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Yeshu Mashi ki bahumulya Lahoo (Blood of jesus Christ in Hindi )

Yeshu Mashi ki bahumulya Lahoo (Blood of jesus Christ in Hindi ) में एक ऐसी लड़ाई में हूं जिसमें मुझे पहले से ही बताया गया है कि में जीत चुका हूं !

  • मैने मेहनत नहीं की फिर भी  मुझे फेवर मिला है ,हम पर दया हुई है ! क्यों की यीशु मसीह ने मेरे हिस्से के पापों को उठा लिया है !

हमें वो चीजें मिली है जिसके हम लायक भी नहीं थे । इसलिए पतरस कहता है तुम ये बात जानते हो पहले किसी पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम सब पर दया हुई है ।

यीशु मसीह की जय वो राजाओं का राजा है ,वो प्रभुओं का प्रभु है ,वो जीवन की रोटी है , वो जिंदगी का जल है , वो जगत की ज्योति है , वोही मार्ग सच्चाई और जीवन है वो ही आदि और अंत है ,

वो अल्फा और ओमेघा है , वो प्रथम और अंतिम है , वो मुर्दों में से जी उठने का पेहलोठा है और में आपसे कहता हूं यही यीशु आपसे प्रेम करता है    !! अमीन !!

  • कहीं लोग अपने आप को पसंद नहीं करते यही सबसे बड़ा गुनह है ! लोग ये कहते हैं में पापी हूं , में अधर्मी हूं ,

में घटिया हूं और भी न जाने क्या क्या कहते हैं खुद को बल्कि इसे बहुत बड़ा गुनहा कहा जाता है । पता है हम जब खुद को पापी या और कुछ कहते हैं तब हम प्रभु को ये कहते

हैं प्रभु यीशु में आपके खून को नहीं विश्वास करता । लेकिन जब लोग कहते हैं में धर्मी हूं वे यीशु के लहू पर विश्वास करते हैं । नया नियम यीशु के साथ चलने को कहा गया है ।

ओवर फ्रेंडली किसी पुरुष को लड़की के साथ होना पाप का पहला सुरवात होता है । हम इस सरीर को नहीं जानते कि इसके द्वारा शैतान हमें किस तरह धोका देता है ।

इस लिए पोलुश केहता है अपनी जवानी की अभिलाषा से भाग ! और उन के साथ रह जो परमेश्वर का नाम आदर ले कर पुकारते हैं । अगर प्रभु आपको कुछ करने को मना करता है उसे ना करे अगर उसकी बात को अनसुना करते हो तो वो आवाज़ दुवारा नहीं सुनाई देगा

👉 उत्त्पति 6 अध्याय कहता है मेरा आत्मा मनुष्य के साथ सदा वादविवाद नहीं करेगा ।

वो आपको एक बार बोलेगा दो बार बोलेगा उसके बाद आपको छोड़ देगा आपके हालत पर । और जो लोग प्रभु की नहीं सुनते वो धीरे धीरे सुख जाते हैं

आत्मिक रीति से और वे बाईबल अध्यान नहीं कर पाते हैं किसी के मु से प्रभु का वचन तक सुनने को पसंद नहीं करते और वे बोर हो जाते हैं ।

Table of Contents

रोमि 3:25👇

25) जिस अनुग्रह (दया) के स्थान पर विश्‍वास से पहुँचते हैं वहाँ पर उनकी कुर्बानी (प्रायश्चित्त) के समय परमेश्‍वर ने उन्हें (यीशु को) सब के सामने रखा।

1. यीशु का लहू क्या है और वो केसे काम करता है ? उसको केसे इस्तेमाल करते हैं ?

० सब से पहले जान लीजिए यीशु का खून केसे काम करता है ! जैसे कि आप अधिक बोलते या निंदा करते , या झूट बोलते ,या किसी के बारे में गंदी विचार रखतें हैं या और भी बहुत बातें !

तो इस प्रकार की चीजें बन्धन कहलाती है इसे छुटकारा पाने के लिए यीशु का लहू हमारे उपर आना बहुत जरूरी है !  जो लोग पाप का मतलब जानते हैं यीशु के लहू का मूल्य जान पाएंगे !

