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Vivah ke vare me bible kya sikhsya deti hai ?

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Vivah ke vare me bible kya sikhsya deti hai ?

विवाह का उद्देश्य क्या है ?👇Vivah ka udeshya kya hai ?

  • परमेश्वर ने कहा आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं है ; इसलिए परमेश्वर ने आदम के लिए सहायक बनाया जो उससे मेल खाए उसलिए आदम की पसली में से एक स्त्री बनाया और
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उसे आदम के पास ले आया। पहला विवाह तब परमेश्वर ने कराई थी एक आदमी के जरूरत के लिए परमेश्वर ने पहला विवाह करवाया था।

विवाह का उद्देश्य स्तिर घर गृहस्थी के लिए होती है ! जिसमें वंस बढ़ाने के लिए बच्चे जन्म करने के लिए होती है। यह परमेश्वर पिता के व्यवशता के आधीन रहना भी होता है ।

एक पति और पत्नी के बीच स्तीर वातावरण प्रदान करता है। जिसमे बहुत कुछ सीखने को और आगे बढ़ने को मिलता है। विवाह लोगों को अनैतिकता  यौन संबंध से बचाता है।

विवाह यौन संबंध को ए स्वस्थ स्थान प्रदान करता है। विवाह गेर पुरुषों के साथ  संबंध रखने से भी बचा सकता है विवाह हमारे समाज में इजत बड़ाता है

और हमारे जीवन में पवित्रता को उत्पन करने के साथ साथ हमारे अच्छे के लिए परमेश्वर ने पवित्र विवाह को स्थापित की है।

  • कुछ सच्चाइयाँ हमें पौलुस की शादी सम्बन्धी शिक्षा को समझने में सहायता कर सकती हैं। पौलुस बाईबल के पवित्र आत्मा द्वारा लिखे जाने के सम्बन्ध में कायल था

जो कुछ परमेश्‍वर ने बाईबल में दिया है उसके विरूद्ध जाने की पौलुस स्वप्न में भी कल्पना नहीं कर सकता था।

स्वयं परमेश्‍वर ने मानवजाति की भलाई के लिये विवाह को नियुक्‍त किया था (उत्पत्ति 2:20-24; मत्ती 19:4-6)।

अन्य किसी जगह में पौलुस ने एक सुंदर और अर्थपूर्ण भाषा में विवाह सम्बन्ध का वर्णन किया है (इफ़ि. 5:25-33)।

उसने स्वयं विश्‍वासियों को शादी करने से नहीं रोका और यह जाना कि जो ऐसा करते थे वे धोखे में हैं (1 तीमु. 4:1-3)। उसने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक विश्‍वासी को यह आज़ादी है,

कि वह शादी करे या न करे। उसने यह शिक्षा नहीं दी कि अविवाहित रहना विवाहित रहने से बेहतर है। वह कुरिंथ के मसीहियों को लिख रहा था जिन्होंने उस से सवाल पूछा था।

वर्तमान की समस्या को ध्यान में रखते हुए वह उन्हें लिख रहा था , “समय कम था”। उसके विचार से, ऐसे समय में जो अविवाहित रह सकते थे उनके लिये यह भला था ।

  • कुछ बातें जो पौलुस ने यहाँ कही हैं वे सदा के लिये सत्य हैं। कुछ ऐसी थीं जो कुरिंथ की उस समय की परिस्थितियों से सम्बन्धित थीं।

पर आज के समय में भी ऐसे ही परिस्थिति हो गई है बहुत युवा और युवती बिन विवाह के शारीरिक संबंध रखते हैं।

पौलुस ने एक और जगह पर सिखाया कि लोगों के लिये शादी करना अच्छा है (1 तीमु. 5:14)। वह निश्चित रीति से इब्रा. 13:4 से सहमत था।

उन दिनों कुरिंथ में अविवाहित रहना भला था, लेकिन तभी जब कि विश्‍वासी यौन सम्बन्धी पापों से बचे रहें।

विवाह में एक तन होने का क्या अर्थ है ? क्या एक पति और पत्नी के बीच ही यौन संबंध होनी चाहिए  ? परमेश्वर ने यौन संबंध में क्या योजना की थी एक शादी सुदा जोड़े के लिए ?👇

  • हाँ, परमेश्वर ने हमें सेक्स दिया, और वह इसका मतलब था कि हमारे लिए खुशी और आशीर्वाद का स्रोत हो।

और यह हो सकता है – जब हम जीवन के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए उनके दिशानिर्देशों का पालन करते हैं।

सेक्स के लिए परमेश्वर की  परमेश्वर की योजना थी कि उनका सेक्स का उपहार एक पति और पत्नी के बीच प्यार और सौंपने की एक  मज़बूत वचन होगी।

यह उनकी एकता का प्रतीक भी था – एक दूसरे के प्रति और परमेश्वर के प्रति उनकी सौंपने पर आधारित एकता।

परमेश्वर की योजना में, “एक आदमी अपने पिता और मां को छोड़ देगा और अपनी पत्नी के साथ एकजुट हो जाएगा, और वे एक मांस बन जाएंगे” (उत्पत्ति 2:24)।

  • यही कारण है कि परमेश्वर हमें बताते हैं कि शादी से बाहर यौन संबंध गलत हैं, क्योंकि वे अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकते हैं।

समस्या यह है कि हम परमेश्वर की योजना को भूल गए हैं, और इसके बजाय हमने सेक्स को कुछ स्वार्थी और शोषक बनने की अनुमति दी है।

