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Vyabichar kya hai ? iske vare Bible hume kya shikhya deti hai ?

Vyabichar kya hai ? iske vare Bible hume kya shikhya deti hai ?

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Vyabichar kya hai ? iske vare Bible hume kya shikhya deti hai ?

हम  2 शमूएल 11:2 में पाते हैं व्याभिचार  करने वाला पैहला  व्यक्ति  दाऊद था जिसने एक पाप को छुपाने के लिए कितने पाप किए थे ।

दाऊद ने अपने मन में जो विचार किए उस विचार को पूरा करने के लिए योजनाएं बनाई फिर अंजाम दिया !   👇

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1) दाऊद ने व्यभिचार किया

2) उरियाह को मरवा डाला

3) बतशेबा को पत्नी बनाया

  • व्याभिचार एक ऐसा पाप है जिसे लोग अपने ही देह के विरुद्ध करते हैं । वैश्यावृती इतनी बढ़ गई है कि आज के समयों में बिना विवाह किए

नाजायज़ यौन-संबंधों को  रखना आम बात बन चुकी है। सड़कों के मोडो  पे , पब्लिक के बीचों में , जहां लोग आते जाते रहते हैं वहां बिना किसी शर्म के कामुकता के काम करना ।

आज के वर्तमान समय में टीवी टेलीवजन या  अश्‍लील किताबों से , अश्‍लील कपड़े पहन ने से , अश्‍लील तस्वीर ,अश्‍लील  गाने ,  अश्‍लील बातें , ‍

और मोबाइल फोन से ऐसी व्यवशता दि गई है जिस से लोग गलत चीजों को देखते और करते हैं । आज बहुत से  बलात्कार भी  व्याभिचार के चलते  होता है ;

कोई व्यक्ति मन से व्याभिचार करता है उसके बाद बलात्कार करता है !  इस बुरे संसार का असर बच्चों पर भी पड़ रही है । व्याभिचार का पहला शुरवात दोस्ती से शुरू होती है ।

देखे किस तरह से पहले एक लड़का लड़की दोस्ती करते हैं उसके बाद प्यार होता है  विवाह से पहले नाजायज़ यौन-संबंध कर लेते हैं ।‍

  • आज के बुरे संसार में ये भी देखने को मिलता है शादी शुदा आदमी या औरत भी इसी पाप को अंजाम देते हैं ।

पति के होते हुए पत्नी दूसरे आदमी से रिश्ता रखतीं है और ठीक उसी तरह पुरुष भी पत्नी के होते हुए दूसरी औरत के साथ नाजायज़ यौन-संबंध रखता हैं ।

  • याद रखिए यीशु मसीह एक जगा ऐसा भी कहा है में शांति के लिए नहीं में इसलिए आया ताकि में तलवार चला सकूं किस चीज पर तलवार चलती है

वो चीज जिस से आपके ज़िन्दगी में परमेश्वर से जाड़ा एमियत (important) रखती है उस पर यीशु तलवार चलाने आया है इसका मतलब है

किसी भी प्रकार के चीज से लगातार लगाव (attachment)  रखता है जो इंसान यीशु मसीह उस (attachment )  पर तलवार चलाने आए हैं। ताकि हम उस गंदी विचारों से गंदी आदतों से बहार निकल सकें ।

व्यभीचार कितने प्रकार के होते हैं ? और क्या क्या है ?👇

  • व्यभीचार तिन किसम्म के होते हैं 👇
  1. i) एक व्यभीचार वो होता है आपकी शादी नहीं हुई है और आप शादी से पहले किसी के साथ शारिरिक संबंध बनाई है या शादी हो चुकी है

उसके बाद किसी दूसरे आदमी या औरत के साथ शारिरिक संबंध बनाई और पाप किया है इसे बाईबल व्यभीचार केहती है।

और याद रखिए गा एक व्यभीचार अपनी पत्नी को छोड़ किसी और के साथ शारिरिक संबंध रखना पाप है या किसी और आदमी के साथ शारिरिक संबंध रखना पाप है।

  1. ii) और दूसरा व्यभीचार है जो यीशु ने कहा है तुम सुन चुके हो कि कहा गया था कि व्यभिचार मत करना। लेकिन मैं तुम से यह कहता हूँ कि जो कोई किसी महिला को बुरी नज़र से देखे, वह अपने मन में उससे व्यभिचार कर चुका। अगर में किसी भी बहन को मन में उनके लिए कुछ गलत विचार किया है में उन्हें टच करू या न करू बाईबल कहती है मैने पाप कर लिया है ।

iii) और तीसरा व्यभीचार है यीशु कहते हैं अगर तुम्हारा दाहिना हाथ तुम्हारे बुराई में गिरने की वजह बने, तो उसे काट कर अपने पास से फेंक दो।

क्योंकि तुम्हारे लिए फ़ायदा इसी में है कि तुम्हारे अंगों में से एक बर्बाद हो जाए और तुम्हारी पूरी देह नरक में न डाली जाए।

और इस पाप का नाम हस्तमैथुन जिसको हांतो से व्यभीचार के पाप करते हैं।

  • याद रखो आप बहुत समझदार है अच्छे से जानते हैं हस्तमैथुन के पाप केसे किया जाता है । आप चाहे पहली प्वाइंट(point)