पतरस कहता है सुनो तुम उसके लहू में छिडके जाने के लिए बुलाए गए हो । पुराने नियम में मिस्र देश में इस्राएल लोग अपने घर के चोखट में मेमने के लहू को लगाए तब

जब परमेश्वर ने मौत का फरिश्ता नीचे उतरा और मिस्र के हर पेहलोठे बच्चे को मार डाला  ! उस वक्त इस्राएल अपने घर में लहू लगाया परमेश्वर ने कहा जिस घर में लहू नहीं लगा होगा

उसके घर में मौत का फरिश्ता आएगा । खून को देख मौत के फरिश्ता उस घर में नहीं घुसता था ।👉 [ निर्गमन12: 7और मेम्ने का थोड़ा-सा खून ले और जिस घर में

वह परिवार मेम्ने को खाएगा, उसके दरवाज़े के दोनों बाज़ुओं और चौखट के ऊपरी हिस्से पर उसका खून छिड़के। ]

  1. निर्गमन 11:4, 5👇

4) फिर मूसा ने कहा, “यहोवा ने कहा है, ‘आज आधी रात को मैं मिस्र आनेवाला हूँ। 5) मिस्र देश का हर पहलौठा मर जाएगा। राजगद्दी पर बैठे फिरौन के पहलौठे से लेकर चक्की पीसनेवाली दासी के पहलौठे तक, सब मर जाएँगे और सब जानवरों के  पहलौठे भी मर जाएँगे।

निर्गमन12: 7और मेम्ने का थोड़ा-सा खून ले और जिस घर में वह परिवार मेम्ने को खाएगा, उसके दरवाज़े के दोनों बाज़ुओं और चौखट के ऊपरी हिस्से पर उसका खून छिड़के।

1.1.  इब्रानियों 11:28👇

28) विश्‍वास ही से मूसा ने फसह का त्योहार मनाया और दरवाज़े की चौखटों पर खून छिड़का ताकि नाश करनेवाला उनके पहलौठों को कोई नुकसान न पहुँचाए।

1.2.  गिनती 3:13👇

13) हरेक पहलौठा मेरा है। जिस दिन मैंने मिस्र देश में सभी पहलौठों को मार डाला था, उसी दिन मैंने इसराएल के हर पहलौठे को अपने लिए अलग ठहराया था,

चाहे इंसान के पहलौठे हों या जानवर के। सभी पहलौठे मेरे होंगे। मैं यहोवा हूँ।”

1.3.  लूका 2:22, 23👇

22) फिर जब मूसा के कानून के मुताबिक उन्हें शुद्ध करने का समय आया, तो वे उसे यहोवा के सामने पेश करने के लिए यरूशलेम ले आए, 23) ठीक जैसा यहोवा के कानून में लिखा है: “हरेक पहलौठा यहोवा के लिए पवित्र ठहराया जाए।”

  • बाईबल के खून का आयतें पड़ने से कुछ नहीं होगा यीशु के लहू को अपने ऊपर या घर पर लगाने से हमें कोई बुरी आत्मा  छू नहीं सकता ।

प्रभु ने नहीं कहा कि खून के बारे में खाली जानकारी रखना है उसे अपने पर उपयोग भी करना होगा । मौत वहां नहीं आ सकती जहां यीशु का खून है ।

इस बात को याद रखना है । जैसे उनके घरों में मौत नहीं घुस पाती वैसे आपके पास भी मौत नहीं आ पाएगी ।

आपको पता नहीं जब आप खून के वचन को अपने मुंह से बोलना शुरू करते हो तब यीशु का लहू दुष्ट आत्मा को दुंडना सुरु कर देता है और वहां से बाहर निकल ता है ।

प्रभु के लहू अंधकार को दूर करता है । किसी इंसान की बेजती मत करो उन्हें परमेश्वर ने अपने खून से खरीदा है । ये कोई ऐसे वैसे खून नहीं है यहोवा परमेश्वर का खून है ।

यीशु मसीह के अंदर से निकलता है ।

1.4.  इब्रानि. 10:22👇

22) तो आओ हम सच्चे मन, और पूरे ईमान के साथ, और विवेक के कचोटते रहने को दूर करने के लिए मन पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्‍वर के पास जाएँ।

  • यीशु का रक्‍त विश्‍वासी के मन पर छिड़का जाता है। इसका मतलब है कि मसीह के बलिदान की समझ और इस बलिदान पर विश्‍वास, मन को धोता है।
  • माटिन लूथर ने कहा था मैने बहुत सारी कलिश्याएं तो देखी पर हर कलिश्याऔं  में मैने संसार को देखा !

