Shaitan kon he, kya chahta he, aur kya kar sakta he ?

Shaitan kon he, kya chahta he, aur kya kar sakta he ?

 

  1. विश्वासियों का एक चालाक शत्रु है, जो चाहता है कि उनको गिराने के लिए, हराने के लिए कुछ करे। शैतान का यह उद्देश्य है कि वह विश्वासियों के जीवन को बर्बाद कर डाले,

कलीसियाओं को उजाड़े और मसीह का अपमान हो। यह सब कुछ करने के लिए उसके पास योजनाएँ थीं। वह मसीह के लोगों को अपराध करने के लिए उकसाता है। इस प्रकार से करता है

कि वे क्षमा प्राप्त करने की लालसा में तड़पते रहें। वह कोशिश करता है कि उनके पश्चाताप किए बिना, कलीसिया उन्हें स्वीकार कर ले।

किसी एक या अधिक सदस्यों के द्वारा वह चर्च की शान्ति और व्यवस्था को भंग करने का प्रयास करता है। वह यह कोशिश करता है

कि कलीसियाई अगुवे गुनाह को हल्का फुल्का समझें या गुनाह करने वालों के साथ कठोरता से व्यवहार करें।

 

2. आदम और हव्वा को बुराई में गिरा कर शैतान इस संसार में मृत्यु को लाया – उत्पत्ति 3. मनुष्य को गुलाम बनाकर वह अपराध और मृत्यु के क्षेत्र में राज्य करता है

एवं उन्हें आत्मिक मृत्यु की हालत में रखता है – 2 तीमु. 2:26. ऐसा प्रतीत होता है कि उसे मार डालने का भी अधिकार है

– अय्यूब 2:6; 1 कुरि. 5:5. अपनी मौत और जी उठने के द्वारा मसीह ने शैतान को हराया और यह सम्भव किया कि मनुष्य अपराध की क्षमा,

आत्मिक जीवन पाए और अनन्तकालिक मृत्यु से पूरी तरह छूट जाए – यूहन्ना 5:24; 11:25-26; 1 कुरि. 15:54, 57; 2 तीमु. 1:10. इसका अर्थ है शैतान का तख्ता पलटा जाना

और उसका एवं उसके राज्य का सर्वनाश – यूहन्ना 12:31; प्रका. 20:10, 14, 15.

 

3.  शैतान अपने आप को शैतान के रूप में प्रगट नहीं करता है। वह अपराध दुष्टता और बुराई दिखने भी नहीं देता है। वह अपने आप को चमकता हुआ, बुद्धि से भरा और खूबसूरत दिखाता है।

वह एक ईश्वर के रूप में आता है। वह परमेश्वर के वचन के इन्कार किए जाने को ऐसा रखता है, कि वह सही लगता है।

वह बुराई को अच्छाई के स्वरुप में प्रगट करता है। वह सारी दुनिया को उलट पुलट कर देना चाहता है। वह सच को झूठ के रूप में और झूठ को सत्य के रूप में लाता है।

अँधेरे को प्रकाश और रोशनी को अँधियारे के समान रखता है। उसकी मदद करने के लिए बहुत से लोग हैं। ऐसे लोगों पर परमेश्वर सज़ा की घोषणा करते हैं यशा. 5:20. 1 इति. 21:1; मत्ती 4:1; यूहन्ना 8:44 में।

 

4.  आकाश के अधिकार के शासक”- यह शैतान है। वह आत्मा के रूप में है जो आकाशीय स्थानों (इफ़िसियों 6:12) के निचले भाग में काम करता है।

ऐसा लगता है कि पृथ्वी के वातावरण में से वह अपना शासन करता है। उसे इस दुनिया का “ईश्वर” – और शासक कहा गया है

– यूहन्ना 12:31; 2 कुरि. 4:4. वह उन सभी में काम कर रहा है जो यीशु मसीह के प्रति आज्ञाकारी नहीं हैं। यूहन्ना 8:44; प्रे.काम 5:3;

 

5.  शैतान विश्वासियों से लड़ने के लिए अकेला नहीं है। अनदेखे आत्मा के दायरे में । तमाम दुष्ट आत्माएँ उसी की तरफ़ हैं। शैतान शासक है

और इस दुनिया का “ईश्वर” भी (यूहन्ना 12:31; 2 कुरि. 4:4) इसके अलावा उसके साथ काम करने वाले दूसरे भी हैं (दानि. 10:13,20;

 