वाले व्यभीचार ना भी करते हो पर ये दोनों  point वाले व्यभीचार में मन में किसी भी तरह कर सकते हो या कर रहे हो ये आपके साथ होसकता है।

बहुत सारे लोगों को उनके मोबाइल फोन ने उन्हें व्यभीचार बना लिया है। बहुत सारे बहनें ऐसे भी कपड़े पहनती हैं जिसे दूसरे सरीफ लोग भी देख के व्यभीचार में पड़ सकता है

क्या हम किसीको पाप में डाल ने में कारण हो चुके हैं क्या बाईबल हमें ये नहीं सिखाती की तू किसीके पाप का कारण मत बन वो बात अलग है

जो बेहने अच्छी कपड़े पहनती हैं उनको भी व्यभीचार के नजर में देखते हैं। व्यभीचार एक मीठा जहर है ।

  • मेरे बहनों आप किसी का पाप का कारण मत बनिए जिस दिन आप परमेश्वर के सामने खड़े होंगे तब पिता कहेंगे ये मेरी बेटी है जो अपने कपड़ों के द्वारा भी मेरी महीमा की है !

इस में परमेश्वर को कितना अच्छा लगेगा। जरा सोचिए बहनों आप इजतदार कपड़े पहनेंगे तो लोगों के नजर आप पर नहीं पड़ेगी और आप भी सुरक्षित रहेंगे।

  • क्या आप जानते हो अगर आप को व्यभीचार से बचना चाहते हैं तो वहां से भागना पड़ेगा ; क्योंकि आप वहां पे खड़े होकर अन्य भाषा में प्रार्थना क्यों ना करे

आप नहीं बच पाएंगे ये प्रलोभन से क्यों की ये बहुत मजबूत(strong) है अब आप कहोगे भागने का मतलब क्या है अगर आप एक लड़का और लड़की है

आप हर रोज बातें करते हैं तो में आपको बताना चाहता हूं भले ही आप किसी भी संबंध से शुरू क्यों ना किया हो वो एक दिन आपके विचार बदलेंगी और

फिर एक दिन आपके फीलिंग्स एक दूसरे के लिए बनेगि और जानते हैं फिर क्या होगा फिर गुन्हा चालु हो जाएगा ।

अगर आप रोज बातें करते हैं आप कितनी भी प्रार्थना क्यों ना करते हो आपका कोई उत्तर नहीं आएगा । आगर आप एक भाई  हैं

और किसी लड़की से फोन पे बात करते हो वो भी रोजाना चैटिंग से या बातें करके तो आपके दिमाग पे उसके लिए गन्दे गन्दे खयाल आएंगे और

तब आप प्रभु से कहोगे प्रभु मुझे माफ़ कर मुझे यहां से निकाल तब प्रभु यीशु कहेंगे वहां से भाग और जानते हो भागने का मतलब क्या है

आपको अपने इस संबंध से दूरी (distance) रखना है। कोई भी लड़का किसी भी लड़की से बात करेगा वो फसेगा या कोई भी लड़की किसी भी लड़के के साथ हर रोज बात करेगी वो फसेगी।

आपको लगेगा पहले पहले हम दोनों दोस्त हैं फिर धीरे धीरे फ्लटिंग के शब्द (word) बोलेंगे और एक दिन आप परमेश्वर के खिलाफ और बाकी सब परिवार के खिलाफ जाओगे।

मेरे भाई बहन लड़का लड़की कभी दोस्त नहीं बन सकते हैं क्यों कि शैतान ऐसा कभी नहीं होने देता क्यों की ये पूरा संसार उसी का है।

इस लिए प्रभु यीशु कभी एक लड़का लड़की का शादी से पहले का संबंध को आदर नहीं देते हैं पर परमेश्वर पिता शादी को आदर देते हैं।

याकूब 1:14,15👇

14) लेकिन हर किसी की इच्छा उसे खींचती और लुभाती है, जिससे वह परीक्षा में पड़ता है।

15) फिर इच्छा गर्भवती होती है और पाप को जन्म देती है और जब पाप कर लिया जाता है तो यह मौत लाता है।

  • जैसी पवित्रता परमेश्‍वर में है, जन्म से हमारे पास वैसी पवित्रता नहीं है। हमारा पुराना स्वभाव बिल्कुल गिर चुका है,

भ्रष्ट है इसीलिए बुराई की तरफ़ हम खिंचे चले जाते हैं (गल. 5:16-17; रोमि. 7:15-20; इफ़ि. 4:22-24)। शैतान यह सब अच्छी तरह से जानता है और हमारे सामने लालच लाता है।👉 (1 थिस्स. 3:5)

यदि हम परीक्षा में लुढ़क जाते हैं, तो हमें परमेश्‍वर को दोषी नहीं ठहराना चाहिए तुलना करें 👉1 कुरि. 10:13.