जैसे कि मिस्र के लोग मिस्र से बाहर आए पर मिस्र उनके अंदर से कभी बाहर नहीं आया ! कहीं आप भी ऐसा तो नहीं है आप संसार से निकल के यीशु में तो आगए हैं पर संसार आपमें बसा हुआ है ।

प्रभु परमेश्वर ने हमारी खुआइसें पूरी नहीं की पर उन्होंने हमारी जरूरतें पूरी की हैं ।

1.5.  1 पतर. 1:18-19👇

18) क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हारा निकम्मा चालचलन जो पूर्वजों से चला आ रहा है उससे तुम्हारी आज़ादी चाँदी, सोने या बर्बाद होने वाली चीजों से नहीं हुयी।

19) लेकिन निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने अर्थात् मसीह के खून से हुयी।

  • आज के चर्चों में यीशु मसीह के लहू का प्रचार नहीं किया जाता  ; ये बहुत बड़ी दुःख की बात है । बल की पहले समय के प्रचारक जैसे संत पतरस ,

संत पौलुश , संत योहन्ना और भी प्रचारक जिन्होंने यीशु मसीह के लहू के विषय में बाते करते थे । और आज के चर्चों में यीशु के लहू के बारे में कोई बातें करना जरूरी नहीं समझता है !

क्यों आज के समय के चर्च बंधनों में है , जो लोग चर्चों के अंदर आते हैं वे क्यों अपने बहुत सारी बुरी आदतों से आजात या मुक्त नहीं हो पारहें ।

लोग आज व्यवहार में बदलाव क्यों नहीं ला सकते क्यों कि उनके जीवन में बहुत सारी बंधन जो है । हम अपने जीवन में मित्र तो बदल सकतें हैं पर अपने बुरे चरित्र को नहीं बदल सकतें ।

चुगलियां करना , झूठ बोलना , याहां की बातें वहां करना और भी सारी बुरी आदतें ऐसे बंधन यीशु मसीह के लहू के द्वारा धोया जाता है हम खुद इससे मुक्त नहीं हो सकते ।

युहन्ना कहता है यीशु मसीह के बारे में जैसा वो ज्योति में है वैसा तुम ज्योति में रहोगे तो उसका लहू तुम पर भी आएगा ।

हम ऐसे यीशु के लहू को मांगते हैं तो एक बूंद भी लहू नहीं आता । हमें ज्योति की संतान की तरह जीना होगा फिर उसी से यीशु मसीह का लहू मांगने पर मिलता है ।

हमेशा याद रखना यीशु का लहू ज्योति का पीछा करता है और अभिषेक यीशु का लहू का पीछा करता है ।

प्रभु पाखंडियों को नहीं तोड़ता पर प्रभु ईमानदार लोगों के स्वभाव को तोड़ता है और अपने बेटे यीशु के स्वभाव में बनाता है ।

वो भी ऐसे लोगो के बीच में जो दिन प्रति दिन उन्हें बाते सुनते हैं । अगर आप यीशु के लहू के मूल्य को नहीं जानते ना तो हमेशा पाप में फसे रहोगे

अगर उद्धार पाना है तो यीशु के लहू का उपयोग करना सीखो । जो परमेश्वर बोलता है वो बोलना चाहिए डरना मत रिश्ते टूटे तो टूट जाए ;

पर परमेश्वर और हमारे बीच में रिश्ते रहना चाहिए सब कुछ वापस पलट कर आ जाएगा । इसलिए डरो मत परमेश्वर के धार्मिकता में चलो ।

  • हम किसी भी गलत ट्रेन पर नहीं बैठ सकते क्यों कि हमें जहां जाना होता है वो ट्रेन हमे वहां नहीं लेके जाती ।

ठीक उसी तरह हम किसी भी गलत चर्च नहीं जा सकते गलत पास्टर से शिक्षा नहीं ले सकते क्यों कि गलत पास्टर यीशु के जैसे जीना नहीं सीखाते उसके विपरीत वे संसार के तौर तरीके सिखातें हैं ।

पर बाईबल हमें सिखाती है दिन प्रति दिन यीशु मसीह के जैसे जीवन जीना उनके तौर तरीकों को अभ्यास करना  उनके जैसे स्वभाव का अभ्यास करना इत्यादि ।

प्रभु क्या चाहतें हैं हमसे ये ध्यान देने की जरूरत है । ना कि संसार जो करता है उसको । प्रभु यीशु ने काहा जो संसार से मित्रता करता है वो मेरा शत्रु कहलाएगा ।

इसलिए मेरे प्यारे दोस्तों हमें अपना लक्ष्य यीशु मसीह को बनाना चाहिए । आज के समय में कलिश्या को बरबाद करने वाला वो व्यक्ति है जो बाईबल को ठीक से न पढ़ के प्रचार करते हैं ।

अगर कोई व्यक्ति आज तक एक चर्च में जाने के बाबूजत यीशु मसीह जैसा नहीं बनसका वो व्यक्ति गलत पास्टर से शिक्षा ले रहा है समझ जाना ।