6. जैसी पवित्रता परमेश्वर में है, जन्म से हमारे पास वैसी पवित्रता नहीं है। हमारा पुराना स्वभाव बिल्कुल गिर चुका है, भ्रष्ट है इसीलिए बुराई की तरफ़ हम खिंचे चले जाते हैं

(गल. 5:16-17; रोमि. 7:15-20; इफ़ि. 4:22-24)। शैतान यह सब अच्छी तरह से जानता है और हमारे सामने लालच लाता है। (1 थिस्स. 3:5)।

यदि हम परीक्षा में लुढ़क जाते हैं, तो हमें परमेश्वर को दोषी नहीं ठहराना चाहिए तुलना करें 1 कुरि. 10:13.

 

7.  यहाँ एक बड़ी प्रतिज्ञा है। जो लोग परमेश्वरीय ताकत में शैतान का मुकाबला करते हैं, उन से शैतान डरता है। लेकिन वह उन्हीं लोगों को देख भाग खड़ा होता है, जो अपने को परमेश्वर के प्रति समर्पित करते हैं।

पहले समर्पण है, फिर शैतान से मुकाबला आता है। मत्ती 4:1 में शैतान पर अध्ययन करें। शैतान का अपनी ताकत में या घमण्ड में मुकाबला सिर्फ़ असफ़लता लाएगा।

 

8.  शारीरिक रीति से वे अब्राहम की संतान थे, किंतु आत्मिक रीति से शैतान के (मत्ती 13:38. 1 इति. 21:1; मत्ती 4:1-11; 2 कुरि. 11:14. शैतान उन में कार्यरत था (इफ़ि. 2:2)।

वे शैतान की मानते थे, कई रीति से उसके समान थे और उसी के थे। यह मानवीय हृदय का धोखा और मात्र दुष्टता है (यिर्म. 17:9)।

यहाँ शैतान के विषय में दो बातें प्रगट की गई हैं – वह हत्यारा एवं महा झूठा है। “शुरुआत से खूनी”- इस बात की ओर संकेत हो सकता है कि उसने किस प्रकार से

आदम और हव्वा को नाश करने का प्रयत्न किया (उत्पत्ति 2:17; 3:1-4), या हाबिल की हत्या, जिसकी प्रेरणा कैन को शैतान से मिली थी ( उत्पत्ति 4:8)। यह कहना गलत न होगा,

कि शैतान मनुष्य जाति का हत्यारा है। जिस अपराध को करने की परीक्षा वह आदम और हव्वा के सामने लाया था, उसके परिणामस्वरूप मौत ने उनको और उनकी पीढ़ियों को प्रभावित किया (रोमि. 5:12)।

9.  शैतान झूठा भी है, और वह अपने झूठ से सारे संसार को गुमराह करता है (प्रका. 12:9)। वह परमेश्वर, मसीह, मनुष्यों, उद्धार, धर्म और प्रत्येक उस बात के विषय में झूठ बोलता है,

जिससे मनुष्य को फँसाकर नाश करे। वह, विशेषतया धर्म के सम्बंध में कार्य करता है। दुखद बात यह है कि मसीह द्वारा सिखाई गई सच्चाई से अधिक लोग उसके झूठ पर विश्वास करना चाहते हैं।

बहुत लोग जाने या अनजाने में उसकी उपासना करते हैं (मत्ती 4:8-9; लैव्य. 17:7; व्यव. 32:17; भजन 106:37; 1 कुरि.

10:20; प्रका. 9:20)।

10.  शैतान परमेश्वर के राज्य को बर्बाद करना चाहता है। दूसरों को बुराई करने का प्रलोभन देकर वह यह करना चाहता है।

यीशु के प्रलोभनों के ज़रिये हम सीख सकते हैं कि यीशु या शैतान क्या और कैसे हैं और हम प्रलोभनों पर जीत कैसे पाएँगे।

11.  अपनी बड़ी सेवा के लिए पवित्र आत्मा द्वारा यीशु को अभिषेक मिला था। परमेश्वर का राज्य नज़दीक था और राजा को इस काम के लिए अलग किया गया था।

फिर भी पवित्रात्मा किसी संसारिक सिंहासन तक उन्हें नहीं ले गया, लेकिन मरूस्थल में, ताकि परीक्षा की जाए। यूनानी भाषा में दोनों ही एक शब्द हैं। क्या उपवास, भूख और प्रलोभन (परख) से बड़ा राज्य आता है?