  • बुराई का आखिरी परिणाम आत्मिक मौत है, तुलना करें 👉उत्पत्ति 2:17; रोमि. 5:12; 8:6. सभी बुरे कामों की शुरूआत अभिलाषा में है (उत्पत्ति 3:6; 2 पतर. 1:4; 1 यूहन्ना 2:16)।

जो शक्‍ति प्रभु हमें देते हैं, उसकी मदद से हमारी अभिलाषाओं के युद्ध में हमें लड़ना चाहिए और इसके पहले कि बुराई कर डाली जाए अभिलाषा पैदा होती है।

  • परमेश्‍वर के पास गुनाहगारों को दण्ड देने का एक तरीका था, उन्हें छोड़ देना उस इन्साफ़ के लिए जो गुनाह के कारण उन पर आने वाला था।

जो दुष्टता लोग ढिठाई के कारण करते हैं, उसमें उन्हें छोड़ देना सब से बड़ा और इन्साफ़ का दण्ड है तुलना करें व्यव. 32:19-22; न्यायियों 2:10-15.

  • इन भयानक एवं सच्चे शब्दों पर ध्यान दें। मनुष्यों को दिया हुआ सब से बड़ा धन परमेश्‍वर का ज्ञान है।

यह सारे संसार के ज्ञान की तुलना में बड़ा और अधिक है (भजन 19:10; 119:72; नीति. 2:1-5; यिर्म. 9:23-24 से तुलना करें। मानव जाति ने इस दौलत की कीमत नहीं जानी।

उन्हों ने इसका दण्ड भी प्राप्त किया। परमेश्‍वर ने उन्हें उसे गंदगी और दुष्टता के आधीन जाने दिया, जिन्होंने उसे चुना और प्यार किया।

1 कुरिन्थ. 6:18-20👇

18) व्यभिचार (यौन गुनाह) से भागो । कोई गुनाह देह पर इतना असर नहीं डालता है जितना यौन अनैतिकता। यह गुनाह अपनी देह के विरोध में है।

19) क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मंदिर है ? वह तुम में है, तुम्हें परमेश्‍वर से मिला है और तुम अपने नहीं हो ।

20) तुम बड़ी कीमत  देकर खरीदे गए थे। इसलिए तुम्हें अपनी देह से परमेश्‍वर को आदर देना चाहिए।

रोमियों 1:24👇

24) इसलिए परमेश्‍वर ने उनके दिल की बुरी इच्छाओं के मुताबिक उन्हें अशुद्ध काम करने के लिए छोड़ दिया ताकि वे अपने ही शरीर का अनादर करें।

रोमियों 1:27👇

27) उसी तरह आदमियों ने भी औरतों के साथ स्वाभाविक यौन-संबंध रखना छोड़ दिया और आदमी आपस में एक-दूसरे के लिए काम-वासना से जलने लगे।

आदमियों ने आदमियों के साथ अश्‍लील काम किए और अपनी करतूतों का पूरा-पूरा अंजाम भुगता।

  • हम कहाँ भागें ? 👉नीति. 18:10. विश्‍वासियों को यौन अनैतिकता का विचार तक नहीं करना चाहिये।👉 मत्ती 5:28; इफ़ि. 5:3)।

हमें यह देखने का प्रयत्न नहीं करना चाहिये कि हम बिना गुनाह किए कितने पास आ सकते हैं, लेकिन जितना संभव है दूर रहें।

हमें व्यभिचार (यौन गुनाह)  से क्यों भागना चाहिए ? और कैसे ? 👇

1 तीम. 6:11👇

11) परन्तु हे परमेश्‍वर के जन, तुम इन बातों से भागो और अच्छे चालचलन, आराधना के जीवन, विश्‍वास, प्रेम, धीरज और नम्रता का पीछा करो।

  • मसीही के प्रत्येक सेवक को व्यभिचार की लोभ की परीक्षा से भागना चाहिये। यदि ऐसा नहीं होता है तो वे शैतान के चंगुल में फँस जाएँगे ।

हम सभी अपनी पीठ उसकी ओर करें और उस व्यभिचार की – वरदान के आत्मा के फल (गल. 5:22-23) लालसा करें जिसकी बात पौलुस करता है।

यदि हम ऐसा करेंगे तो हमें जीवन की ज़रूरतों के विषय में परेशान नहीं होना पड़ेगा (मत्ती 6:23; फ़िलि. 4:19)। हमें संतोष भी मिलेगा।

मत्ती 5:28👇

28) लेकिन मैं तुम से यह कहता हूँ कि जो कोई किसी महिला को बुरी नज़र से देखे, वह अपने मन में उससे व्यभिचार कर चुका।

  • “अपने मन में”– यीशु यह नहीं कह रहे हैं कि व्यभिचार के ख्याल, व्यभिचार हैं। यह भी नहीं कि भीतरी ख्यालों और बाहरी कामों में कोई फ़र्क नहीं है।

हमारे भीतर की अभिलाषाओं से ज़्यादा बाहरी कुकर्म हमारे और दूसरों के लिए घातक हैं। भाई से नफ़रत बुरी बात है लेकिन व्याभिचार और ज़्यादा बुरी बात है क्योंकि यह जान तक ले लेती है।

कामुकता बुरी है लेकिन व्याभिचार खुद को गंदा करने के साथ दूसरे को भी बुराई में खींचता है। साथ ही इसके खराब परिणाम भी होते हैं।

यह कहना कि कामुकता खास नुकसान वाली बात नहीं है, शैतान का एक झूठ है। यीशु का ज़ोर भीतरी कामुकता और बाहरी व्यभिचार दोनों पर है।