हर रविवार उस चर्च में जाओ जो यीशु मसीह जैसे बनने को चेलेंज करती है । हम आज ऐसी मसियत से घिरे हुए हैं जहां प्रचारकों ने बाईबल पढ़ना बंद कर दिया है ।

वो पुराना ज्ञान बांटते हैं ; उन्हें परमेश्वर के तरफ से कोई नया प्रकाशन नहीं है। जानते हो हम दूसरों से प्यार क्यों नहीं कर पाते क्यों कि हम खुदसे प्यार नहीं करते ;

और अपने आपसे प्यार करने का ये मतलब नहीं है कि हम अपने अभीलासाऔं को पूरा करे पर इसका मतलब ये है की परमेश्वर पिता हमें जैसा देखना चाहते हैं वैसे हम खुद के अंदर देखें ,

ये है प्यार का अशली मतलब ।

  • अपनी मरी हुई दिशा से बाहर आना चाहते हो तो यीशु के लहू को लगाना शिखो । आदम पाप करने के बाद परमेश्वर को नहीं पुकार रहा था उसके उल्टा परमेश्वर पिता आदम को पुकार रहे थे ।

हमारी भी ऐसी हालत है हम पाप करते हैं और परमेश्वर पिता को नहीं पुकारते हैं । जीस रात इस्राएल के लोग मिस्र से निकल रहें थे उस रात उन्होंने अपने घर के चौखट में खून लगाया था ।

और जानते हो परमेश्वर ने क्या कहा था जब में खून को देखूंगा तुम्हें कुछ नहीं करूंगा । क्यों पुराने नियम में परमेश्वर ने कहा था पाप करने के बाद खून चढाओ !

खून ही क्यों चढ़ाना था।  क्यों की खून में ज़िन्दगी है । उसी के लहू में पापों की क्षमा और छूटकारा है । कोई भी बीमारी या बंधन आती है और जाती है पर हम यीशु के लहू के द्वारा इन बातों से छुटकारा पा सकते हैं ।

मेरे बाप ने आज से दोहजार साल पहले मेरे लिए खून बहया था उसी खून में छुटकारा और पापों की क्षमा है । शैतान के दूत सुनते हैं हमको ।

  • ‘गैरयहूदी’ उनकी दुष्टता और अविश्‍वास की वजह से वे लोग परमपिता से दूर थे। मसीह में आने से वे परमेश्‍वर के पास लाए गए।

परमेश्‍वर की मौजूदगी के लिए एक रास्ता खुल गया । अब वह सभी विश्‍वासियों को प्रोत्साहन देता है कि वे इस सच्चाई के अनुरूप व्यवहार करें।

इसके द्वारा वह यह भी दिखाता है कि परमेश्‍वर की निगाह में उनका स्थान कितना “सिद्ध”- है। पर्दा मसीह को दिखाता है।

जब मसीह देह में आकर हमारे गुनाहों के लिये मरे और हमारे अपराधों के लिये मरे, तब मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट गया था – 👉मत्ती 27:50-51. दूसरे शब्दों में,

उनकी मृत्यु ने पिता की उपस्थिति में जाने का रास्ता खोल दिया। महापवित्र स्थान में हम मसीह की क्रूसित देह के कारण जो हमारे लिये तोड़ी गयी, दाखिल हो सकते हैं।

  • हृदय का छिड़काव भीतरी अनुभव को दिखाता है। मसीह द्वारा खून बहाये बिना, किसी के लिये कोई मुक्‍ति नहीं है ।

हम को छुड़ाने और अपना बनाने के लिये परमेश्‍वर ने दाम चुकाया   यह अनमोल है, शब्दों से उसे आँका नहीं जा सकता । देखें यीशु का रक्‍त विश्‍वासी के मन पर छिड़का जाता है।

इसका मतलब है कि मसीह के बलिदान की समझ और इस बलिदान पर विश्‍वास, मन को धोता है। पुराने नियम में वर्णित बलिदानों का स्मरण इस शब्द ‘मेम्ने’ से होता है।

यूहन्ना कहना चाहता है कि जगत के पापों को उठा लेने के लिये परमेश्‍वर पिता प्रभु यीशु मसीह को बलिदान के रूप में नियुक्‍त करेंगे।

यह कुर्बानी मात्र व्यक्‍तिगत रूप से इस्राएलियों के लिये ही नहीं, परन्तु संपूर्ण विश्‍व के लिये है। यह बलिदान संपूर्ण मानवजाति के लिये होगा।

