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Murti puja ke vare me Bible kya kehti hai ?

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Murti puja ke vare me Bible kya kehti hai ?

  • “मूर्तिपूजक”– लालची व्यक्‍ति को मूरत पूजने वाला कहा गया है क्योंकि जिन बातों पर उसका मन लग गया है, उसकी पूजा ही कर रहा है। उसके भीतर उसकी मूर्ति है।👉 यहेज. 14:3-4.
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यहेजकेल 14:1-6👇

1 इसराएल के कुछ मुखिया मेरे पास आए और मेरे सामने बैठे।

2 फिर यहोवा का यह संदेश मेरे पास पहुँचा:

3 “इंसान के बेटे, इन आदमियों ने अपनी घिनौनी मूरतों के पीछे चलने की ठान ली है और लोगों के सामने ठोकर का पत्थर रख दिया है जो उनसे पाप करवाता है।

अब यही आदमी मेरी मरज़ी जानने तेरे पास आए हैं। मैं उन्हें अपनी मरज़ी क्यों बताऊँ?

4 उन आदमियों से कहना, ‘सारे जहान का मालिक यहोवा कहता है, “अगर एक इसराएली ने अपनी घिनौनी मूरतों के पीछे चलने की ठान ली है और वह लोगों के सामने ठोकर का पत्थर रखता है,

जो उनसे पाप करवाता है और फिर मेरी मरज़ी जानने के लिए एक भविष्यवक्‍ता के पास आता है, तो मैं यहोवा उसे उतनी कड़ी सज़ा दूँगा जितनी कि उसकी घिनौनी मूरतें हैं।

5 मैं इसराएल के घराने के लोगों के दिलों में डर बिठा दूँगा क्योंकि उन सबने मुझे छोड़ दिया है और अपनी घिनौनी मूरतों के पीछे चलने लगे हैं।”’

6 इसलिए इसराएल के घराने से कहना, ‘सारे जहान का मालिक यहोवा कहता है, “तुम सब मेरे पास लौट आओ, अपनी घिनौनी मूरतों और अपने सब घिनौने  कामों से मुँह फेर लो,

7 क्योंकि अगर कोई इसराएली या इसराएल में रहनेवाला कोई परदेसी खुद को मुझसे अलग कर देता है और अपनी घिनौनी मूरतों के पीछे चलने की ठान लेता है

और लोगों के सामने ठोकर का पत्थर रखता है जो उनसे पाप करवाता है और फिर मेरे भविष्यवक्‍ता के पास मेरी मरज़ी जानने आता है, तो मैं यहोवा खुद उस आदमी को जवाब दूँगा।

8 मैं उस आदमी के खिलाफ हो जाऊँगा और उसका ऐसा हश्र करूँगा कि उससे दूसरों को सबक मिले और उस पर एक कहावत बन जाए।

मैं उसे अपने लोगों के बीच से नाश कर दूँगा और तुम्हें जानना होगा कि मैं यहोवा हूँ।

निर्गमन 34:15

15 तुम इस बात का ध्यान रखना कि तुम उस देश के निवासियों के साथ कोई करार नहीं करोगे, क्योंकि जब वे अपने देवताओं को पूजते हैं और उनके आगे बलिदान चढ़ाते हैं

तो उनमें से कोई तुम्हें ज़रूर बुलाएगा और तुम जाकर उसके बलिदान में से खाने लगोगे।

  • सच्चे परमेश्‍वर की बात की है। इसलिए उसके दिमाग में झूठे ईश्‍वरों की बात भी आयी। वह सब जिसकी आराधना इन्सान करता है, सेवा करता है, और जो सच्चा प्रभु नहीं, वह मूरत ही है।

एक मूरत एक चीज़ की बनी हो सकती है। ईश्‍वर के बारे में झूठा विचार भी मूरत हो सकता है। हम अपने आपको हर तरह की मूर्तिपूजा से बचाएँ।

  • इपीक्यूरस ने यह सिखाया था कि मज़ा करना ज़िन्दगी का सब से बड़ा मकसद है। उसके हिसाब से सब से श्रेष्ठ मज़ा देह का नहीं है लेकिन दिमाग का है।