शाब्दिक नहीं हैं, जिससे इन्सान पवित्रता हासिल करे। यीशु को मालूम था। हमें भी मालूम हो कि शारीरिक अंग हमें बुराई में नहीं गिराता है और अंग को बर्बाद करने से कोई फ़ायदा नहीं है।

उदाहरण के लिए, अगर दोनों आँखों को भी निकाल दें तो विचार या कल्पना करना रह ही जाता है👉 (  उत्पत्ति 8:21; यिर्म. 17:9)

  • अपराध या दुष्टता मन में है और पूरे पश्चात्ताप या मन परिवर्तन के साथ पुराने जीवन से नाता तोड़ना ज़रूरी है।

यीशु एक ज़रूरी सच्चाई पर ज़ोर डालने के लिए खास तरीके से कह रहे हैं – नरक से बचाने के लिए इन्सान को कुछ भी करने को तैयार होना चाहिए।

उसे हर उस दुष्टता, प्रलोभन या रूकावट से बचना चाहिए जो परमेश्‍वर के राज्य में दाखिल होने में अड़चन है।

जो इन्सान ऐसा नहीं करता है वह परमेश्‍वर के राज्य की कीमत नहीं समझता है और परमेश्‍वर के न्याय से नहीं डरता है।

पौलुस ने सिखाया कि कामुकता और बुरे काम देह के अंग की तरह हैं, जिन्हें मार डालना चाहिए। (देखें 👉कुल. 3:5; रोमि. 8:13)।

कुलुस्सि. 3:5👇

5) इसलिए इस पृथ्वी पर जो तुम्हारी शारीरिक लालसाएँ  हैं, जैसे यौन कामुकता, अशुद्धता, बुरी लालसा और लालच (जो मूर्तिपूजा है), इन सब को मार डालो।

  • “शारीरिक लालसाएँ”– यहाँ जिन बुराईयों के विषय पौलुस सूची देता है वे जन्म ही से इस तरह जुड़ी हैं, जैसे आँखें, हाथ पैर देह से जुड़े हैं। बड़ी निर्दयता से उन से निबटना चाहिए 👉मत्ती 5:29-30.

उत्पत्ति 6:5👇

5) यहोवा ने देखा कि धरती पर इंसान की दुष्टता बहुत बढ़ गयी है और उसके मन का झुकाव हर वक्‍त बुराई की तरफ होता है।

उत्पत्ति 8:21👇

21) यहोवा इन बलिदानों की सुगंध पाकर खुश हुआ। इसलिए यहोवा ने अपने मन में कहा, “अब मैं फिर कभी इंसान की वजह से ज़मीन को शाप नहीं दूँगा,

क्योंकि बचपन से इंसान के मन का झुकाव बुराई की तरफ होता है। और मैं फिर कभी धरती पर रहनेवाले सभी जीवों का नाश नहीं करूँगा, जैसा मैंने अभी किया है।

नीतिवचन 28:26👇

26) जो अपने दिल पर भरोसा रखता है वह मूर्ख है, लेकिन जो बुद्धि की राह पर चलता है वह बचाया जाएगा।

बुरी इच्छाओं से हमें कैसे निपटना चाहिए  ? आईए देखते हैं ?

  • ” दाहिनी आंख निकाल कर अपने पास से फेंक दो “– यीशु मसीह ने आंखों को निकालने को नहीं कहते हैं हमें मन से इस बात को निकालने का अभ्यास करना चाहिए ।

जिन जिन बातों से व्यभिचार (यौन गुनाह) की लालसाएं शुरू होती है उन बातों से भागना होगा  उन्हें नहीं करना है ।

“लालच” या और “अधिक चाहना”- एक दुष्टता जो मसीहियों में भी बहुत पायी जाती है। जब एक स्त्री और पुरुष व्यभिचार में पड़ते हैं उनके अंदर दुष्ट आत्माएं आके बस जातिं है ।

हम चाहे कुछ भी सुरक्षा बाहर से करले व्यभिचार से नहीं बचसकते क्यों की व्यभिचार हमारे अंदर बास करती है इससे निपटने के लिए हमें व्यभिचार से भागना होगा ।

अगर आप समझते हैं कि आप बहुत शक्ति साली व्यक्ति हैं और अभिलाषाओं के सामने खड़े रह सकेंगे तो आपका सोच गलत होगा व्यभिचार कोई ऐसी वैसी स्थिति नहीं है

उसके सामने अच्छे अच्छे व्यक्ति भी गिर जाते हैं । इसलिए हमें व्यभिचार से भागना चाहिए । और जितना हो सके पश्चताप करे ,

प्रभु के पास लौट अाइये बाईबल अध्यान करे अच्छी अच्छी चीजें देखें अच्छी बाते कीजिए । प्रभु यीशु ने जो आज्ञा दी है उसके अतिरिक्त जीने का अभ्यास कीजिए ।

  • हमारे भीतर (मन की) मूर्तियाँ घृणित और खतरनाक हैं, जैसे बाहरी मूर्तियाँ हैं। लालची व्यक्‍ति को मूरत पूजने वाला कहा गया है क्योंकि जिन बातों पर उसका मन लग गया है, उसकी पूजा ही कर रहा है।

उसके भीतर उसकी मूर्ति है।👉 यहेज. 14:3-4.