इन्सान के तरीके से नहीं, लेकिन परमेश्वर के तरीके से। परमेश्वर का राज्य आत्मिक है। राजा के चरित्र का परखा और अनुमोदन किया जाना ज़रूरी था।

परमेश्वर के राज्य के बड़े दुश्मन शैतान का हराया जाना ज़रूरी था। यह परीक्षा दिखाती है कि यीशु पूरी तरह आज्ञाकारी थे और सब बातों में परमेश्वर को खुश करते थे।

12.  अगर हम दो सच्चाइयाँ जानें, तो हम प्रलोभन/परीक्षा/परख को समझ सकते हैं: यीशु के मानवीय स्वभाव की परख हो रही थी, परमेश्वरीय स्वभाव की नहीं।

परमेश्वर के रूप में उनकी परख नहीं हो सकती थी – याकूब 1:13. यीशु की परख आखिरी आदम के रूप में हो रही थी (1 कुरि. 15:45-49)। पहला आदम मानव जाति को शुरू करने वाला और इसका प्रतिनिधि था।

यीशु नए तरीके से लोगों के प्रतिनिधि थे (रोमि. 5:12-21)। परीक्षा के समय आदम नाकामयाब हुआ। और उसने पूरी मानव जाति को अपने साथ समेट लिया।

यीशु ने डट कर प्रलोभन का मुकाबला किया और एक रास्ता खोल दिया कि मनुष्य भी ऐसा कर सके। एक इन्सान के रूप में यीशु की परीक्षा के सम्बन्ध में इब्रा. 2:18; 4:15 में लिखा है।

 

13. “झूठ का पिता”– सभी झूठे शैतान का पक्ष ले रहे हैं और परमेशवर के सत्य का विरोध कर रहे हैं (भजन 31:5)। वे इस भयंकर गुनाह का मूल्य चुकता करेंगे (प्रका. 21:8)।

झूठे लोग शैतान के बच्चे हैं और नरक जाएँगे। पौलुस स्पष्ट करता है। जो बातें पवित्रता और भलाई के खिलाफ़ हैं, विश्वासियों को उन्हें अस्वीकार करना चाहिए, रोक देना चाहिए।

 

 

14.  जो लोग मसीह के संदेश का विरोध करते हैं वे आत्मिक रीति से दिमाग से सरके हुए हैं (सभो. 9:3 से तुलना करें)। अपने कल्याण के खिलाफ़ वे बेवकूफ़ी का व्यवहार करते हैं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि शैतान ने उन्हें गुलाम बना लिया है और उन्हों ने उसके झूठ को अपना लिया है। (यूहन्ना 8:44; प्रे.काम 26:18; 2 कुरि. 4:4; इफ़ि. 2:2 से तुलना करें।

जो विरोधी ताकते हैं, उनके बारे में उन्हें अनजान नहीं होना है। उन्हें यह जानना है कि मात्र याहवे की शक्ति लोगों को आज़ाद कर सकती और इसे हासिल करने के लिए परमेश्वर सत्य की शिक्षा का उपयोग कर सकते हैं।

 

 

15.  मनुष्य जो पापमय हैं, जिन्हें अंधकार पसंद है, और जो सच्चे परमेश्वर को नहीं जानते हैं, उनके मनों के ऊपर शैतान का राज्य है।

यूहन्ना8:44; 1 इति. 21:1; मत्ती 4:1-10 में शैतान के ऊपर नोट्स देखें। “निकाल दिया जाएगा” का अर्थ, संसार से फेंके जाने से नहीं है,

क्योंकि वह तो इस संसार में है (1 पतर. 5:8) और वह तब तक फेंका नहीं जाएगा जब तक यीशु दोबारा न आ जाएँ (प्रका. 20:1-3)। इसका अर्थ यह प्रतीत होता है, क्रूस के द्वारा वह मनुष्यों के लिये मुक्ति हासिल करेंगे।

और इसका अर्थ होगा, शैतान की पूरी हार। जो लोग पहले से शैतान के आधीन रहे हैं, वे परमेश्वर की ओर मुड़ेंगे और अन्ततः पूरा संसार परमेश्वर के शासन के प्रति समर्पित हो जाएगा

ताकि परमेश्वर की महिमा प्रगट करे (यशा. अध्याय 11 आदि)। इन सभी बातों का आधार क्रूस है। उस समय क्रूस शैतान की विजय लग रही थी, किंतु वास्तव में उसकी प्रजातन्त्र थी।