यही कारण है कि मुझे आशा है कि आप किसी भी चीज़ के प्रति अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करेंगे, जो कि सेक्स और विवाह के प्रति परमेश्वर के रवैये का मजाक उड़ाता है – जिसमें पोर्नोग्राफी भी शामिल है।

यह आपकी इंद्रियों को उत्तेजित कर सकता है – लेकिन यह आपकी पत्नी का अपमान है, और जब तक आप दोनों जीवित हैं, तब तक उसके प्रति अपनी आस्था को अस्वीकार करना।

  • हालाँकि, यह गहरा सवाल है: आपके जीवन में ईश्वर का क्या स्थान है? यीशु को मसीह के लिए कुछ भी नहीं लेने दें,

लेकिन अपने पापों का पश्चाताप करें और अपने जीवन – और अपने विवाह – के लिए क्षमा करें।

  • यदि कोई पत्नी या पति इस सिद्धान्त को नहीं अपनाता तो उस परिवार में समस्याएँ आ सकती हैं। यदि वे अधिक समय तक एक दूसरे से अलग रहते हैं

तो वे शैतान को अवसर दे सकते हैं कि वह उन्हें दूसरों के साथ यौन सम्बन्ध में गिराए। शारीरिक रूप से पति और पत्नी एक तन हो चुके हैं एक तन होने का मतलब बच्चों का जन्म होना कहा जाता है

अब ये बच्चे माता पिता के एक तन होने पर आते हैं। एक तन होने का मतलब ये भी है कि भावनात्मक, आध्यात्मिक, बौद्धिक, आर्थिक रूप से,

औरहर दूसरे तरीके से, एक जोड़े को एक हो जाना भी कहते हैं। एक तन का मतलब ये भी है कि दोनों जोड़े एक दूसरे से प्रेम में आनंद उठाने के लिए परमेश्वर ने दी है।

ताकि वे एक दूसरे को और अच्छी तरह से जान सके।

  • आपने शादी के दिन दोनों के विशेष मिलन से मिलता जुलता है। बड़े दिनों के विवरण में शादी के बाइबल शास्त्रों को शामिल करके अपनी धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करें।

आप अपने विश्वास को विभिन्न डिजाइन तत्वों के माध्यम से मना सकते हैं और चाहे वह आपकी प्रतिज्ञाओं को पढ़े या आपके निमंत्रणों में,

यह आपकी शादी को अनुकूलित करने में आपकी सहायता करेगा। बाइबल में शादी की पवित्रता और सुंदरता के कई संदर्भ हैं।

  • क्या यह कहने की ज़रूरत है कि एक पति इस तरह से जीए कि उसकी पत्नी उसे इज़्ज़त दे? या पत्नी इस तरह से रहे कि पति के प्यार को पाए? पति को पत्नी की समस्याओं,

इच्छाओं और निर्बलताओं को समझना चाहिये और इन सब के बावजूद उन्हें आदर देना चाहिये। शारीरिक रीति से स्त्रियाँ दुर्बल हैं, मानसिक रीति से नहीं,

हालांकि उनका सोचने का तरीका और भावनात्मक बनावट भिन्न है। उनकी स्थिति भी निर्बल है, उन्हें आज्ञा माननी है, आधीन होना है।

विवाह के बाद एक शादी सुदा जोड़े को क्यों आजादी नहीं है ?  एक विश्वासी को परमेश्वर ने विश्वासी के साथ क्यों विवाह करने को कहते हैं ?

अगर कोई विश्वासी किसी अविश्वासी के साथ विवाह करली हो तो इससे कैसे निपटें ?   बहुत सारे ऐसे लोगों ने अपनी शादियां तोड़ दी हैं। और तलाक को कैसे रोक सकता हैं ?  आइए देखते हैं ?👇

  • विश्‍वासियों को यह आज़ादी है कि वे शादी करें या न करें। लेकिन शादी के बाद उन्हें यह आज़ादी नहीं कि वे अपने साथी को तलाक दें।

इसलिए वह मसीह की शिक्षा पर आधारित सच्चाई पर आज्ञा देता है – मत्ती 5:32; 19:3-9; लूका 16:18. विश्‍वासियों की शादी तब तक स्थायी है जब तक पति या पत्नी जीवित है।

  • ऐसा विश्‍वासी उन अविश्‍वासियों से अलग किया जाता है, जिनका विवाह विश्‍वासियों से नहीं हुआ है – निःस्संदेह,

परमेश्‍वर उस अविश्‍वासी से बात करेंगे और ऐसे मिश्रित विवाह के कारण उत्पन्न बच्चों से अपने तरीके से व्यवहार करेंगे।

पौलुस यह नहीं बताता कि उसका इस से क्या अर्थ है, लेकिन हम समझ सकते हैं कि व्यवहार करने के तरीके में फ़र्क वास्तविक और अर्थपूर्ण हो सकता है।

“पवित्र” और “शुद्ध” के विषय में  👉लैव्य. 20:7; यूहन्ना 17:17-19 के नोट्स देखें।

  • एक विश्‍वासी को अपने अविश्‍वासी पति या पत्नी के साथ जितना संभव हो, मेल से रहना चाहिये। उसे परेशान नहीं होना है यदि वह (अविश्वासी) उसे छोड़ने का निश्चय करता है।

ऐसी स्थिति में कोई दबाव या ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं होनी चाहिये।

  • एक विश्‍वासी पत्नी या पति अपने सही जीवन शैली के द्वारा और अच्छे जीवन, प्रार्थना और धीरज के द्वारा अपने अविश्‍वासी जीवन साथी को मसीह में और मुक्‍ति के अनुभव में ला सकते हैं।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने जीवन के लिए परमेश्वर और उसकी इच्छा पर अपनी शादी का निर्माण कर सकते हैं।