इफिसि. 5:5👇

5) पर तुम यह जानते हो कि यौन अपराध में लिप्त व्यक्‍ति, अशुद्ध व्यक्‍ति और लालची इन्सान की (क्योंकि ऐसे लोग मूर्तिपूजक हैं), मसीह और परमेश्‍वर के राज्य में कोई हिस्सेदारी नहीं है।

हमें इन गंदी विचारों से भागना क्यों जरूरी है ?   इन बातों से ना निकल पर हमारा  नुकसान क्यों है ? 👇

  • इस संसार में दो साथ-साथ राज्य हैं। एक लूसीफ़र का (शैतान का) दूसरा यीशु का। हमारे विचार से जो इन्सान। में बतायी बातों में फँसा हुआ है, संसार में यीशु के राज्य के फ़ा़यदे नहीं उठा सकता।

  • परमेश्‍वर का राज्य वह शासन है, जो स्वर्ग में है। ‘परमेश्‍वर का राज्य’ का अर्थ है, परमेश्‍वर के बीच और लोगों के मन पर परमेश्‍वर का शासन।

कभी-कभी इसका मतलब होता है उनके शासन का बाहरी दायरा। कभी-कभी विश्‍वासियों के मन में उनका आत्मिक शासन।

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले और यीशु ने इस विषय पर बातचीत की थी कि यह “पास में” है। यह इसलिए क्योंकि यीशु स्वर्ग से पृथ्वी पर आ चुके थे और उनकी सेवकाई शुरू हो रही थी। ‍

जरा सोचिए अगर हमारे मनों में गंदे विचार हो तो परमेश्वर का कैसे आसकता है ।

  • जो महान सत्य हमारे सामने है, उन्हीं के ऊपर पौलुस अपनी आज्ञा की नेंव रखता है। 👉रोमि. 12:1; इफ़ि. 4:1 ।

मसीह में परमेश्‍वर ने विश्‍वासियों को नया जीवन दिया है। उनके पास अद्भुत भविष्य है। इसी आधार पर उनका व्यवहार होना चाहिए।

उन्हें अपने जीवन में से दुष्टता को निकालना चाहिए, हालाँकि पापमय स्वभाव को निकाल फेंकना असंभव है। यदि यह संभव न हुआ होता तो,

परमेश्‍वर के आत्मा से पौलुस ने विश्‍वासियों को यह करने के लिए न कहा होता। झूठे शिक्षकों (2:23) के किसी तरीके से वे लोग यह नहीं कर सकते थे।

मसीह द्वारा दी गयी सामर्थ से, मसीह और उनकी आत्मा से वे यह कर सकते थे। देखें👉 रोमि. 8:4, 13, 14; गल. 5:22-25; इफ़ि. 3:16-20.

हमारे मन , स्वभाव ,  खराई इत्यादि पर क्यों यीशु जादा जोर डालते हैं ?  हमें पुराने स्वभाव के अनुसार जीना क्यों बंद करना होगा ? 👇

  • वह अनैतिकता, स्वार्थ, झगड़े, नशे आदि को (हाथ से बने) स्वयं के रचे गलत कार्यों के साथ ही रखता है। आत्मिक लोगों के लिए यह “साफ़ ज़ाहिर” है कि ये बातें भीतर से आती हैं।

मिलाएँ 👉मत्ती 15:19; मरकुस 7:21-23; रोमि. 1:29-32; 3:9-18. यहाँ कुछ बातें सीधे लोगों के खिलाफ़ हैं, कुछ परमेश्‍वर के, कुछ बुरा करने वालों के।

वे सभी नुकसान करने वाली और परमेश्‍वर के गुस्से और इन्साफ़ के लायक हैं।

  • स्वभाव से इन्सान क्या है, यह यीशु दिखाते हैं। हर इन्सान के पास बुरा स्वभाव है, जो इस सूची में बताए गए किसी बुरे काम में दिख जाता है।

जब धारा प्रवाह में गंदगी है, तो स्त्रोत गंदा क्यों न होगा? देखें उत्पत्ति 8:21; भजन 51:5; यशा. 64:6; यिर्म. 17:9.

  • लोगों की दुष्टता का यह सब से बड़ा प्रमाण है। हालांकि जब उन्हें बुरे भले का ज्ञान है और यह जानते हैं कि अपराध की उचित सज़ा मौत है।

(5:12; उत्पत्ति 2:17; निर्ग. 21:36; इब्रा. 2:15) इसके बावजूद वे गुनाहों से बच नहीं सकते। वे न ही अपनी दुष्टता में बने रहे, किन्तु दूसरों की दुष्टता में आनन्द भी उठाते रहे। जो ऐसा करते हैं,

स्वभाव में उन से हम क्या बेहतर हैं? नहीं, देखें 3:9; इफ़ि. 2:3. क्या सुसमाचार ऐसे लोगों के लिए कुछ कर सकता है? जी हां ।

हमें पिछले जीवन शैली से क्यों किनारा करना चाहिए ? यीशु ने हमारे पापों को क्यों उठाया ? यहां देखतें हैं ?👇