 

 

16.  शैतान उन लोगों को पकड़ सकता है जो आत्मिक रीति से सो रहे हैं या अपने में लिप्त हैं। मत्ती 4:1 में शैतान पर टिप्पणी देखें। इसलिए कि परमेश्वर के समान एक ही समय में वह सब जगह नहीं हो सकता,

उसे इधर उधर भ्रमण करना पड़ता है। हालांकि वह शेर के समान आता है, किंतु जब विश्वासयोग्य विश्वासियों का साम्हना करता है तब वह डर जाता है (याकूब 4:7) और वे उसे पैरों से रौंद सकते हैं (भजन 91:13)।

 

 

17.  बाईबल ऐसा बताती है पतरस के बारे में पतरस का दूसरा नाम शमौन था। शैतान का इरादा था कि पतरस और दूसरे शिष्यों को उलझन में डाले और बर्बाद करे।

यहाँ शब्द ‘तुम’ दिखाता है कि दूसरे शिष्य भी शामिल थे। इस में शक नहीं कि पतरस शैतान का खास लक्ष्य था।

 

 

शैतान के बारे में बाईबल में आयतें :-👇

 

2 कुरिन्थियों 11:14

14 इस में कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि शैतान खुद ज्योतिर्मय स्वर्गदूत का सा रूप ले लेता है।

 

मत्ती 4:1

1 बपतिस्मे के बाद पवित्र आत्मा यीशु को जंगल में ले गया, ताकि शैतान से उन की परख की जाए।

 

यूहन्ना 8:44

44 तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो शुरुआत से खूनी है। वह सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उसमें है ही नहीं।

जब वह झूठ बोलता है, तो अपने स्वभाव ही से बोलता है, क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।

 

इफ़िसियों 2:2

2 पिछले समयों में तुम इस संसार के तौर तरीकों , आकाश के अधिकार के शासक (शैतान) यानि वह आत्मा जो अभी भी आज्ञा न मानने वालों में काम करता है, उसी के अनुसार जीवन जीते थे।

 

इफ़िसियों 6:12

12 क्योंकि हम इन्सान के विरोध में नहीं हैं परन्तु आकाश-मण्डल में प्रधानों, अधिकारियों, इस संसार के अन्धकार के हाकिमों और दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से संघर्ष करते हैं।

 

प्रकाशित वाक्य 12:9

9 तब वह बड़ा अजगर नीचे गिरा दिया गया – वही पुराना साँप जो इबलीस और शैतान कहलाता है और सारी दुनिया को बहकाता है। वह पृथ्वी पर अपने दूतों समेत गिरा दिया गया।

 

गलातियों. 5:16-17

16 इसलिए मैं कहता हूँ आत्मा के द्वारा जीवन जियो तब तुम अपनी इच्छाओं के अनुसार नहीं जीओगे। 17 क्योंकि पुराना स्वभाव पवित्र आत्मा के विरोध में इच्छा रखता है

और पवित्र आत्मा पुराने स्वभाव के विरोध में। ये एक दूसरे के विरोधी हैं, ताकि तुम वह सब न कर सको, जो तुम चाहते हो।

 

इब्रानियों 2:14

14 इसलिए जब कि बच्चे मांस और लोहू के हिस्सेदार हुए हैं, तो वह आप भी उसमें सहभागी हुए, ताकि अपनी मौत के द्वारा उसे, अर्थात् शैतान को जिसे मौत पर हक मिला था, कमज़ोर (निकम्मा) कर दे।

 

 

2 तीमुथियुस 2:26

26 हो सकता है अभी वे शैतान की इच्छा पूरी करने के लिए उसके जाल में फँसे हैं, लेकिन वे होश में आकर शैतान के जाल से छूट जाएँ जिसमें उसने उन्हें कैद कर रखा है।

 

 

यूहन्ना 12:31

31 अब इस जगत का न्याय होता है। इस जगत का अधिकारी निकाल दिया जाएगा।

 

1 पतरस 5:8

8 अपने आपको काबू में रखो और सचेत रहो, क्योंकि तुम्हारा दुश्मन शैतान गर्जने वाले शेर की तरह इस तलाश में रहता है, कि किसको अपना निशाना बनाए।

 

1 यूहन्ना 3:4-10

4 जो कोई उचित करने से चूक जाता है, वह व्यवस्था (परमेश्वर के मापदण्ड) को तोड़ता है, क्योंकि चूक जाना (बलवा करना) व्यवस्था के खिलाफ़ जाना है।