जैसा कि मेरी पत्नी कहती थी, एक मजबूत शादी में वास्तव में तीन लोगों को शामिल करने की जरूरत है: पति, पत्नी — और परमेश्वर।

  • अपना जीवन एक साथ शुरू करें, इसलिए, अपने जीवन और यीशु मसीह के साथ अपने विवाह को सौंप के करे। याद रखें: विवाह केवल एक सामाजिक सुविधा या कानूनी प्रथा नहीं है।

विवाह परमेश्वर की ओर से होता है, और यह हमारे लिए सबसे महान उपहारों में से एक है। जब तनाव या निराशा का समय आता है (और वे करेंगे), याद रखें कि परमेश्वर ने आपको एक साथ लाया है ,

और आपने अपनी शादी न केवल एक-दूसरे के लिए की बल्कि परमेश्वर से भी कर ली है। यीशु के वचनों को कभी न भूलें: “इसलिए कि परमेश्वर ने एक साथ आपको संबंध में जोड़ा है ,

किसी को अलग न होने दें” (मरकुस 10: 9)।

  • इसके अलावा, हर दिन मसीह को अपने जीवन में शामिल करें। एक साथ प्रार्थना करें – भोजन से ठीक पहले (हालांकि यह महत्वपूर्ण है), लेकिन नियमित रूप से हर दिन।

एक साथ परमेश्वर के वचन को पढ़ने के लिए भी समय निकालें और एक चर्च की तलाश करें जहां आप एक-दूसरे के साथ और मसीह के साथ अपने रिश्ते में बढ़ सकें।

  • प्रेम का सबसे बड़ा शत्रु स्वार्थ है – दूसरों, विशेषकर अपने जीवनसाथी की जरूरतों के बजाय स्वयं को / अपने आप को पहले रखना।

लेकिन हर दिन अपने दिल और दिमाग पर परमेश्वर की प्यार की परिभाषा लिखें: “प्रेम रोगी है प्रेम दया है। … यह हमेशा रक्षा करता है, हमेशा भरोसा करता है, हमेशा उम्मीद करता है,

हमेशा दृढ़ रहता है “(1 कुरिन्थियों 13: 4,7)। यह उस तरह का प्यार है जो परमेश्वर पिता हमारे लिए है – और जिस तरह का हमें एक दूसरे के लिए होना चाहिए।

हम प्यार करते हैं क्योंकि परमेश्वर पिता पहले हमसे प्यार करते थे और करतें हैं । उसके प्यार को अपने जीवन और अपनी शादी को बदलने दें।

  • पौलुस विवाह के विषय में जीवन की दूसरी स्थितियों को उदाहरण के रूप में लेकर शादी के विषय में बात कर रहा है।

परमेश्‍वर ने प्रत्येक व्यक्‍ति को एक निश्चित स्थिति के लिये बुलाया है और प्रत्येक के लिए एक स्थान निश्चित किया है।

विश्‍वासी के लिये महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अपने लिए परमेश्‍वर की इच्छा को जाने और आज्ञाकारी रहे।

अपने जीवन के सम्बन्ध में किसी को शिकायत नहीं करनी चाहिये, परन्तु यह मान लेना चाहिये कि परमेश्‍वर की इच्छा सर्वोत्तम है, और उसे दीनता से ग्रहण किया जाए।

  • गलत आदमी से शादी करने से तो अच्छा है सिंगल रहो । अगर शादी कर दिया हो तो सामना करो। 30 उमर के नीचे के युवा

और युवती को में एक सलहा देना चाहता हूं अगर आप गलत घर ले लिया नहीं समझ आया कोई बात नहीं फिर से बदल सकता है नया घर ले सकतें हैं ,

गलत जगह पर जोब किया आपको समझ नहीं आया बदल सकते हैं और दूसरी  जोब कर सकते हैं  , कपड़े लिए नहीं समझ आया उसे भी आप बदल सकते हैं पर में आपको बताना चाहता हूं

शादी एक ऐसी चीज है जो अगर आप ने करली वो बदली नहीं जा सकती इसीलिए शादी करने से पहले उपवास करो परमेश्वर के सामने जाओ

और हो सके तो अपने पास्टर के पास जाओ उनसे सलहा लो उनसे पूछो पास्टर क्या में आगे बदूं । में आपसे कुछ बताना चाहता हूं आज क्रिस्चन शादियां भी सफलता नहीं हो रही है।

आज के मस्सी पति और पत्नी घर पर झगड़े कर रहे हैं। और सबसे बड़ी बात तो ये है की झगड़ों पे बाईबल के वचन बोलते हैं ।

पति पत्नी से कहता है मेरे आधीन रहे बाईबल में लिखा है पत्नी को पति के आधीन रहना चाहिए और जानते हो पत्नी पति से क्या कहती है हां ये भी लिखा है

पति अपने पत्नी को अपने समान प्रेम करना चाहिए। बाईबल के वचनों को ले कर लड़तें हैं। आपको पता है एक कैश हुआ था एक पति किसी

और के साथ फ़सा हुआ था ये बात उसकी पत्नी को पता चला तो एक पास्टर के ऑफिस पर जा के बोली पास्टर ऐसी बात हुई है आप बताओ में क्या करूं और जानते हैं

पास्टर ने क्या कहा आप तलाक मत दो एक मौका दो एक दूसरे को बाद में बातें बन जाएंगी । पास्टर ने ये भी कहा तुम नहीं जानते हो कि शादी टूटने के बाद कितनी मुश्किलें आएंगी ।

