है, कि “गैरयहूदियों के बीच परमेश्‍वर के नाम की बदनामी तुम्हारी वजह से होती है”।

  • धार्मिक और स्वधर्मी यहूदी ऐसे लोगों के नमूने थे, जो दूसरों को मापते रहते थे -👉 लूका 18:9-12. वे सोचते थे कि मूसा द्वारा दिए गए निर्देशों, नियमों का पालन करने से अपराध क्षमा मिल सकती है👉 (यूहन्ना 5:39, 45), सोचकर घमण्ड करते थे कि वे परमेश्‍वर के लोग हैं -👉 यूहन्ना 8:41.

दूसरे धर्मों  ( गैरयहूदियों ) में यीशु मसीह का नाम क्यों बदनामी हो रही है ? 👇

रोमि 2:21-24👇

21)  इसलिए तुम, जो दूसरों को सिखाते हो, क्या अपने आप को नहीं सिखाते? तुम सिखाते तो हो कि चोरी नहीं करनी चाहिए, लेकिन खुद चोरी करते हो? 22) तुम कहते हो,

कि व्यभिचार नहीं करना चाहिए लेकिन खुद ही ऐसा करते हो? तुम जो मूर्तियों से नफ़रत करते हो, क्या खुद मन्दिर को नहीं लूटते हो?

23) तुम तो नियमशास्त्र पर घमण्ड तो करते हो, लेकिन नियमशास्त्र का पालन नहीं करने के द्वारा क्या परमेश्‍वर की बेईज़्जती नहीं करते हो?

24) जैसा कि लिखा है, कि “गैरयहूदियों के बीच परमेश्‍वर के नाम की बदनामी तुम्हारी वजह से होती है”।

  • आज के मसिही विश्वासी भाई बहन जो खुद को क्रिस्टियन कहते हैं यीशु मसीह को मानते हैं ; गैरयहूदियों के चालचलन पर हस्सी उड़ाते हैं , पर खुद क्या करते हैं ?

बाईबल में उनके बारे मैं पष्ट बताया गया है ।

वचन के मुताबिक जीना कैसे है उन्हें आता नहीं और दूसरो को शिखाने चले जाते हैं ।

यीशु का जीवन प्रभावित था और प्रेरित भी यीशु मसीह से खूब  प्रभावित थे उन्हों ने यीशु  को अपना नमूना बनाया ।

इसलिए ताकी कालिशिया के लोग और गैरयहूदियों को यीशु केसे थे इस बात को समझाया जाए । पर परमेश्वर की बेईज़्जती बदनामी ऐसे इंसानो के वजह से हो रही है ।

जो गैरयहूदि करते हैं आज के विश्वासी भाई और बहनें भी  वैसा ही करते हैं ।

“हमारा पुराना मनुष्यत्व (पुराना जीवन)”- जो कुछ भी मसीह में नए लोग या विश्‍वासी बनने से पहले थे।

“क्रूस पर चढ़ाया गया”- यह ऐसा कुछ नहीं, जिसे हम स्वयं करते हैं। जब मसीह 30 ए. डी. में क्रूस पर चढ़ाए गए विश्‍वासी उनके साथ क्रूस पर चढ़ाए गए थे।

  • पुरानी वाचा जो यहूदियों की असफ़लता को दिखाती है उसकी ओर इशारा करते हुए, पौलुस अपने दोष की पुष्टि करता है जो यहूदियों की असफ़लता दिखाती है –

यशा. 52:5; यहेज. 36:22. बजाए इसके कि परमेश्‍वर के लोग होने का दावा करें, और बुरे जीवन के कारण उनका अनादर हो, अच्छा है कि वैसा दावा ही न करें।

हमे यीशु मसीह के नाम को ऊंचा उठाने के लिए तयारी करनी चाहिए ना की इस बुरे संसार में अपना नाम ऊंचा करना है ।

हमे जिस तरह के जीवन को जीना चाहिए वैसा हम  जीते नहीं और दूसरो के जीवन शैली को झांकते हैं ; आरे वो व्यक्ति केसा है ये व्यक्ति  केसा है ; बल की हमारा जीवन जीने का तरीका परमेश्वर पिता को  पसंद नहीं आता ।

