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Rath Yatra kya he aur iski History !

Rath Yatra हिन्दू धर्म के लोगो और स्राधालू के बिच मनाया जाने वाला प्रामुख पर्व हे यह पर्व वर्ष के आषाढ़ माह की शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता हे

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रथ यात्रा उत्साव को बड़े ही हर्ष और उल्हाश के साथ 10 दिन तक मनाया जाता हे आज पूरी विश्वा भार में रथ यात्रा मनाया जाता हे

लेकिन बात करें ओडिशा राज्य की पूरी सेहर में मनाये जाने वाला रथ यात्रा उत्साव बडेही श्राध और भक्ति के साथ मनाया जाता हे व्

Odisha ke puri me manay jane wali RATH YATRA  prashidh kyun he ?

ओडिशा राज्य के पूरी सेहर में मनाए जनि वाली रथ यात्रा बोहुत ही प्रचालित हे कारन यह हे सबसे पहली बात जगन्नाथ-पूरी जिन्हें हम पूरी सेहर के नाम से जानते हैं खुबसूरत समुन्दर के किनारे बसी हे बड़ी आकार से बनी मंदिर

और वोह मंदिर हैं जगन्नाथ यानि “जगत का नाथ हैं जगन्नाथ” विश्व में सबसे बड़ी जगन्नथ मंदिर पूरी में बनायीं गयी हे पूरी में रथ यात्रा मानाने के लिए देश विदेश से स्राधालू और भक्त आतें हैं और यह उत्सव 10 दिन तक मनाया जाता हे

पूरी सेहर में 1 रथ नहीं वल्कि 3 रथ की यात्रा की जाती हे और स्राधालू और भक्तो का भीड़ की शंख्या लाखो से भी अधिक हो जाती हे हिन्दू ग्रन्थ के अनुसार यह पर्व 4 धाम में से 1 हे विश्वाश यह हे की इस यात्रा को करने से 100 युग की मोख्स प्राप्ति हे

RATH YATRA KA HISTORY KYA HE ?

रथ यात्रा हिन्दू धरम के कई सारी पौराणिक और एतिहासिक प्रचालन तथा कथाएँ प्रचलित हे एक कहानी के अनुसार नीलांचल सागर(वर्तमान में ओडिशा के पूरी क्षेत्रा) के पास बसी सुन्दर सा राज्या में

आपनी हुकूमत आपनी साम्राज्य में राज करने वाला राजा का नाम था  “इंद्रद्युम्न” एक बार राजा समुन्दर के किनारे से गुजार रहे थे तभी समुन्दर में विशाल्कायी आकार के एक लकड़ी  समुन्दर के पानी में तहर रही थी उसी समय

राजा की ध्यान उसपर पड़ी राजा आपने शैनिको कों आदेश देते हुए कहा जाओ और उस विशालकाय वास्तु को मेरे सामने लाओ जाब वोह लकड़ी राजा के सामने लाया गाया ताब उस लकड़ी की आकार एसी ढली थी जेसे कोई लाखो सालो से उसकी सुन्दरता को निखारा हो

लकड़ी की सुन्दरता राजा के हृदये को मनो छु लिया था एकांत में बैठे राजा के मन को भाया की इसी लकड़ी से जगदीस की मूर्ति बनाया जाये टिक उसी समय एक बुढा बढाई जो लकड़ी की काम करता था  राजा के सामने प्रकट हुआ राजा उसे देख खुस होकर आदेश दिया की

जगदीस जी की मूर्ति इस लकड़ी से बना पारन्तु यह बात कोई नहीं जनता था की बुढा बढाई के रूप में आया वोह मनुष्य नहीं वल्कि देवों के शिल्पी विश्वकर्मा थे

बुढा बढाई यानी विश्वकर्मा राजा के सामने एक सरत राखी की “जब तक में मूर्ति की निर्माण पूरी ना करदू जब तक में ना कहूँ कोई दर्वोजा नहीं खोलेगा”

राजा उससे  सहमती देते हुए उसे काम करने की आदेश दिया जहा वोह बुढा बढाई मूर्ति की निर्माण की कार्य को करने लगा

उसी स्थान को आज श्री जगन्नाथ का मंदिर कहा जाता हे दर्वोजा बंद किया गाया और कुछ दिन बीत गये राजा से लेके रानी तक सबकी ध्यान दरवाजे

की ओर थी की काब खुले और हम सुन्दर मूर्ति प्राप्त करें बोहुत दिन बीतने पर रानी को बाड़ी आशंका होने लगी की “बुढा बढाई नहीं खाने के कारन मर तो नहीं गाया ?”