आज कल तलाक हो रहे हैं पर परमेश्वर पिता को इन तलाक से शक्त नफ्रत हैं। इस बात को हमेशा याद रखिए ; प्रभु शादी को आदर मानता है।

आज कल शादी पर जोक्स बनते हैं इस में कोई मजे की बात नहीं है परमेश्वर पिता के बनाए गए पवित्र शादी बंधन के ऊपर भी जोक्स बनाते हैं लोक ये पाप है  हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।

  • आज के युवाओं और युवतियों को देखो 80 % शादी से पहले ही शारीरिक संबंध बना लेते हैं एक दूसरे के साथ। और नखरे भी ऐसे करते हैं में ऐसे लड़के लड़कियों से मिला हूं

जिन्होंने एक दूसरे को पसंद किया ये सब बात ओनलाइन पे ही करते हैं। आज कल पसंद करना भी ओनलाइन है , झगड़े भी करना ओनलाइन है ,और ब्रेकअप भी ओनलाइन करते हैं।

सब कुछ ओनलाइन होता है आज कल।

  • अच्छा आप को किसी का फोटो देख कर प्यार हो केसे जाता है मुझे तो ये बात बिल्कुल नहीं समझ आता आप उस व्यक्ति को एक बार भी मुलाकात नहीं किये हो

एक बार भी उसके बारे में जांच नहीं किए हो और ओनलाइन प्यार का इजहार कर दिया आप ये बात नहीं समझ पाते हो कि आप को एक लत हो गया है।

पास्टर के कलिश्या में एक भाई आया था और उसने कहा पास्टर से मुझे शादी करनी है पास्टर ने कहा कहां से पकड़ के लाया तू उसने बोला फेसबुक पर मिल गई पास्टर ने पूछा क्या किया तूने

उसने कहा फोटो देखा उसका हेरोइन दिख रही थी मैने पसंद किया है आज दोपहर में आएंगे आप भी आना पास्टर घर पे पास्टर हैरान हो गए फोटो देख कर प्यार केसे होगया

और बात पक्की हो गई पास्टर को परमेश्वर ने कहा इसे मना कर ये लड़का समझ नहीं रखता शादी के लिए ये मैच्योर नहीं हुआ है

और पास्टर ने कहा भाई इंतजार करो पर उस लड़के ने जबरजश्ती शादी कर ली और पास्टर की एक बात ना मानी ।

और तीन महने बाद दोनों एक दूसरे की सकल तक नहीं देखते हैं और अब पास्टर को दुआ करवाने आएं हैं हमें अलग करो

और पास्टर ने कहा मुझे माफ़ करो में शादी जोड़ने में विश्वास करता हूं शादी तोड़ने में विश्वास नहीं करता।

  • बहुत गंभीरता से विचार करिए अपने शादी को लेकर किसी अविश्वासी से शादी मत करो जो अपने ही हिसाप से जिंदगी जी रहा हो आप इंतजार करो प्रार्थना करो आपको पता है

बाईबल क्या कहती है असमान जुए में मत जुटो व्यवस्थाविवरण में लिखा है तू जब हल चलाए तो एक तरफ बेल और एक तरफ कोई

और जानवर मत रखना असमान जुए में मत जूटो सोचो एक कार में एक तरफ कार का टायर ओर एक तरफ ट्रक का टायर लगी हो तो वो कार केसे चलेगी ।

वो बेल सीधा होना चाहिए नहीं तो आपकी मिनिस्ट्री लड़खड़ा जाएगी आप उस बलेंस को नहीं समाल पाओगे । कोन ट्रेस में प्रचार कर सकता है में भी नहीं कर सकता।

में जब भी देखता हूं मेरा मन मेरे वश में नहीं होता तब में कलीश्या के दूसरे पास्टर से कह देता हूं आज आप प्रचार कर लीजे उन्होंने कहा क्यों आपको क्या हुआ तो कहते हैं मेरा मन आज विश्राम में नहीं है

और में नहीं चाहता कलिश्या के 500 लोगों को अच्छा वचन नहीं मिल पाएगा इसलिए आप रेस्ट में हो आप प्रचार कीजिए  ।

क्यों की कहीं बार आपके मन आपके वश में नहीं होता आपके संदेशों में बदलाव आ जाता है। बहुत जरूरी है कि मन आत्मा को समर्थन या सहारा दे  (support) ।

आपको पता है आप कब सबसे ज्यादा ताकतवर रहते हो जब आप विश्राम में होते हो । लेकिन आप थोड़ा सा काम भी करके थक जाओगे तो मन वश में नहीं रहता है।

  • इसलिए यीशु ने कहा था जो मेरे पास आएगा वो विश्राम पाएगा । इंसान की पहली जरूरत पैसा नहीं है अच्छे कपड़े , अच्छे फोन नहीं है उसकी पहली जरूरत यीशु की शांति है ।

शांति होगा तो आगे बढ़ पाओगे इसलिए हमेशा अपने सावधान रहे ।

  • बिली ग्राहम ने कहा है “कुछ भी नहीं एक अच्छी शादी की तुलना में अधिक खुशी लाता है, और कुछ भी नहीं एक बुरी शादी से अधिक दुख लाता है।”

1 कुरिन्थ. 7:1-17

1 अब उन बातों के बारे में जो तुम ने मुझे लिखी थीं हर व्यक्‍ति के लिए भला यह है कि वह यौन अपराध (अनुचित यौन सम्बन्ध) से बचा रहे।

2 लेकिन व्यभिचार के अपराध से बचने के लिए, हर एक पुरूष की अपनी पत्नी और हर एक महिला का अपना पति होना चाहिए।