एक ऐसा शान्त जीवन जो पीड़ा, परेशान करने वाली इच्छाओं, डरों और मौत की चिन्ता से परे है। वह मानता था कि ईश्‍वर बहुत से हैं, लेकिन उन्हें इन्सान की ज़िन्दगी से कुछ लेना देना नहीं है।

पौलुस के समय में लोगों ने इपीक्यूरस की तालीम को बिगाड़ डाला। वे लोग देह के मज़े और चाह को ज़्यादा तूल देने लगे।

340-265 बी.सी. में ज़ेनो द्वारा स्टौइक फ़िलॉस्फ़ी की नींव डाली गयी। उसने सिखाया था कि इन्सान को चाहिए कि प्रकृति के साथ तालमेल का जीवन जीए।

यह भी कि तर्क या डिज़ाइन इस प्रकृति में सब से ऊँची चीज़ है। वह मानता था कि परमात्मा और प्रकृति मिले हुए हैं। दोनों एक दूसरे के बिना रह नहीं सकते।

वह परमेश्‍वर को दुनिया की आत्मा मानता था। वह यह भी मानता था कि अपने तर्क और खुद की काबलियत इन्सान में है।

  • इन दोनों विचारकों के मानने वाले पौलुस को अजीब नज़र से देखते थे और उसे “बकबक करने वाला” समझते थे। वे अपनी सीख और पौलुस की तालीम में फ़र्क नहीं समझ पा रहे थे।

दर्शन, वास्तविकता की प्रकृति के बारे में मनुष्य की कल्पना मात्र है, लेकिन मसीह की खुशखबरी सत्य का खुलासा है। यह भी कि इन्सान इस रोशनी में कैसे जीए। (1 कुरि. 1:17-25; कुल. 2:8)।

  • हमारे भीतर (मन की) मूर्तियाँ घृणित और खतरनाक हैं, जैसे बाहरी मूर्तियाँ हैं। देखिए, यहेज. 14:3-4.
  • बाइबिल के हिसाब से, इस्राएलियों ने सुनहरे बछड़े की पूजा करके मूसा की अनुपस्थिति में मूर्तिपूजा का अभ्यास किया।
  • जाने-माने अमेरिकी प्रचारक बिली ग्राहम ने इस बात के बारे में कह रहे हैं शिकागो ट्रिब्यून में लिखा कि यद्यपि पत्थर या धातु की मूर्तियों को झुकाना उतना व्यापक नहीं है

जितना कि यह प्राचीन काल में था, लोग आज खुद को पैसे, शक्ति और संपत्ति की मूर्तियों की पूजा करते हुए पाए जा सकते हैं।

1 कुरिंथियों 10:20

20 नहीं। बल्कि मैं यह कह रहा हूँ कि दूसरे राष्ट्र जो बलि चढ़ाते हैं वे परमेश्‍वर के लिए नहीं बल्कि दुष्ट स्वर्गदूतों के लिए बलि चढ़ाते हैं और मैं नहीं चाहता कि तुम दुष्ट स्वर्गदूतों के साथ हिस्सेदार बनो।

2 कुरिन्थ. 3:17

17 प्रभु तो आत्मा है और जहाँ कहीं प्रभु का आत्मा है, वहीं आज़ादी है।

बलि क्या है ? किसको चड़ाया जाता है ?👇(Baali kya hai? kisko chadhaya jata hai ? )

  • मसीह में शामिल होना उन सभी के साथ संगति को दिखाता है जो ऐसा करते हैं और उस सत्य को स्वीकार करना जो मसीह का बलिदान दिखाता है।

इसी प्रकार मूर्ति के मंदिर के सामने एक भोज में भाग लेना एक झूठी आराधना में शामिल होना है। यह दुष्टात्माओं के साथ संगति करना है।

  • मूरतें अपने आप में कुछ नहीं है। परन्तु मूर्तियों के पीछे दुष्टात्माएँ हैं (वे👉 1 कुरिन्थ 8:5 के झूठे प्रभु हैं)।

वे, जो उनकी उपासना करते हैं या नहीं करते हैं, सोचते हैं कि परमेश्‍वर को दान दे रहे हैं, किंतु ऐसा नहीं है । इस संसार में बहुत से लोगों की आराधना के बारे में यह एक बहुत महत्वपूर्ण कथन है।