प्रभु यीशु ने मनुष्य के गुनाहों को उठा लिया। परमेश्‍वर के प्रति जो कुछ ऋण का बोझ मनुष्य पर था, उसे यीशु ने उठा लिया।

इसका अर्थ यह नहीं कि सभी ने उद्धार पा लिया। इसका अर्थ यह है कि मुक्‍ति का मार्ग और पूर्ण क्षमा संपूर्ण मनुष्य जाति के लिये प्राप्त है।

  • विवेक मनुष्य का वह भाग है जो उसके कार्यों को उचित अनुचित है, अच्छा बुरा ठहराता है। यदि हमारा विवेक अपराध से अशुद्ध हो चुका है और अपराध चेतावनी है, तो इसे शुद्धता की आवश्यकता है। यह जानना आवश्यक है,
  • कि गुनाह और अपराध हटा दिये गये हैं और अब कोई कारण नहीं रहा है कि परमेश्‍वर का न्याय और सज़ा आए। यही मसीह का रक्‍त करता है।
  • मसीह के बलिदान के विषय में हमारा ज्ञान और यह विश्‍वास कि उनका खून हमारे पापों को हटाने के लिये बहाया गया, हमारे विवेक को सन्तुष्ट करता है। मसीह का खून हमें इस ज्ञान से शुद्ध नहीं करता कि हम अपराधी हैं।

किंतु आश्‍वासन देता है कि परमेश्‍वर का क्रोध हम से हटा दिया गया है। परमेश्‍वर मसीह के बलिदान के सत्य का जो हमारे मनों में है, हमारे विवेक को सिखाने और शुद्ध करने के लिये उपयोग करते हैं।

एक जगाया हुआ विवेक जो दोषी ठहराता है और हमारे विरोध में, आक्रोश दिखाता है बड़ा कष्टदायी हो सकता है। वह शान्ति और सुकून कैसे पा सकता है। केवल मसीह के बलिदान में। जब यह होता है तब हम आज़ादी और आनन्द से ‘जीवित परमेश्‍वर की सेवा’ कर सकते हैं।

  • अपने बहे खून से यीशु ने एक नयी वाचा (करार या सहमति या सम्बन्ध) को स्थापित किया है। सीनै पहाड़ पर इस्राएल से परमेश्‍वर ने जो वाचा बाँधी थी वह इस से बिल्कुल फ़र्क थी।

पुरानी वाचा में व्यवस्था और कार्य थे। नयी वाचा तरस और कृपा की थी। इस में परमेश्‍वर उन सभी को पापों की माफ़ी का वायदा देते हैं जो यीशु पर विश्‍वास लाते हैं।

  • यीशु मसीह का लहू बहुत लोगों के लिए बहाया गया है , यह उन लोगों की तरफ़ इशारा है जो यीशु को मुक्‍तिदाता के रूप में कबूल करते हैं और उनकी मौत के फ़ायदे पाते हैं।
  • यीशु के यहाँ आकर पापों के लिए बलिदान दिए जाने से पहले, परमेश्‍वर ने उन्हें क्षमा किया, जिन्होंने अपना मन बदला और विश्‍वास किया।

परमेश्‍वर ने उन्हें नरक का दण्ड नहीं दिया, क्योंकि जग के स्वामी को यह मालूम था कि मसीह के द्वारा वह क्या करेंगे।

किन्तु उस समय ऐसा नहीं लगा कि संसार के धर्मी जज सजा देने के बजाए लोगों को माफ़ी देने के लिए इन्साफ़ से काम करेंगे।

हालाँकि नियम ने उन्हें दोषी ठहराया, फिर भी परमेश्‍वर ने उन्हें बच जाने दिया। अपराध के लिए कुर्बान होने के लिए अपने बेटे को भेजकर परमेश्‍वर ने अपने न्यायी होने का सबूत दिया।

  • क्या दण्ड पाने वालों के स्थान पर यीशु का बलिदान होना, परमेश्‍वर पिता के न्याय को दिखाता है? हाँ क्योंकि मसीह परमेश्‍वर हैं ।

वह स्वयं दूसरों के लिए मरे मसीह में होकर परमेश्‍वर ने उनके अपराध लेकर दुख उठाया।

  • यह असंभव क्यों था? पशु मनुष्यों का स्थान नहीं ले सकते थे और न ही उनके स्थान पर मर सकते थे। वे मात्र एक प्रतीक थे।

उनके (पशुओं के) अज्ञानी होने के कारण, और अनिच्छा से वध किये जाने के कारण, वह दण्ड जो मनुष्य के ऊपर उसके अपराध के कारण था, उसे वे उठा नहीं सकते थे।