3 पति अपनी पत्नी के अधिकार का और पत्नी अपने पति के अधिकार की इज़्ज़त करे।

4 पत्नी को अपनी देह पर अधिकार नहीं है लेकिन उसके पति को है। वैसे ही पति को भी अपनी देह पर अधिकार नहीं, लेकिन उसकी पत्नी को है।

5 एक दूसरे को इस अधिकार से वंचित मत रखो। सिर्फ़ सीमित समय तक आपसी सहमति से ही यौन सम्बन्ध में विराम आए, ताकि प्रार्थना के लिए वक्‍त मिले।

फिर यौन सम्बन्ध रखो ताकि तुम्हारे आत्मसंयम में कमी की वजह से शैतान तुम्हारी परीक्षा न कर सके।

10 शादी-शुदा लोगों को मैं नहीं, बल्कि प्रभु आज्ञा देते हैं, और वह यह है-एक पत्नी को अपने पति को तलाक नहीं देना चाहिए।

14 अविश्‍वासी पति अपनी पत्नी की वजह से पवित्र ठहरता है। अविश्‍वासी पत्नी अपने पति की वजह से पवित्र ठहरती है। नहीं तो तुम्हारे बच्चे अशुद्ध ठहरते, लेकिन अभी वे शुद्ध हैं।

15 लेकिन यदि अविश्‍वासी तलाक की माँग करे, तो ठीक है, दे दो। इस परिस्थिति में विश्‍वासी, जीवन साथी किसी तरह से फिर बँधा हुआ न रहेगा। परन्तु परमेश्‍वर चाहते हैं कि हम मेल कर लें।

16 पत्नी तुम्हें क्या पता कि तुम अपने पति का उद्धार करा लोगी? या पति, कि तुम अपनी पत्नी को उद्धार के अनुभव तक ला सकते हो?

17 तुम में से प्रत्येक जन को प्रभु ने जिस स्थिति में रखा है, उसी बुलाहट में बना रहे। सभी चर्च (कलीसियाओं) के लिए यही मेरा निर्देश है।

  • रूकावट”- यदि विवाहित पुरुष स्त्री चाहते हैं कि उनकी प्रार्थना का उत्तर मिले, तो एक दूसरे के प्रति व्यवहार के सम्बंध में उन्हें सतर्क रहना चाहिये।

परमेश्‍वर एक ऐसे पति की प्रार्थनाओं का उत्तर देने से इंकार कर सकते हैं, जो अपनी पत्नी से बुरा व्यवहार करता है या पत्नी की प्रार्थनाओं को भी, यदि वह अपने पति के प्रति आधीन नहीं होती।

  • सारा उन विश्‍वास करने वाली स्त्रियों की माँ है जो अपने पतियों के प्रति आधीन हैं।

क्यों पत्नियों को पति के आधीन रहना चाहिए ?👇(Kyun patniyo ko pati ke adhin rehna chahiye ?

  • पत्नियों का काम है आज्ञा मानना, पति का है प्यार करना। (इसका मतलब यह नहीं कि पत्नी पति से प्यार न करें या पति पत्नी की इच्छाओं को पूरा न करें।) पौलुस ऐसे प्यार की बात करता है,

जो दिखता है। पति का प्रेम पत्नी के प्रति बर्ताव में दिखता है। जो पति यहाँ नाकामयाब होते हैं, वे परिवार की तमाम कठिनाईयों और उदासी का कारण बनते हैं।

इसका मतलब यह है कि पति और पत्नी एक देह हैं । इसलिए कि उसकी पत्नी की देह उसकी देह है, उसे चाहिए कि वह पत्नी की देह से ऐसा प्यार करे जैसे खुद की देह से कर रहा हो।

वह प्यार जो काम में दिखता नहीं है, मसीही प्यार नहीं है – 👉1 यूहन्ना 3:18. स्वर्ग पर रहकर यीशु प्यार का संदेश नहीं दे रहे थे।

वह इस पृथ्वी पर आए और अपने आप को दे दिया वह अभी चर्च (मण्डली) की देखभाल करते हैं। परमेश्वर पिता यीशु मसीह के सिर हैं और यीशु मसीह पिता के आधीन रहते हैं

और कोई भी पुरुष यानी की पति यीशु मसीह के आधीन ही रहता है यानी कि यीशु मसीह एक पुरुष पति के सिर हैं इसलिए एक स्त्री पत्नी को अपने पति के आधीन रहना चाहिए क्यों

की पत्नी का सिर उसका पति है और हम सब में सबसे ऊपर परमप्रधान परमेश्वर पिता और यीशु मसीह हमारे सिर हैं हमें आधीन इसलिए नहीं रहना है क्यों कि हम नीचे हैं

या ऊपर हैं हमें परमेश्वर पिता को आदर देने के लिए आधीन रहना है वैसे भी परमेश्वर पिता ने आदम को पहले बनाया फिर हवा को बनाया गया ।

हवा शैतान के द्वारा बेहकाई गई थी आदम नहीं।

क्या आप स्वार्थी या असंवेदनशील है? क्या आप अपने पति या पत्नी से कुछ मांग या नियंत्रण कर रहे थे ? 👇

  • आपके जो भी उत्तर हैं जो परमेश्वर पिता से मिली हो , उनका ईमानदारी और विनम्रता से सामना करें और फिर परमेश्वर से कहें कि वह आपको बदलने में मदद करें

और वह व्यक्ति बनें जो परमेश्वर चाहता है कि आप बनें। पहला कदम यीशु मसीह की ओर मुड़ना और उसे अपने जीवन में आने के लिए कहना है।