व्यव. 32:17 भी देखें। मूर्ति के साम्हने चढ़ायी वस्तुओं को खाना उनके पीछे की दुष्टात्माओं के साथ एक होना है। यह उनको दी गई उपासना के साथ सहमति दिखाना है।

  • पौलुस का अर्थ है कि मूर्तिपूजक सोचते हैं कि स्वर्ग और पृथ्वी पर बहुत से प्रभु और ईश्‍वर हैं, किंतु मसीह में विश्‍वासी जानते हैं कि एक ही सच्चे परमेश्‍वर हैं, प्रभु हैं।

10:20 में देखें कि वह तमाम ईश्‍वरों और प्रभुओं के बारे में जिन्हें लोग पूजते हैं, क्या कहता है। देखें प्रे.काम 14:15.

  • यहाँ कुछ खास शब्द हैं। उन्हों ने सृष्टिकर्ता और ईश्‍वरों में एक अन्तर को देखा। सृष्टिकर्ता “जीवित” हैं। तमाम ईश्‍वरों का मानना और उन्हें चीज़ें चढ़ाना “बेकार की बातें” हैं।

इन से दूर रहना चाहिए। तुलना करें भजन 115:2-8; यशा. 40:18-26; 44:9-20. उनके दिए जाने वाले संदेश का यह एक हिस्सा थी।

  • व्यव. 6:13 देखें। यहाँ आराधना की सीमा निर्धारित होती है, सिर्फ़ याहवे-प्रभु की आराधना जो सृष्टिकर्ता है। निर्ग. 20:1-6 के नोट्स देखें। परमेश्‍वर द्वारा मिली एक आज्ञा काफ़ी थी।

यीशु के लिए तुरन्त पूरी स्थायी आज्ञाकारिता ही मायने रखती थी। इस से हटकर कुछ भी क्यों न हो, इसे उन्हों ने ठुकरा दिया। वह हमारे लिए इस में एक आदर्श हैं।

यह सच्चाई कि यीशु ने दूसरों से आराधना ली और स्वर्गदूतों को हुकुम दिया गया कि वे यीशु को दण्डवत् करे, साफ़ दिखाती है कि यीशु परमेश्‍वर थे जो देह में आए ( मत्ती 28:17; यूहन्ना 20:28; इब्रा. 1:6)।

  • “प्रभु की मेज़”- प्रभु भोज को दिखाता है। वहाँ वह नेवता देने वाले हैं, और उसमें भाग लेने वाले विश्‍वासी मेहमान हैं। दुष्टात्माओं की मेज़ का अर्थ है ‘दुष्टात्माओं की मेज़’।

दुष्टात्माएँ नेवता देने वाली हैं और उसमें भाग लेने वाले मेहमान। इस भाषा का उपयोग कर के पौलुस दिखाना चाहता है कि विश्‍वासियों के लिये यह कितना मुश्किल है

कि इन दोनों को एक करें, या सोचें कि “मूर्ति-भोज”- में भाग लेने से कुछ नहीं होता है।

मूर्तिपूजा के बारे में बाइबल क्या कहती है ? परमेश्वर के अलावा अन्य मूर्तियों के खिलाफ बाईबल के शास्त्र दृढ़ता से सलाह देता है।

इस अर्थ में, मूर्तिपूजा का अर्थ है , दूसरे उद्देश्य के लिए ईश्वर का मार्ग छोड़ देना। बाइबल कहती है कि हमें मांस और मन की अन्य सभी गतिविधियों से ऊपर एक धार्मिक तरीके से रहना चाहिए।

नीचे दी गई मूर्ति के बारे में बाइबल की आयतों की हमारी सूची से और जानें : 👇

व्यवस्थाविवरण 32:17

17 वे परमेश्‍वर के लिए नहीं, दुष्ट स्वर्गदूतों के लिए बलि चढ़ाते थे, ऐसे देवताओं के लिए जिन्हें वे नहीं जानते थे, नए-नए देवताओं के लिए जो अभी-अभी प्रकट हुए हैं, जिन्हें तुम्हारे बाप-दादे नहीं जानते थे।