5 तुम्हें मालूम है कि यीशु इसलिए आए ताकि गुनाहों (पापों) को उठा ले जाएँ और उन में कोई अपराध नहीं है। 6 जो कोई उन में बना रहता है,

वह गुनाह करना जारी नहीं रखता है। जो गुनाह करना जारी रखता है उसने न तो यीशु को देखा है और न जाना है।

7 छोटे बच्चो, तुम्हें कोई धोखे में न रखे। मुक्ति पाया हुआ इन्सान ही ऐसा सही जीवन जीता है, जिस तरह का जीवन यीशु का है।

8 जो गुनाह करता रहता है, वह शैतान से है। क्योंकि शैतान शुरू से गुनाह करता आया है। परमेश्वर के बेटे (यीशु) इसलिए आए, ताकि वह शैतान के कामों को बर्बाद कर डालें।

9 जो कोई परमेश्वर से पैदा हुआ है, वह गुनाह करना जारी नहीं रखता, क्योंकि उनका बीज उसमें बना रहता है और वह गुनाह में बना नहीं रह सकता, क्योंकि वह परमेश्वर से पैदा हुआ है।

10 इसी बात से परमेश्वर की संतान और शैतान की संतान के बीच अन्तर देखा जा सकता है। जो सही चाल चलन को बनाकर नहीं रखता है, वह परमेश्वर से नहीं है, न ही वह जो अपने भाई-बहन से प्रेम नहीं करता है।

 

1 यूहन्ना 5:18-19

18 हम जानते हैं कि जो परमेश्वर से जन्मा है, वह गुनाह करना जारी नहीं रखता , लेकिन वह जो परमेश्वर से जन्मा है, गुनाह करने से बचता है। और ऐसे व्यक्ति को शैतान छू भी नहीं सकता।

19 हमें मालूम है कि हम परमेश्वर के हैं और सारी दुनिया उस दुष्ट के शिकंजे में है।

 

प्रकाशित वाक्य 12:12

12 इसलिए हे स्वर्ग और उस में रहने वालो, खुश हो। पृथ्वी और समुद्र पर हाय! क्योंकि शैतान बहुत गुस्से से तुम्हारे पास उतर आया है, क्योंकि वह जानता है कि उस का समय थोड़ा ही है।

 

इफ़िसियों 5:11-12

11 परमेश्वर के सभी हथियारों (गुणों) को पहन लो, ताकि तुम शैतान की बुरी चालों के सामने खड़े रह सको।

12 क्योंकि हम इन्सान के विरोध में नहीं हैं परन्तु आकाश-मण्डल में प्रधानों, अधिकारियों, इस संसार के अन्धकार के हाकिमों और दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से संघर्ष करते हैं।

 

2 कुरिन्थियों 2:11

11 ताकि शैतान हमें धोखा न दे सके क्योंकि उसकी चतुराई से हम अनजान नहीं।

 

1 कुरिन्थियों 10:13

13 ऐसे किसी प्रलोभन (परीक्षा) का सामना तुम ने नहीं किया, जिसका सामना दूसरे लोग करते हैं परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं, वह सहने से बाहर तुम्हें किसी प्रलोभन में फँसने नहीं देंगे।

लेकिन प्रलोभन से बच निकलने का रास्ता भी दिखाएँगे, ताकि तुम सह सको।

 

मत्ती 6:13

13 हमें प्रलोभन में पड़ने न दें , लेकिन बुराईं से (शैतान से) बचाएँ; क्योंकि राज्य और पराक्रम और शान (महिमा) हमेशा आपकी ही हैं। ऐसा ही हो।

 

मत्ती 25:41

41 तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, ‘हे स्त्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिए तैयार की गई है।

 

यशायाह 14:12

12 हे चमकते तारे, हे सुबह के बेटे, तू आसमान से कैसे गिर पड़ा? हे राष्ट्रों को धूल चटानेवाले, तू कैसे कटकर गिर गया?

 

लूका 22:31-32

31 यीशु ने कहा, “शमौन, शमौन, शैतान ने तुम्हें माँग लिया है, ताकि तुम्हें गेहूँ की तरह फटके। 32 लेकिन मैंने तुम्हारे लिए यह माँगा है कि तुम्हारा विश्वास डावाँडोल न हो।

और जब तुम वापस मज़बूत हो जाओ, तो अपने भाइयों को मज़बूत करना।”

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