आपको उसकी क्षमा की आवश्यकता है, और जिस प्रकार का व्यक्ति उसने आपको बनाया है, वैसा बनने के लिए आपको उसकी सहायता की भी आवश्यकता है।

  • परमेश्वर से यह पूछने के बाद आप आगे की ओर देखें न कि सिर्फ पिछे। दूसरे शब्दों में, क्रोध, असफलता, अस्वीकृति या किसी अन्य चीज की भावनाओं से बंधे नहीं रहना चाहिए।

इसके बजाय, मसीह के लिए अपना भविष्य बनाएं और हर दिन उसका आज्ञां पालन करना अपना लक्ष्य बनाएं।

क्या परमेश्वर पिता मुझे सही साथी की ओर ले जाएगा? मैं अपनी शादी को और मजबूत कैसे बना सकता हूं? क्या परमेश्वर जानता है

कि जब मेरा पति घर से बहुत दूर होता है तो वह कितना मुश्किल में होता है ?👇

  • यदि आप ईश्वर के मैच पर आपका इंतजार कर रहे हैं : परमेश्वर उसका रास्ता लाएगा। परमेश्वर के समय पर इंतजार करने के बाद उसने इस कविता को लिखा: अगर आप चाहते हैं

कि आपकी शादी आगे बढ़े परमेश्वर ने दंपति को एक साथ लाया, और साथ संबंध में जोड़ा बनाके रखेगा भी। यदि विश्वास आपके रिश्ते में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,

तो आप दोनों को अपनी शादी के दिन के विवरण में बाइबल की आयतों को शामिल करने पर विचार करना चाहिए।

अपने प्यार को जाहीर करने के लिए और अपने रिश्ते के केंद्र में विश्वास को उजागर करने के लिए इन विवाहित बाइबिल छंदों का उपयोग करें।

प्रेम और विवाह के बारे में बाइबल की आयतें आपको अपनी भावनाओं को जाहीर करने का अवसर प्रदान करेंगी चाहे वह आपके निमंत्रण के माध्यम से हो,

आपकी प्रतिज्ञा, समारोह का विवरण, या बड़े दिन के बाद आपकी शादी की एल्बम।

  • बाइबिल प्यार के बारे में अद्भुत आयतें प्रदान करती है। अपनी शादी के दिन मसीह के साथ अपने संबंधों पर एक रोशनी दिखाने का अवसर लें।

शास्त्र में आयतें जो प्रेम से संबंधित हैं, आपकी भक्ति को केवल एक-दूसरे को ही नहीं, बल्कि आपके विश्वास को दर्शाने का सही तरीका होगा।

प्यार पर ये शास्त्र प्रेम के आध्यात्मिक और भावुक स्मरण के रूप में काम करते हैं जो आप एक जोड़े के रूप में साझा करते हैं

और आपको मित्रों और परिवार के साथ जश्न मनाते हुए अपने धार्मिक विश्वासों का सम्मान करने का एक तरीका प्रदान करते हैं।

प्यार के बारे में शादी की आयतें :👇(Pyar ke vare me shaadi ke ayete)

बाईबल शास्त्र में आयतें जो प्रेम से संबंधित हैं, आपकी भक्ति को केवल एक-दूसरे को ही नहीं, बल्कि आपके विश्वास को दर्शाने का सही तरीका होगा।

प्यार पर ये वचन आयतें प्रेम के आध्यात्मिक और भावुक अनुस्मारक के रूप में काम करते हैं जो आप एक जोड़े के रूप में साझा करते हैं

और आपके दोस्तों और परिवार के साथ जश्न मनाते हुए अपने धार्मिक विश्वासों का सम्मान करने का एक तरीका प्रदान करते हैं।

मत्ती 22:37

37 उसने कहा, “‘तुम अपने परमेश्‍वर यहोवा से अपने पूरे दिल, अपनी पूरी जान और अपने पूरे दिमाग से प्यार करना।’

रोमियों 13:10

10 प्यार अपने पड़ोसी का बुरा नहीं करता, इसलिए प्यार करना सही मायनों में कानून को मानना है।

1 कुरिंथियों 13:13

13 लेकिन जो तीन बातें बाकी रह जाएँगी, वे हैं विश्‍वास, आशा और प्यार, मगर इन तीनों में सबसे बड़ा है प्यार।

1 कुरिन्थ. 16:14

14 सब कुछ प्रेम से करो।

यूहन्ना 13:34

34 मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूँ, कि एक दूसरे से प्रेम रखो। जैसा मैंने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।

1 यूहन्ना 4:18-21

18 ऐसे प्रेम में किसी तरह का डर नहीं पाया जाता है, क्योंकि सच्चा (परिपक्‍व) प्रेम सब तरह के डर को निकाल फेंकता है। यदि हम डरते हैं, तो यह इन्साफ़ के दिन का डर है।

यह दिखाता है कि उन के प्रेम ने हमारे जीवन में जड़ नहीं पकड़ी । 19 इसलिए कि उन्हों ने हम से पहले प्रेम किया, हम उन से प्रेम करते हैं।

20 यदि कोई कहता है, “मैं परमेश्‍वर से प्रेम करता हूँ, लेकिन अपने मसीही भाई या बहन से नफ़रत करता है, वह इन्सान झूठ बोलता है, इसलिए कि यदि हम जिन लोगों को देखते हैं,

उन से प्रेम नहीं करते, तो हम परमेश्‍वर से प्रेम कैसे कर सकते हैं, जिन्हें हम ने नहीं देखा है।

21 स्वयं परमेश्‍वर ने यह आदेश दिया है कि जो परमेश्‍वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाइयों और बहनों से भी प्रेम रखे।