यह दण्ड आत्मिक मृत्यु, और परमेश्‍वर से अलगाव था। मनुष्य भी दूसरे मनुष्यों के लिये अपराध बलि नहीं बन सकता था।

हर मनुष्य दोषी है और वह केवल अपने ही गुनाहों के लिये मरेगा, किसी और के पापों के लिये नहीं। यदि कोई निष्पाप व्यक्‍ति होता, और यदि वह पापों के लिये बलिदान हो सकता, तो वह किसी और एक ही व्यक्‍ति के बदले में मर सकता, सारी मानवजाति के लिये नहीं। फिर परमेश्‍वर को भी इस बात के लिये सहमत होना पड़ता, और वह सहमत नहीं हुए।

प्रायश्चित्त के विषय में और दूसरे के ऐवज़ (बदले) में मरने के लिये हमें निम्नलिखित बातों को समझना होगा।

  • जो भी बुरा हम करते हैं, वह परमेश्‍वर के विरोध में करते हैं – भजन 51:4. जो बुराई मनुष्य दूसरे लोगों के, या स्वयं के, या संसार के विरोध में करता है,

वह बुराई वास्तव में परमेश्‍वर के विरोध में ही है, क्योंकि सभी मनुष्य और सारी सृष्टि उनकी संपत्ति है। यदि परमेश्‍वर मनुष्यों को क्षमा करना चाहें,

तो उन्हें उनके पापों के परिणाम को सहने के लिये तैयार होना होगा। और जो कुछ किया है उसके लिये कीमत चुकानी होगी।

गुनाह, दण्ड या बलिदान के लिये पुकारता है (देखें गिनती 31:1-3; व्यव. 32:41,43; यशा. 34:8; 47:3; रोमि. 12:19)। कौन इस सजा को सहेगा या सह सकता है?

उनके तोड़े हुए नियमों के कारण परमेश्‍वर को जिस न्यायोचित सज़ा की माँग है, वह कौन सह सकता है? क्या मनुष्य के लिये बलि किया गया पशु इस सज़ा को सह सकता है?

यह असम्भव है, तो कौन कर सकता है? अपराधी लोग या परमेश्‍वर स्वयं? केवल वही एक निष्पाप मनुष्य के रूप में आकर लोगों के अपराधों के लिये

स्वयं को बलिदान के रूप में देकर उनकी सज़ा को सह सकते और उनकी सज़ा को ले सकते थे। यही यीशु ने किया।

प्रायश्चित्त और क्षमा दुख पर आधारित हैं, बलि किये हुए पशु के दुख पर नहीं। हमारे अपने दुखों पर नहीं किंतु परमेश्‍वर के।

2.  प्रभु यीशु मसीह के लहू की सामर्थ : – 👇 Yeshu Mashi ki bahumulya Lahoo (Blood of jesus Christ in Hindi )

2.1.  इफिसियों 2:13 👇

13) मगर अब तुम मसीह यीशु के साथ एकता में हो। तुम जो एक वक्‍त पर परमेश्‍वर से बहुत दूर थे, अब मसीह के खून के ज़रिए उसके पास आए हो।

2.2.  लैव्यव्यवस्था 16:6👇

6) फिर हारून को पाप-बलि का बैल सामने लाना चाहिए, जो उसके अपने पापों के लिए होगा। वह अपने और अपने घराने के पापों के लिए प्रायश्‍चित करेगा।

2.3.  लैव्यव्यवस्था 16:15👇

15) फिर वह पाप-बलि का बकरा हलाल करेगा जो लोगों के लिए होगा। वह बकरे का खून लेकर परदे के अंदर जाएगा और उसे ठीक उसी तरह छिड़केगा जैसे वह बैल का खून छिड़कता है। उसे यह खून ढकने के सामने छिड़कना चाहिए।

2.4.  इब्रानियों 9:13👇

13) अगर बकरों और बैलों के खून से और दूषित लोगों पर कलोर की राख छिड़कने से उनका शरीर परमेश्‍वर की नज़र में शुद्ध ठहरता है,

14)  तो फिर मसीह का खून, जिसने सदा तक कायम रहनेवाली पवित्र शक्‍ति के ज़रिए खुद को एक निर्दोष बलिदान के तौर पर परमेश्‍वर के सामने अर्पित किया,

हमारे ज़मीर को बेकार के कामों से और कितना ज़्यादा शुद्ध कर सकता है ताकि हम जीवित परमेश्‍वर की पवित्र सेवा कर सकें!