कुलुस्सि. 3:3👇

3) क्योंकि तुम पिछले जीवन के लिए मर चुके हो और मसीह द्वारा परमेश्‍वर में तुम्हारा आत्मिक जीवन छिपा हुआ है ।

गलाति. 1:4👇

4) यीशु, जिन्होंने हमारे पिता की इच्छा के आधार पर हमारे अपराधों के लिए अपने आप को दिया ताकि हमें इस बुरे संसार से छुड़ा लें।

  • यहाँ पर यीशु मसीह बलिदान हुए हमारे पापों के लिए जो गुनाह हटाकर परमेश्‍वर के क्रोध को हटाता है। गुनाह या बलवईपन के कारण परमेश्‍वर का क्रोध उतरता है ।

मसीह के बलिदान के द्वारा जब, अपराध हटा दिया जाता है, परमेश्‍वर का क्रोध शान्त होता है, मुड़ जाता है।

प्रत्येक अपराधी जो विश्‍वास से उनकी ओर मुड़ता है, उसे वह बिना पक्षपात क्षमा करते हैं। इसलिए हमें यीशु मसीह के बलिदानों को याद रखते हुए पाप करने से खुद को रोके अभ्यास करे ।

  • वह नया, आत्मिक जीवन जिसे परमेश्‍वर ने विश्‍वासियों को दिया है। केवल पौलुस के लिए नहीं, लेकिन हर एक के लिए यह सच है।

रोमि. 6:3-8 देखें। मसीह उनकी जगह मरे ओर यीशु की मौत को लोगों (विश्‍वासियों) की मौत समझते हैं। एक नए तरीके के जीवन के लिए यही एक रास्ता है।

आत्मिक जीवन के लिए, विश्‍वासी ज़रिया नहीं है। मसीह ही स्त्रोत हैं। यह जीवन जीने के लिए विश्‍वासियों की देह और दिमाग से नया जीवन नहीं आता है,

लेकिन उन में रहने वाले मसीह से। रोमि. 8:1-10 से तुलना करें।

नया जीवन परमेश्‍वर में विश्‍वास से जिया जा सकता है। सच्चा मसीही जीवन यीशु पर भरोसा रखने से शुरू होता है और इसी तरह जारी भी रहता है 2 कुरि. 5:7; कुल. 2:6-7)।

जो कुछ पौलुस दूसरों को करने के लिए कहता है, वह खुद भी करता है रोमि. 6:11.

हम केसे वैश्यावृती से बच सकते हैं ? 👇

हमें अय्यूब से कुछ शिखना चाहिए 👉अय्यूब 31:1 मैंने अपनी आँखों के साथ करार किया है। फिर मैं किसी कुँवारी को गलत नज़र से कैसे देख सकता हूँ?

हमें यूसुफ से कुछ शिखने की जरूरत है उसने केसे यूसुफ ने खुद को परमेश्वर के खिलाफ पाप करने से रोका भय को माना अपने काम के जगा के मालिक के साथ केसे ईमानदारी दिखाई ।

  • “व्यभिचार(अनैतिकता)”-हम कहाँ भागें? नीति. 18:10. विश्‍वासियों को यौन अनैतिकता का विचार तक नहीं करना चाहिये।

भवन या आराधनालय परमेश्‍वर के लिये है, खुद के लिये नहीं। यह उनकी आराधना और स्तुति के लिये अलग किया गया है।

एक विश्‍वासी को अपनी देह इस तरह इस्तेमाल नहीं करनी चाहिये जैसे कि वह उसी की हो। यहाँ पर मसीह में मिली आज़ादी की सीमा दिखती है।

उन्हें वही बातें करनी चाहिये जो उन में रहने वाले परमेश्‍वर के आत्मा को भाती हैं और इज़्ज़त देती हैं।

नीतिवचन 9:9👇

9) बुद्धिमान को समझा, वह और बुद्धिमान बनेगा, नेक इंसान को सिखा, वह सीखकर अपना ज्ञान बढ़ाएगा।

  • “बुरी इच्छाओं”- संसार के सारे भ्रष्टाचार की जड़ मनुष्य का मन है। याकूब 1:14-15; 4:1-2 हम सभी को 1 पतर. 1:14; और 1 पतर. 2:11 में पतरस के प्रोत्साहन के शब्द सुनने चाहिए।

सृजनहार की बड़ी और बहुमूल्य प्रतिज्ञाएँ भ्रष्टाचार से पूरी तरह से बचने के लिए हैं।

  • मेरे प्यारे दोस्तों कुछ ऐसे पाप हैं जिससे परमेश्वर का वचन भागने को कहता है उन पाप में व्यभिचार एक ऐसा पाप है जिससे बचने के लिए कोई प्रार्थना नहीं है जिससे हमें भागना होगा ।

परमेश्वर का वचन कहता है हम यीशु मसीह के खून के दाम में खरीदे गए हैं इसलिए अपने देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करे  ।

  • “व्यभिचार मत करना”- निर्ग. 20:14. शाब्दिक आज्ञा जो यहूदी धर्म पुस्तक में थी, उस से बढ़कर थे मन के ख्याल।