1 यूहन्ना 4:8

8 जो प्रेम नहीं करता है, वह परमेश्‍वर को नहीं जानता है क्योंकि परमेश्‍वर प्रेम हैं।

यूहन्ना 3:16

16 क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उन्हों ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उन पर विश्‍वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।

रोमि 12:9

9 प्यार में दिखावा न हो। बुराई से नफ़रत करो। अच्छाई को पकड़े रहो।

शादी के रिश्तों के बारे में बाईबल के छंद :👇

  • यहां प्रेम, विवाह और रिश्तों के बारे में कुछ सबसे क़ीमती बाइबिल छंद हैं जिन्हें आप अपनी शादी के दिन शामिल कर सकते हैं।

इफिसि. 5:25,26

25 पतियो, अपनी पत्नियों से प्यार करो, जिस तरह से यीशु ने चर्च से प्यार किया और अपने आप को उसके लिए दे दिया,

26 ताकि वह उसे वचन के पानी से धोकर शुद्ध करे।

इफिसि 5:28

28 इसलिए पतियों को अपनी पत्नियों से इस तरह प्यार करना चाहिए, जैसे वे अपनी देह से करते हैं। जो अपनी पत्नी से प्यार करता है, वह खुद से प्यार करता है।

रूत 1:16,17

16 लेकिन रूत ने कहा, “मुझे वापस जाने के लिए मत कह, अपने साथ आने से मत रोक। क्योंकि जहाँ तू जाएगी, वहाँ मैं भी जाऊँगी।

और जहाँ तू रात गुज़ारेगी, वहीं मैं भी रात गुज़ारूँगी। तेरे लोग मेरे लोग होंगे और तेरा परमेश्‍वर मेरा परमेश्‍वर होगा।

17 जहाँ तू मरेगी वहाँ मैं भी मरूँगी और दफनायी जाऊँगी। सिर्फ मौत ही मुझे तुझसे अलग कर सकती है। अगर किसी और वजह से मैं तुझसे अलग हुई, तो यहोवा मुझे कड़ी-से-कड़ी सज़ा दे।”

उत्पत्ति 1:27,28

27 परमेश्‍वर ने अपनी छवि में इंसान की सृष्टि की, हाँ, उसने अपनी ही छवि में इंसान की सृष्टि की। उसने उन्हें नर और नारी बनाया।

28 फिर परमेश्‍वर ने उन्हें आशीष दी और उनसे कहा, “फूलो-फलो और गिनती में बढ़ जाओ, धरती को आबाद करो और इस पर अधिकार रखो।

समुंदर की मछलियों, आसमान में उड़नेवाले जीवों और ज़मीन पर चलने-फिरनेवाले सब जीव-जंतुओं पर अधिकार रखो।

उत्पत्ति 2:24,25

24 इस वजह से आदमी अपने माता-पिता को छोड़ देगा और अपनी पत्नी से जुड़ा रहेगा और वे दोनों एक तन होंगे।

25 आदमी और उसकी पत्नी दोनों नंगे थे, फिर भी वे शर्म महसूस नहीं करते थे।

मलाकी 2:16

16 क्योंकि मुझे तलाक से नफरत है।” यह बात इसराएल के परमेश्‍वर यहोवा ने कही है। “और जो हिंसा करता है उससे भी मुझे नफरत है।” यह बात सेनाओं के परमेश्‍वर यहोवा ने कही है। “इसलिए अपने मन को टटोलो और सही रुझान पैदा करो। ठान लो कि तुम विश्‍वासघात नहीं करोगे।

मत्ती 19:5

5 और कहा था, ‘इस वजह से आदमी अपने माता-पिता को छोड़ देगा और अपनी पत्नी से जुड़ा रहेगा और वे दोनों एक तन होंगे’?

मरकुस 10:7, 8

7 इस वजह से आदमी अपने माता-पिता को छोड़ देगा  8 और वह और उसकी पत्नी एक तन होंगे।’ तो वे अब दो नहीं रहे बल्कि एक तन हैं।

रोमियों 7:2

2 मिसाल के लिए, एक शादीशुदा औरत अपने पति के जीते-जी कानूनी तौर पर उससे बँधी होती है, लेकिन अगर उसका पति मर जाए, तो वह उसके कानून से छूट जाती है।

1 कुरिंथियों 6:16

16क्या तुम नहीं जानते कि जो वेश्‍या से मिल जाता है वह उसके साथ एक तन हो जाता है? क्योंकि परमेश्‍वर कहता है, “वे दोनों एक तन होंगे।”

इफिसियों 5:31

31“इस वजह से आदमी अपने माता-पिता को छोड़ देगा और अपनी पत्नी से जुड़ा रहेगा और वे दोनों एक तन होंगे।”

इब्रानियों 13:4

4शादी सब लोगों में आदर की बात समझी जाए और शादी की सेज दूषित न की जाए क्योंकि परमेश्‍वर नाजायज़ यौन-संबंध रखनेवालों और व्यभिचारियों को सज़ा देगा।

रोमि 13:8

8 आपसी प्यार के अलावा और किसी बात के कर्ज़दार न हो। जो दूसरों से प्रेम करता है उसने परमेश्‍वर के नियमशास्त्र को पूरा कर लिया है।

नीती 31:10

10 एक अच्छी पत्नी कौन पा सकता है? उसका मोल मूंगों से भी बढ़कर है।

नीतिवचन 12:4

4 एक अच्छी पत्नी अपने पति के सिर का ताज है, लेकिन जो उसे शर्मिंदा करती है, वह मानो उसकी हड्डियाँ गला देती है।