2.5.  इब्रानि. 10:19-22👇

19) इसलिए हे भाइयो-बहनो, जब कि हमें यीशु के खून के द्वारा उस नये और जीवित रास्ते से पवित्र जगह में दाखिल होने की हिम्मत हो गयी है,

20) जो यीशु ने पर्दे अर्थात् अपनी देह में से होकर, हमारे लिए खोल दिया (अभिषेक किया) है। 21) और इसलिए कि हमारा ऐसा महान मध्यस्थ (याजक, पुरोहित) है , जो परमेश्‍वर के घर✽ का अधिकारी है,

2.6.  इफिसियों 1:7👇

7) उसी बेटे के खून के ज़रिए फिरौती देकर हमें छुड़ाया गया है। हाँ, उसी के ज़रिए परमेश्‍वर की भरपूर महा-कृपा हम पर हुई और हमें गुनाहों की माफी दी गयी।

2.7.  इब्रानियों 10:22👇

22) तो आओ हम सच्चे दिल से और पूरे विश्‍वास से परमेश्‍वर के पास जाएँ। क्योंकि हमारे दिलों पर छिड़काव करके हमारे दुष्ट ज़मीर को शुद्ध किया गया है और हमारे शरीर को शुद्ध पानी से नहलाया गया है।

2.8.  प्रकाशितवाक्य 1:5👇

5) तुम्हें यीशु मसीह की तरफ से भी महा-कृपा और शांति मिले जो “विश्‍वासयोग्य साक्षी,” “मरे हुओं में से ज़िंदा होनेवालों में पहलौठा” और “धरती के राजाओं का राजा” है।

यीशु जो हमसे प्यार करता है और जिसने अपने खून के ज़रिए हमें पापों से छुड़ाया

2.9.  1 पतरस 1:18, 19👇

18) तुम जानते हो कि तुमने अपने पुरखों से निकम्मी ज़िंदगी के जो तौर-तरीके सीखे थे, उनसे छुटकारा पा लिया है। तुमने यह छुटकारा सोने-चाँदी जैसी नश्‍वर चीज़ों की वजह से नहीं,

19) बल्कि मसीह के बेशकीमती खून की वजह से पाया है, जो एक बेदाग और निर्दोष मेम्ना है।

2.10.  1 यूहन्‍ना 1:7👇

7) लेकिन अगर हम रौशनी में चल रहे हैं जैसा वह खुद भी रौशनी में है, तो हम ज़रूर एक-दूसरे के साथ साझेदार हैं और उसके बेटे यीशु का खून हमारे सभी पापों को धोकर हमें शुद्ध करता है।

2.11.  रोमियों 3:25👇

25) परमेश्‍वर ने मसीह को बलिदान के तौर पर दे दिया ताकि मसीह के खून पर विश्‍वास करने से पापों का प्रायश्‍चित हो।

ऐसा उसने खुद को नेक साबित करने के लिए किया क्योंकि बीते ज़माने में उसने लोगों के पापों को बरदाश्‍त किया और उन्हें माफ करता रहा।

2.12.  प्रेषितों 20:28👇

28) तुम अपनी और पूरे झुंड की चौकसी करो जिसके बीच पवित्र शक्‍ति ने तुम्हें निगरानी करनेवाले ठहराया है ताकि तुम चरवाहों की तरह परमेश्‍वर की मंडली की देखभाल करो जिसे उसने अपने बेटे के खून से खरीदा है।

2.13.  प्रकाशितवाक्य 5:9👇

9) और वे एक नया गीत गाते हुए कहते हैं, “तू ही इस खर्रे को लेने और इसकी मुहरें खोलने के योग्य है, क्योंकि तुझे बलि किया गया और तूने अपने खून से हर गोत्र,

भाषा और जाति और राष्ट्र से परमेश्‍वर के लिए लोगों को खरीद लिया

2.14.  1 कुरिंथियों 10:16👇

16) धन्यवाद का वह प्याला, जिसके लिए हम प्रार्थना में धन्यवाद देते हैं, क्या वह मसीह के खून में एक हिस्सेदारी नहीं? जो रोटी हम तोड़ते हैं, क्या वह मसीह के शरीर में एक हिस्सेदारी नहीं?