क्यूंकि कोई नहीं जनता था यह बात की वोह शवं विश्वकर्मा थे रानी बड़ी बिचलित होते हुए रजा से यह बात करने लगी रानी की इस बात को ध्यान रखते हुए राजा सहमत हुए और उस दरवाजे के पास जाकर दर्वोजा खोला

तब देखने को मिला 3 मूर्ति यानि श्री जगन्नाथ ,सुभद्रा और बालराम की मूर्तियाँ आर्ध्निर्मित मिली और उस जगह कोई बुढा बढाई नहीं था राजा और रानी बुढा बढाई के सार्ट के अनुसार और आर्ध्निर्मित मूर्तियों को लेकर बडेही दुखी प्रकाश किये

उसी समय एक आकाशवाणी हुई “व्यर्थ हे दुखी प्रकाश करना क्यूंकि हम खुस हैं आर्ध्निर्मित मूर्तियों में पूजा, अर्चना की तयारी करते हुए मूर्तियों की स्थापित करवा दिया जाये ”

माता सुभद्रा की इच्छा नगर भ्रमण  और इसी इच्छा को पूरी करते हुए श्री कृष्ण और बलराम रथ में बैठ कर करवाई थी भगवन श्री जगन्नाथ ने श्री कृष्ण के अवतार में

आपने भाई बलराम और उसकी बेहेन सुभद्रा के साथ इस भ्रमण यानि यात्रा को रथ यात्रा के स्मृति के लिए हार वर्ष पर्व मानते हैं आज भी वाही आर्ध्निर्मित मुर्तिया श्री जगन्नाथ मंदिर में विराजमान हे और सभी हिन्दू धर्म के स्राधालू और भक्तो के पवित्रा स्थान हे

और यह समय था आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि  इसी समय में हार वर्ष रथ यात्रा धूम धाम से मनाया जाता हे

रथ यात्रा अब बड़े ही हर्ष और उह्ल्हस के साथ मनाया जाता हे कई स्थलों में मेला और नाटकियों और मीटयियो के दुकान से भरी पड़ी और विभिन स्थान से आये स्राधालुओं की भीड़ और पूजा अर्चना बोहुत ही खुबसूरत होती हे

मानाजाता हे पूरी में इस रथ यात्रा बोहुत ही प्राचीन हे और इसकी सुरुआत सन 1150 इसवी में गंगा राज्वंस द्वोरा किया गया था रथ यात्रा पुरे भारत भर में प्रशिध होने लगा तथा पुरे विश्वो में भारतीया पर्व मानाने वाली उत्सव था जिसके विषय में दुसरे देश के लोगो को भी जानकारी प्राप्त होने लगी

Rath Yatra kaise manay jata he ? (How to celebrate Rath Yatra in Hindi)

मान्यताओ के आनुसार आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के समय भगवन के तीनो मूर्तियों को पूजा आर्चना और तंत्रमंत्र श्रधा के साथ रथों में बैठाया जाता हे श्री बलराम के रथ पहले होती हे बिच में भगवन की बहन सुभद्रा और पीछे श्री जगन्नाथ का रथ यात्रा किया जाता हे

रथ की पूरी बनायोट लकड़ी से  किजाती हे और मोटे मोटे राशी को आगे खीचने के लिए बन्द्लिया जाता हे उसी राशी को श्रद्धालु खीच कर चलते हैं

श्री जगन्नाथ के रथ में 16 पहिये अपने भाई बलराम के रथ में 14 और बहन सुभद्रा के रथ में 12 पहिये लगे रहते हैं हार श्रद्धालु और भक्त के मन में येही खोवाहिस रहती हे की रथों में लगी राशी को छु ले और पकड़ कर खिचे

ताको हिन्दू धर्म ग्रन्थ के अनुसार उसकी सब कामना पूरी हो जाये और उससे मोख्स मिल सके आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से सुरु यह रथ यात्रा सम को माता गुंडीचा मंदिर में श्रद्धालु के द्वोरा पोहुचाया जाता हे

10 दिन तक श्री जगन्नाथ अपने माता गुंडीचा रिश्ते में श्री जगन्नाथ के मौसी लगते हैं उनके मंदिर में रहते हैं फिर 10 दिनों के पश्च्यात रथ यात्रा श्री जगन्नाथ के मंदिर की ओर किजाती हे इस यात्रा को “बहुडा रथ यात्रा” कहा जाता हे

Rath Yatra ka mahtva kya he ?

भगवन श्री जगन्नाथ इस जगत में श्री कृष्ण का अवतार माना गाया हे और पुरनियो हिन्दू धर्म ग्रन्थ के अनुसार जो कोई इस यात्रा में सामिल होता हे उसकी सारी दुःख दर्द पाप क्ष्यामा की जाती हे और सौ यज्ञ के मोक्ष प्राप्त होती हे

रथ यात्रा के दिन पुरे देश विदेश से आयें भक्तों का भीड़ बोहुत बढ़ जाती हे मनो जन्सेलब उमड़ आई हो यह पर्व सही मैनो में  श्रद्धालु और भक्तो का श्रधा और भक्ति को दर्शाता और समझाता हे

Rath Yatra ke 4 prasidh sthan !

रथ यात्रा की पूजा –अर्चना भारत के कई राज्यों में की जाती हे उसके अलावा भारत देश के बहार भी मनाया जाता हे

लेकिन इन 4 स्थान में बडे पैमाने और रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध हैं

  1. उड़ीसा के जगन्नाथपुरी में आयोजित होने वाली रथयात्रा
  2. पश्चिम बंगाल के राजबलहट में आयोजित होने वाली रथ यात्रा
  3. पश्चिम बंगाल के हुगली में आयोजित होने वाली महेश रथ यात्रा
  4. अमेरिका के न्यू यार्क शहर में आयोजित होने वाली रथ यात्रा

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |
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