नीतिवचन 19:14

14 घर और दौलत पिता से विरासत में मिलती है, लेकिन सूझ-बूझ से काम लेनेवाली पत्नी यहोवा से मिलती है।

सभोपदेशक 4:9

9 एक से भले दो हैं क्योंकि उनकी मेहनत का उन्हें अच्छा फल मिलता है।

उत्पत्ति 2:18

18 फिर यहोवा परमेश्‍वर ने कहा, “आदमी के लिए यह अच्छा नहीं कि वह अकेला ही रहे। मैं उसके लिए एक मददगार बनाऊँगा, ऐसा साथी जो उससे मेल खाए।”

नीतिवचन 27:17

17 जैसे लोहा लोहे को तेज़ करता है, वैसे ही एक दोस्त दूसरे दोस्त को निखारता है।

इफिसि. 5:33

33 फिर भी तुम में से हर एक व्यक्‍ति अपनी पत्नी से ऐसा प्रेम रखे, जैसा वह खुद अपने आप से रखता है; पत्नी को भी अपने पति की इज़्ज़त करनी चाहिए।

मलाकी 2:14-16

14 तुम कहते हो, ‘हमने ऐसा क्या किया है?’ तुमने अपनी जवानी की पत्नी के साथ विश्‍वासघात किया है और यहोवा इस बात का गवाह है।

तुमने अपनी संगिनी, अपनी पत्नी के साथ विश्‍वासघात किया है जिसके साथ तुमने करार किया था।  15 लेकिन कुछ लोगों ने ऐसा नहीं किया क्योंकि उनमें अब भी पवित्र शक्‍ति काम कर रही है।

वे ऐसा वंश चाहते हैं जो सचमुच परमेश्‍वर के लोग हों। इसलिए तुम भी अपने मन को टटोलो और सही रुझान पैदा करो।

ठान लो कि तुम अपनी जवानी की पत्नी के साथ विश्‍वासघात नहीं करोगे।  16 क्योंकि मुझे तलाक से नफरत है।” यह बात इसराएल के परमेश्‍वर यहोवा ने कही है।

“और जो हिंसा करता है उससे भी मुझे नफरत है।” यह बात सेनाओं के परमेश्‍वर यहोवा ने कही है। “इसलिए अपने मन को टटोलो और सही रुझान पैदा करो। ठान लो कि तुम विश्‍वासघात नहीं करोगे।

नीतिवचन 5:18-20

18 तेरे पानी के सोते पर आशीष हो, अपनी जवानी की पत्नी के साथ खुश रह।19 वह तो तेरी प्यारी हिरनी है, मन मोह लेनेवाली पहाड़ी बकरी है।

उसके स्तन हमेशा तुझे संतुष्ट रखें, तू हमेशा उसके प्यार में डूबा रहे।20 हे मेरे बेटे, फिर तू क्यों किसी परायी औरत पर मोहित हो? क्यों एक बदचलन औरत को अपने सीने से लगाए?

मत्ती 19:4-6

4 यीशु ने उन्हें जवाब दिया, “क्या तुमने नहीं पढ़ा कि जिसने उनकी सृष्टि की थी, उसने शुरूआत से ही उन्हें नर और नारी बनाया था

5 और कहा था, ‘इस वजह से आदमी अपने माता-पिता को छोड़ देगा और अपनी पत्नी से जुड़ा रहेगा और वे दोनों एक तन होंगे’?

6 तो वे अब दो नहीं रहे बल्कि एक तन हैं। इसलिए जिसे परमेश्‍वर ने एक बंधन में बाँधा है, उसे कोई इंसान अलग न करे।”

1 पतर. 3:1-7

1 हे पत्नियो, इसी तरह तुम भी अपने पति के अधिकार को स्वीकार करो, उन के भी जो परमेश्‍वर को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

2 तुम्हारे बिना कुछ कहे सिर्फ़ तुम्हारे चालचलन ही से वे यीशु को मानने वाले हो जाएँगे 3 बाहरी खूबसूरती के बारे में ज़्यादा मत सोचो जो तरह-तरह के बालों की स्टाइल महँगे जेवरात

और सुन्दर कपड़ों से आती है। 4 शान्त स्वभाव की एक भीतरी खूबसूरती है जो परमेश्‍वर की निगाह में बहुत कीमती है, वही तुम्हारी पहचान होनी चाहिए।

5 पुराने समयों में परमेश्‍वर से प्यार करने वाली महिलाएँ इसी तरह से अपने आपको संवारती थीं। वे परमेश्‍वर पर भरोसा रखती और पति की आधीनता में रहा करती थीं।

6 उदाहरण के लिए साराह, अब्राहम को ‘मेरे मालिक’ कह कर बुलाया करती थी। अगर तुम उसी की तरह वही करो जो ठीक है और किसी बात से भयभीत न हो तो उसी की बेटियाँ ठहरोगी।

7 इसी तरह से तुम पतियो, अपनी पत्नियों की इज़्ज़त करो। उसके साथ समझदारी के साथ पेश आओ। वह कमज़ोर हो सकती है, लेकिन तुम दोनों परमेश्‍वर के नए जीवन के वरदान में बराबरी के साथी हो।

ऐसा करने से तुम्हारी प्रार्थनाओं के उत्तर में रुकावट नहीं आएगी।

लूका 16:18

18 उदाहरण के लिए, एक आदमी जो तलाक देकर किसी दूसरी से विवाह कर लेता है, (व्यभिचार) करता है और जो आदमी तलाकशुदा महिला से विवाह करता है, वह भी।”

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |
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