2.15.  निर्गमन 24:8👇

8) तब मूसा ने वह खून लेकर लोगों पर छिड़का और कहा, “तुमने इस किताब में लिखी बातों को मानने की हामी भरी है इसलिए देखो, यहोवा ने तुम्हारे साथ जो करार किया है उसे यह खून पक्का करता है।”

2.16.  यिर्मयाह 31:31👇

31) यहोवा ऐलान करता है, “देख! वे दिन आ रहे हैं जब मैं इसराएल के घराने और यहूदा के घराने के साथ एक नया करार करूँगा।

2.17.   इब्रानियों 7:22👇

22) उसी के मुताबिक यीशु एक बेहतर करार का ज़ामिन ठहरा है।

2.18.  मरकुस 14:24👇

24) फिर यीशु ने उनसे कहा, “यह मेरे खून की निशानी है, जो करार को पक्का करता है और जो बहुतों की खातिर बहाया जाएगा।

2.19.  इब्रानियों 9:20👇

20) और कहा, “यह खून उस करार को पक्का करता है जिसे मानने की आज्ञा परमेश्‍वर ने तुम सबको दी है।”

2.20.  इब्रानियों 9:22👇

22) हाँ, कानून के मुताबिक करीब-करीब सारी चीज़ें खून से शुद्ध की जाती हैं। और जब तक खून नहीं बहाया जाता तब तक हरगिज़ माफी नहीं मिलती।

2.21.  मत्ती 20:28👇

28) जैसे इंसान का बेटा भी सेवा करवाने नहीं, बल्कि सेवा करने आया है और इसलिए आया है कि बहुतों की फिरौती के लिए अपनी जान बदले में दे।”

2.22.  कुलुस्सियों1:20 👇

20) और उसी के ज़रिए वह अपने साथ बाकी सब चीज़ों की सुलह करवाए, फिर चाहे वे धरती की चीज़ें हों या स्वर्ग की। परमेश्‍वर ने यह शांति उस खून के आधार पर कायम की जो मसीह ने यातना के काठ पर बहाया था।

2.23.  लैव्यव्यवस्था 17:11👇

11) क्योंकि हरेक जीवित प्राणी की जान उसके खून में है। और मैंने खुद यह इंतज़ाम ठहराया है कि खून वेदी पर उँडेला जाए ताकि तुम्हारी जान के लिए प्रायश्‍चित हो, क्योंकि खून में ही जान है और खून से ही पापों का प्रायश्‍चित किया जा सकता है।

2.24.  लैव्यव्यवस्था 17:14👇

14) हरेक जीवित प्राणी का खून ही उसका जीवन है क्योंकि खून में उसकी जान है। इसीलिए मैंने इसराएलियों से कहा, “तुम किसी भी जीवित प्राणी का खून न खाना, क्योंकि हर जीवित प्राणी का खून उसका जीवन है। जो भी खून खाएगा उसे मौत की सज़ा दी जाएगी।”

2.25.  व्यवस्थाविवरण 12:23👇

23) मगर तुम इतना ज़रूर ठान लेना कि तुम खून हरगिज़ नहीं खाओगे क्योंकि खून जीवन है। तुम गोश्‍त के साथ जीवन न खाना।

2.26.  लैव्यव्यवस्था 8:15👇

15) मूसा ने बैल हलाल किया और अपनी उँगली से उसका खून लिया और उसे वेदी के सींगों पर लगाया। इस तरह उसने वेदी से पाप दूर करके उसे शुद्ध किया और बैल का बाकी खून वेदी के नीचे उँडेल दिया। इस तरह उसने वेदी के लिए प्रायश्‍चित किया और उसे पवित्र ठहराया।

2.27.  लैव्यव्यवस्था 16:18👇

18) फिर वह बाहर उस वेदी के पास जाएगा जो यहोवा के सामने है और उस वेदी के लिए प्रायश्‍चित करेगा। वह बैल और बकरे का थोड़ा खून लेकर वेदी के सींगों पर लगाएगा।

2.28.  मत्ती 26:28👇

28) क्योंकि यह मेरे खून की निशानी है, जो करार को पक्का करता है और जो बहुतों के पापों की माफी के लिए बहाया जाएगा।

2.29.  रोमियों 5:9👇

9) तो अब जब हम उसके खून से नेक ठहराए जा चुके हैं, तो हम उसके ज़रिए परमेश्‍वर के क्रोध से भी क्यों न बचेंगे?

2.30.  इब्रानियों 13:12👇

12) इसलिए यीशु ने भी शहर के फाटक के बाहर दुख उठाया ताकि वह अपने खून से लोगों को पवित्र कर सके  ।

2.31.  1 पतरस 1:2👇

2) उन्हें परमेश्‍वर हमारे पिता ने भविष्य के बारे में पहले से जानने की अपनी काबिलीयत का इस्तेमाल करके चुना है और वे पवित्र शक्‍ति से पवित्र ठहराए गए हैं

ताकि आज्ञा माननेवाले बनें और उन पर यीशु मसीह का खून छिड़का जाए। तुम पर परमेश्‍वर की महा-कृपा और शांति और भी बढ़कर हो।

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |

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