लैव्यव्यवस्था 17:7

7 अब से वे दुष्ट स्वर्गदूतों के लिए बलि न चढ़ाएँ जिनकी वे पूजा करते हैं। यह नियम तुम्हें और तुम्हारी आनेवाली पीढ़ियों को हमेशा के लिए दिया जाता है।”’

भजन 106:37

37 वे दुष्ट स्वर्गदूतों(आत्मा)के लिए अपने बेटे-बेटियों का बलिदान चढ़ाते थे।

यहूदा 6

6 और जो स्वर्गदूत उस जगह पर कायम न रहे जो उन्हें दी गयी थी और जिन्होंने वह जगह छोड़ दी जहाँ उन्हें रहना था,

उन्हें उसने हमेशा के बंधनों में जकड़कर रखा है ताकि वे उसके महान दिन में सज़ा पाने तक घोर अंधकार में रहें।

यिर्मयाह 2:5

5 यहोवा कहता है, “तुम्हारे पुरखों ने मुझमें ऐसा क्या दोष पाया कि वे मुझसे इतनी दूर हो गए, निकम्मी मूरतों के पीछे चलने लगे और खुद निकम्मे हो गए?

यशायाह 55:7

7 दुष्ट इंसान अपनी दुष्ट राह छोड़ दे, बुरा इंसान अपने बुरे विचारों को त्याग दे। वह यहोवा के पास लौट आए जो उस पर दया करेगा, हमारे परमेश्‍वर के पास लौट आए क्योंकि वह दिल खोलकर माफ करता है।

1 कुरिन्थ. 8:5

5 यद्यपि आकाश और पृथ्वी पर कहलाए जाने वाले कुछ ईश्‍वर और प्रभु हैं (और ऐसा है भी)

प्रे.काम 14:15

15 तुम्हारी तरह हम भी इन्सान ही हैं और तुम्हें यह संदेश देते हैं, कि तुम बेकार की बातों से हट जाओ।

साथ ही जीवित परमेश्‍वर की तरफ़ मुड़ जाओ, जिन्होंने स्वर्ग (आसमान), ज़मीन, समुन्दर और जो कुछ उसमें है, उसे बनाया है।”

मत्ती 4:10

10 तब यीशु ने उससे कहा, “भाग यहाँ से शैतान, क्योंकि लिखा है, कि तुम अपने प्रभु परमेश्‍वर को दण्डवत् करो और उन्हीं की सेवा और उपासना करो।”

1 कुरिन्थ. 10:21

21 तुम दुष्टात्माओं के प्याले और प्रभु के प्याले में हिस्सेदार (सहभागी) नहीं हो सकते। तुम प्रभु की मेज़ और दुष्टात्माओं की मेज़ में भागीदार नहीं हो सकते।

1 यूहन्ना 5:21

21 छोटे बच्चो, अपने आप को मूरतों से बचाओ। ऐसा ही हो।

1 कुरिंथियों 10:14

14 इसलिए प्यारे दोस्तो, मूर्तिपूजा से दूर भागो।

व्यवस्थाविवरण 4:25, 26

25 जब तुम्हारे बच्चे और नाती-पोते होंगे और तुम्हें उस देश में रहते बहुत समय बीत जाएगा, तब अगर तुम दुष्ट काम करोगे और किसी तरह की मूरत तराशोगे

और इस तरह अपने परमेश्‍वर यहोवा की नज़र में बुरा काम करके उसका गुस्सा भड़काओगे,

26तो यह तय है कि तुम उस देश से फौरन मिट जाओगे जिसे तुम यरदन पार करके अपने अधिकार में करनेवाले हो।

आज मैं आकाश और धरती को गवाह ठहराकर तुमसे यह बात कह रहा हूँ। तुम उस देश में ज़्यादा दिन नहीं रह पाओगे बल्कि पूरी तरह तबाह हो जाओगे।

2 कुरिंथियों 6:17

17 “यहोवा कहता है, ‘इसलिए उनमें से बाहर निकल आओ और खुद को उनसे अलग करो और अशुद्ध चीज़ को छूना बंद करो, तब मैं तुम्हें अपने पास ले लूँगा।’”