यीशु मसीह हमारे लिए एक जीता जागता उदाहरण हैं हमें उनके जैसे जीवन जीने का  अभ्यास करना चाहिए ।

गलाति. 2:20👇

20) मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, अब मैं नहीं, लेकिन मसीह मुझ में जीवित हैं। इसलिए इस देह में जो जीवन मैं जी रहा हूँ,

यह परमेश्‍वर के बेटे यीशु की विश्‍वासयोग्यता की वजह से है, जिन्होंने मुझ से प्यार किया और अपने आप को मेरे लिए दे दिया ।

  • “मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया”- केवल पौलुस के लिए नहीं, लेकिन हर एक के लिए यह सच है।👉 रोमि. 6:3-8 देखें।

मसीह उनकी जगह मरे ओर यीशु की मौत को लोगों (विश्‍वासियों) की मौत समझते हैं। एक नए तरीके के जीवन के लिए यही एक रास्ता है।

आत्मिक जीवन के लिए, विश्‍वासी ज़रिया नहीं है। मसीह ही स्त्रोत हैं। यह जीवन जीने के लिए विश्‍वासियों की देह और दिमाग से नया जीवन नहीं आता है, लेकिन उन में रहने वाले मसीह से।👉 रोमि. 8:1-10 से तुलना करें।

नया जीवन परमेश्‍वर में विश्‍वास से जिया जा सकता है। सच्चा मसीही जीवन यीशु पर भरोसा रखने से शुरू होता है और इसी तरह जारी भी रहता है 👉2 कुरि. 5:7; कुल. 2:6-7)।

जो कुछ पौलुस दूसरों को करने के लिए कहता है, वह खुद भी करता है रोमि. 6:11.

गलाति. 1:4👇

4) यीशु, जिन्होंने हमारे पिता की इच्छा के आधार पर हमारे अपराधों के लिए अपने आप को दिया ताकि हमें इस बुरे संसार से छुड़ा लें।

  • “दुष्ट संसार”- “बुरा युग” – इच्छाएँ उद्देश्य आदर्श और इस युग (जैसा कि हर एक युग में है) दुष्ट हैं। देखें यूहन्ना 3:19; 7:17; रोमि. 3:19, 23; 12:2; 1 यूहन्ना 2:16; 5:19. हम इस तरह से बचाए जाते हैं।

हमारे अपराधों को हमसे ले जाने और दोष से बचाने के लिए, मसीह मरे (रोमि. 8:1)। जब हम मन बदलते हैं और उन पर भरोसा रखते हैं, वह हमें माफ़ करते हैं और याहवे परमेश्‍वर का आत्मा हम में आता है।

तब हमें बल मिलता है, कि संसारिकता को त्यागें और परमेश्‍वर के लिए जियें। तभी मसीह हमें दुनिया की बाँधने वाली ताकत से शुद्ध करना शुरू करेंगे।

आखिर में वह लौटेंगे और दुष्टता (अपराध) से पूरी तरह छुड़ाएँगे। यीशु मसीह की क्रूस पर मौत जो अधर्मियों के लिए थी, इसकी नींव है। इसके बिना कोई मुक्‍ति नहीं है।

  • यहाँ यीशु की मौत का एक खास कारण है। यह परमेश्‍वर का चुना हुआ तरीका था, ताकि दुनिया की दुष्टता और उन जंजीरों से लोगों को मुक्‍त करें जिसमें वे बन्धे हुए हैं।

यीशु को रोमि. 11:26 में “छुड़ाने वाला” – कहा गया है। मत्ती 1:21; लूका 4:18; कुल. 1:13; तीतुस 2:14; इब्रा. 2:15 से मिलान कीजिए।

हर वह बात जो लोगों को परमेश्‍वर से दूर रखती है, उन से वह मुक्‍त करते हैं – 5:1; यूहन्ना 8:36; रोमि. 6:17-18.

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |

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