बाहरी बुरे कामों को न करने की वजह से फ़रीसी सोचते थे कि वे परमेश्‍वर की निगाह में निर्दोष हैं। वे मन की भीतर की हालत की परवाह नहीं करते थे👉 ( मत्ती  23:25-28)।

एक कारण परमेश्‍वर की सन्तान मन में गरीब है, विलाप करते रहते हैं, वह इसलिए कि उनके भीतर की उठने वाली बुरी बातें उनके मन से ही निकलती हैं (रोमि. 7:7-8)।

इस संदेश में जो कुछ कहा गया है वह इसलिए कि लोग सच्चे सुख को जानें।

  • “अपने मन में”- यीशु यह नहीं कह रहे हैं कि व्यभिचार के ख्याल, व्यभिचार हैं। यह भी नहीं कि भीतरी ख्यालों और बाहरी कामों में कोई फ़र्क नहीं है।

हमारे भीतर की अभिलाषाओं से ज़्यादा बाहरी कुकर्म हमारे और दूसरों के लिए घातक हैं। भाई से नफ़रत बुरी बात है लेकिन व्याभिचार और ज़्यादा बुरी बात है क्योंकि यह जान तक ले लेती है।

कामुकता बुरी है लेकिन व्याभिचार खुद को गंदा करने के साथ दूसरे को भी बुराई में खींचता है। साथ ही इसके खराब परिणाम भी होते हैं।

यह कहना कि कामुकता खास नुकसान वाली बात नहीं है, शैतान का एक झूठ है। यीशु का ज़ोर भीतरी कामुकता और बाहरी व्यभिचार दोनों पर है।

जिससे इन्सान पवित्रता हासिल करे। यीशु को मालूम था। हमें भी मालूम हो कि शारीरिक अंग हमें बुराई में नहीं गिराता है और अंग को बर्बाद करने से कोई फ़ायदा नहीं है।

उदाहरण के लिए, अगर दोनों आँखों को भी निकाल दें तो विचार या कल्पना करना रह ही जाता है ( मत्ती 15:19-20; उत्पत्ति 8:21; यिर्म. 17:9)।

  • अपराध या दुष्टता मन में है और पूरे पश्चात्ताप या मन परिवर्तन के साथ पुराने जीवन से नाता तोड़ना ज़रूरी है।

यीशु एक ज़रूरी सच्चाई पर ज़ोर डालने के लिए खास तरीके से कह रहे हैं – नरक से बचाने के लिए इन्सान को कुछ भी करने को तैयार होना चाहिए।

उसे हर उस दुष्टता, प्रलोभन या रूकावट से बचना चाहिए जो परमेश्‍वर के राज्य में दाखिल होने में अड़चन है।

जो इन्सान ऐसा नहीं करता है वह परमेश्‍वर के राज्य की कीमत नहीं समझता है और परमेश्‍वर के न्याय से नहीं डरता है।

पौलुस ने सिखाया कि कामुकता और बुरे काम देह के अंग की तरह हैं, जिन्हें मार डालना चाहिए। (देखें कुल. 3:5; रोमि. 8:13)।

व्यभिचार की आयतें : 👇(Vyabichar kya hai ? iske vare Bible hume kya shikhya deti hai ?)

मत्ती 5:27-30

27 तुम सुन चुके हो कि कहा गया था कि व्यभिचार मत करना।

28 लेकिन मैं तुम से यह कहता हूँ कि जो कोई किसी महिला को बुरी नज़र से देखे, वह अपने मन में उससे व्यभिचार कर चुका।

30 अगर तुम्हारा दाहिना हाथ तुम्हारे बुराई में गिरने की वजह बने, तो उसे काट कर अपने पास से फेंक दो।

क्योंकि तुम्हारे लिए फ़ायदा इसी में है कि तुम्हारे अंगों में से एक बर्बाद हो जाए और तुम्हारी पूरी देह नरक में न डाली जाए।

इफिसि. 5:3-4

3 जैसा कि पवित्र लोगों के लिए उचित है, तुम्हारे बीच अनैतिक यौन सम्बन्ध, सभी तरह की अशुद्धता या लालच जैसी बातें सुनने में भी न आएँ।

4 और तुम्हारे बीच गंदी और बेवकूफ़ी की बातें, भद्दा मज़ाक जो उचित नहीं है, न हो, बल्कि धन्यवाद दिया जाना हो,

1 कुरिंथियों 5:11

11 मगर अब मैं तुम्हें लिख रहा हूँ कि ऐसे किसी भी आदमी के साथ मेल-जोल रखना बंद कर दो, जो भाई कहलाते हुए भी नाजायज़ यौन-संबंध रखता है

या लालची है या मूर्तिपूजा करता है या गाली-गलौज करता है या पियक्कड़ है या दूसरों का धन ऐंठता है। ऐसे आदमी के साथ खाना भी मत खाना।

कुलुस्सियों 3:5

5 इसलिए अपने शरीर के उन अंगों को मार डालो जिनमें ऐसी लालसाएँ पैदा होती हैं जैसे, नाजायज़ यौन-संबंध, अशुद्धता, बेकाबू होकर वासनाएँ पूरी करना,