दानियेल 3:16-18

16 शदरक, मेशक और अबेदनगो ने राजा से कहा, “हे राजा नबूकदनेस्सर, हमें इस बारे में कुछ और नहीं कहना।  17 अगर हमें आग के भट्ठे में फेंक दिया जाना है, तो यही सही।

हमारा परमेश्‍वर, जिसकी हम सेवा करते हैं, हमें उस भट्ठे से और तेरे हाथ से छुड़ाने की ताकत रखता है।  18 लेकिन अगर वह हमें नहीं छुड़ाता, तो भी हे राजा, हम न तेरे देवताओं की सेवा करेंगे, न ही तेरी खड़ी करायी मूरत की पूजा करेंगे।”

दानियेल 3:4-6

4 तब संदेश ऐलान करनेवाले ने ज़ोर-ज़ोर से ऐलान किया, “अलग-अलग राष्ट्रों और भाषाओं के लोगो, सुनो। तुम सबको यह हुक्म दिया जाता है

5  कि जब तुम नरसिंगे, बाँसुरी, सुरमंडल, छोटे सुरमंडल, तारोंवाले बाजे, मशकबीन और बाकी सभी साज़ों की आवाज़ सुनोगे,

तो तुम सब गिरकर सोने की उस मूरत की पूजा करोगे जो राजा नबूकदनेस्सर ने खड़ी करायी है। 6 जो कोई गिरकर उसकी पूजा नहीं करेगा, उसे फौरन धधकते भट्ठे में फेंक दिया जाएगा।”

निर्गमन 20:5

5तुम उनके आगे दंडवत न करना और न ही उनकी पूजा करने के लिए बहक जाना, क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा माँग करता हूँ कि सिर्फ मेरी भक्‍ति की जाए, मुझे छोड़ किसी और की नहीं।

जो मुझसे नफरत करते हैं उनके गुनाह की सज़ा मैं उनके बेटों, पोतों और परपोतों को भी देता हूँ।

प्रेरीतों 5:29

29 तब पतरस और दूसरे प्रेरीतों ने कहा, “इंसानों के बजाय परमेश्‍वर को अपना राजा जानकर उसकी आज्ञा मानना ही हमारा फर्ज़ है।

भजन 115:4-8

4 उनकी मूरतें सोने-चाँदी की बनी हैं, इंसान के हाथ की कारीगरी हैं। 5 उनका मुँह तो है पर वे बोल नहीं सकतीं, आँखें हैं पर देख नहीं सकतीं,

6 कान हैं पर सुन नहीं सकतीं, नाक है पर सूँघ नहीं सकतीं, 7 हाथ हैं पर छू नहीं सकतीं, पैर हैं पर चल नहीं सकतीं, उनके गले से कोई आवाज़ नहीं निकलती।

8 उनके बनानेवाले और उन पर भरोसा रखनेवाले, दोनों उनकी तरह हो जाएँगे।

यशायाह 46:6

6 ऐसे लोग हैं जो थैली से सोना निकाल-निकालकर देते हैं और तराज़ू पर चाँदी तौलते हैं। वे सुनार को काम पर लगाते हैं और सुनार उससे देवता की एक मूरत बनाता है,

फिर वे उस मूरत के आगे दंडवत करते हैं, उसकी पूजा करते हैं।

प्रेरीतों 17:29

29 हम परमेश्‍वर के बच्चे हैं इसलिए हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि परमेश्‍वर सोने या चाँदी या पत्थर जैसा है, या इंसान की कल्पना और कला से गढ़ी गयी किसी चीज़ जैसा है।

व्यवस्थाविवरण 5:8

8 तुम अपने लिए कोई मूरत न तराशना। ऊपर आसमान में, नीचे ज़मीन पर और पानी में जो कुछ है, उनमें से किसी के भी आकार की कोई चीज़ न बनाना।

यशायाह 37:19

19 उनके देवताओं को आग में झोंक दिया। मगर वे उन देवताओं को इसलिए नाश कर पाए क्योंकि वे देवता नहीं, बस इंसानों की कारीगरी थे, पत्थर और लकड़ी थे।

यशायाह 40:18-20

18 तुम परमेश्‍वर की तुलना किससे करोगे? ऐसी कौन-सी चीज़ है जो दिखने में उसके जैसी है? 19 कारीगर एक मूरत ढालता है और सुनार उसे सोने से मढ़ता है, उसके लिए चाँदी की ज़ंजीरें बनाता है।

20 या एक आदमी चढ़ावे के लिए ऐसा पेड़ चुनता है जिसमें कीड़े न लगें। फिर वह जाकर एक कुशल कारीगर को ढूँढ़ लाता है कि वह ऐसी मूरत बनाए जो मज़बूती से खड़ी रह सके।

यशायाह 46:5

5 तुम किससे मेरी तुलना करोगे या किसे मेरे बराबर ठहराओगे ? किसके बारे में कहोगे कि वह मेरे जैसा है?

कुलुस्सि. 3:5

5 इसलिए इस पृथ्वी पर जो तुम्हारी शारीरिक लालसाएँ हैं, जैसे यौन कामुकता, अशुद्धता, बुरी लालसा और लालच (जो मूर्तिपूजा है), इन सब को मार डालो।

इफिसि. 5:5

5 पर तुम यह जानते हो कि यौन अपराध में लिप्त व्यक्‍ति, अशुद्ध व्यक्‍ति और लालची इन्सान की (क्योंकि ऐसे लोग मूर्तिपूजक हैं), मसीह और परमेश्‍वर के राज्य में कोई हिस्सेदारी नहीं है।

लैव्यव्यवस्था 26:1

1 तुम अपने लिए निकम्मे देवता न बनाना, न ही पूजा के लिए मूरत तराशना या पूजा-स्तंभ खड़े करना।

और अपने देश में कोई नक्काशीदार पत्थर खड़ा करके उसके आगे दंडवत न करना, क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा हूँ।

भजन 96:5

5 देश-देश के लोगों के सभी देवता निकम्मे हैं, मगर यहोवा ने ही आकाश बनाया।

हबक्कूक 2:18

18 मूरत बनानेवाले को उस मूरत से क्या फायदा, जिसे उसने खुद बनाया है ?

वह बस एक ढली हुई मूरत है और झूठ सिखाती है, फिर भी उसका बनानेवाला उस पर भरोसा करता है, बेज़ुबान और निकम्मी मूरतें बनाता जाता है।

गलाति. 5:19-21

19 पुराने स्वभाव के कार्य ये सब हैं, व्यभिचार, लुचपन, अशुद्धता, दुष्टता, 20 मूर्तिपूजा, जादू-टोना, नफ़रत, झगड़े, गलत शिक्षाएँ, ईर्ष्या , क्रोध, हत्या, मतवालापन,

21 डाह, लीला-क्रीड़ा और इस तरह के अनेकों काम हैं, जिनके बारे में मैं पहले से बता चुका हूँ। ऐसा करने वाले लोग परमेश्‍वर के राज्य के हिस्सेदार (वारिस) नहीं हो पायेंगे।

निर्गमन 20:3-6

3 मेरे सिवा तुम्हारा कोई और ईश्‍वर न हो। 4 तुम अपने लिए कोई मूरत न तराशना। ऊपर आसमान में, नीचे ज़मीन पर और पानी में जो कुछ है, उनमें से किसी के भी आकार की कोई चीज़ न बनाना।

5 तुम उनके आगे दंडवत न करना और न ही उनकी पूजा करने के लिए बहक जाना, क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा माँग करता हूँ कि सिर्फ मेरी भक्‍ति की जाए, मुझे छोड़ किसी और की नहीं।

जो मुझसे नफरत करते हैं उनके गुनाह की सज़ा मैं उनके बेटों, पोतों और परपोतों को भी देता हूँ।  6 मगर जो मुझसे प्यार करते हैं और मेरी आज्ञाएँ मानते हैं, उनकी हज़ारों पीढ़ियों से मैं प्यार करता हूँ।

निर्गमन 23:24

24 तुम उनके देवताओं के आगे झुककर उन्हें दंडवत मत करना और उनकी पूजा करने के लिए बहक मत जाना। तुम वहाँ के लोगों के तौर-तरीके मत अपनाना।

इसके बजाय, तुम उनकी मूरतें ढा देना और उनके पूजा-स्तंभ चूर-चूर कर देना।

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |
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