बुरी इच्छाएँ और लालच जो कि मूर्तिपूजा के बराबर है।

मत्ती 5:32

32 लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ कि हर वह आदमी जो व्यभिचार  के अलावा किसी और वजह से अपनी पत्नी को तलाक देता है, वह उसे शादी के बाहर यौन-संबंध रखने के खतरे में डालता है।

और जो कोई ऐसी तलाकशुदा स्त्री से शादी करता है, वह शादी के बाहर यौन-संबंध रखने का गुनहगार है।

गलातियों 5:19

19 शरीर के काम तो साफ दिखायी देते हैं। वे हैं, नाजायज़ यौन-संबंध, अशुद्धता, निर्लज्ज काम,

प्रेषितों 15:29

29 कि तुम मूरतों को बलि की हुई चीज़ों से, खून से, गला घोंटे हुए जानवरों के माँस से और नाजायज़ यौन-संबंध से हमेशा दूर रहो।

अगर तुम ध्यान रखो कि तुम इन बातों से हमेशा दूर रहोगे, तो तुम्हारा भला होगा।

प्रकाशितवाक्य 14:8

8 इसके बाद, एक और स्वर्गदूत, दूसरा स्वर्गदूत यह कहता हुआ आया: “गिर पड़ी! महानगरी बैबिलोन गिर पड़ी, वही जिसने सभी राष्ट्रों को क्रोध की और अपने व्यभिचार की मदिरा पिलायी है।

1 थिस्सलुनीकियों 4:3

3) परमेश्‍वर की मरज़ी यही है कि तुम पवित्र बने रहो और नाजायज़ यौन-संबंधों से दूर रहो।

उत्पत्ति 39:10-12

10) पोतीफर की पत्नी हर दिन यूसुफ से कहती थी कि वह उसके साथ सोए या अकेले में वक्‍त बिताए, मगर यूसुफ ने हर बार उसे साफ मना कर दिया।

11) लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि यूसुफ अपना काम करने घर के अंदर गया और उस वक्‍त घर में एक भी नौकर नहीं था।

12) तब पोतीफर की पत्नी ने झट-से उसका कपड़ा पकड़ लिया और कहा, “आ, मेरे साथ सो!” मगर यूसुफ वहाँ से फौरन भाग गया और घर से बाहर चला गया।

उसने अपना कपड़ा उस औरत के हाथ में ही छोड़ दिया।

मरकुस 7:21-23

21) इसलिए कि इन्सान के अन्दर गन्दे ख्याल, व्यभिचार, हत्या, 22) , लोभ, दुष्टता, धोखा, कामुकता, बुरी-नज़र, निन्दा, घमण्ड और मूर्खता  ,

23) ये सभी बातें मन से निकलती हैं और इन्सान को अशुद्ध करती हैं”

मत्ती 15:19

19) इन्सान के अन्दर से निकले गंदे ख्याल, हत्या, व्यभिचार, यौन अनैतिकता, चोरी, झूठी गवाही, निन्दा।

रोमि 8:13

13) क्योंकि यदि तुम उस पुराने स्वभाव के अनुसार जीओगे तो मरोगे, किन्तु यदि पवित्र आत्मा के द्वारा देह के गंदे कामों को मारोगे, तो जीवित रहोगे।

नीतिवचन 23:27, 28

27 वेश्‍या तो गहरी खाई है और बदचलन औरत सँकरा कुआँ। 28 वह लुटेरे की तरह घात लगाकर बैठती है, बहुत-से आदमियों से विश्‍वासघात कराती है।

नीतिवचन 5:3

3 बदचलन औरत की बातें शहद जैसी मीठी और तेल से भी चिकनी होती हैं।

सभोपदेशक 7:26

26 तब मैंने जाना कि एक ऐसी औरत है जो मौत से भी ज़्यादा दुख देती है। वह शिकारी के जाल के समान है,

उसका दिल मछली पकड़नेवाले बड़े जाल जैसा है और उसके हाथ बेड़ियों की तरह हैं। ऐसी औरत से बचनेवाला, सच्चे परमेश्‍वर को खुश करता है।

लेकिन जो उसके जाल में फँस जाता है, वह पाप कर बैठता है।

1 कुरिंथियों 10:8

8 न ही हम नाजायज़ यौन-संबंध रखने का पाप करें जैसे उनमें से कुछ ने किया था और एक ही दिन में उनमें से 23,000 मारे गए।

गिनती 25:1

25 जब इसराएली शित्तीम में रह रहे थे, तो वे मोआबी औरतों के साथ नाजायज़ यौन-संबंध रखने लगे।

प्रकाशितवाक्य 2:14

14 फिर भी मुझे तेरे खिलाफ कुछ बातें कहनी हैं। तुम्हारे बीच कुछ ऐसे लोग हैं जो बिलाम की शिक्षा मानते हैं,

जिसने बालाक को सिखाया था कि वह इसराएल के बेटों के रास्ते में ठोकर का पत्थर रखे ताकि वे मूरतों को बलि की हुई चीज़ें खाएँ और नाजायज़ यौन-संबंध रखें।

गिनती 31:16

16 उन्होंने ही तो बिलाम के कहने पर इसराएली आदमियों को अपने जाल में फँसाया था और पोर के मामले में यहोवा से विश्‍वासघात करवाया था और इस वजह से यहोवा की मंडली पर कहर टूट पड़ा था।

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