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Blaming Others, Dushro per dosh lagana

Table of Contents

उत्पत्ति 3:12 ,13 👇

(12)आदमी ने कहा, तूने यह जो औरत मुझे दी है,

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इसी ने मुझे उस पेड़ का फल दिया और मैंने खाया।”

(13) तब यहोवा परमेश्‍वर ने औरत से कहा, यह तूने क्या किया?” औरत ने जवाब दिया, “साँप ने मुझे बहका दिया इसीलिए मैंने खाया।”

० पहले आदमी और औरत ने भी परमेश्वर पिता पर दोष लगाया था ।  झूठ (असत्य) और गुस्सा दो ऐसी चीजें है, जिनसे मसीही शैतान को मौका देते है कि वह उनके जीवन में उत्पात मचाए।

शैतान इसी की तलाश में भी रहता है। शैतान का यह उद्देश्य है कि वह विश्‍वासियों के जीवन को बर्बाद कर डाले, कलीसियाओं को उजाड़े और मसीह का अपमान हो।

यह सब कुछ करने के लिए उसके पास योजनाएँ थीं। वह मसीह के लोगों को अपराध करने के लिए उकसाता है।

इस प्रकार से करता है कि वे क्षमा प्राप्त करने की लालसा में तड़पते रहें। वह कोशिश करता है कि उनके पश्चाताप किए बिना, कलीसिया उन्हें स्वीकार  कर ले।

किसी एक या अधिक सदस्यों के द्वारा वह चर्च की शान्ति और व्यवस्था को भंग करने का प्रयास करता है।

वह यह कोशिश करता है कि कलीसियाई अगुवे गुनाह को हल्का फुल्का समझें या गुनाह करने वालों के साथ कठोरता से व्यवहार करें।

शैतान परमेश्‍वर के राज्य को बर्बाद करना चाहता है। दूसरों को बुराई करने का परीक्षा देकर वह यह करना चाहता है।

यीशु के परीक्षा के ज़रिये हम सीख सकते हैं कि यीशु या शैतान क्या और कैसे हैं और हम परीक्षा पर जीत कैसे पाएँगे।

  • ० दूसरे लोगों को मापना यह दिखाता है कि उन्हें गलत और सही का ज्ञान है। यह कौन नहीं करता है? किन्तु दूसरों में यदि कुछ बुरा है, तो हमारे में भी बुरा है।

दूसरों पर दोष लगाने से हम स्वयं भी दोषी कहलाते हैं ; क्यों की हमे दोषी कहलाने वाला परमेश्वर खुद है । दोष लगाने वाले का परमेश्वर ईमानदारी से न्याय करेंगे ।

यह मनुष्यों के गुप्त गुनाहों का न्याय भी होगा । यह मसीह यीशु के द्वारा  किया जाएगा ! दूसरों की माप तौल करने वाले लोग सोच सकते हैं कि वे जिनमें गलतीयां ढूँढते हैं, उन से अच्छे हैं।

वे दूसरों को परखने के योग्य हैं। उनका विचार झूठा और खतरनाक है। संसार के न्यायी के सामने सभी लोगों को खड़ा होना है- यीशु का जी उठना यह साबित करता है कि यीशु‍ दुनिया का इन्साफ़ करेंगे।

सदोम अमोरा के दण्ड से ज़्यादा दण्ड उन लोगों पर होगा क्यों कि उन्हें ज़्यादा सफ़ाई से खरी सच्चाई सुनायी गयी। अगर ज़्यादा अच्छे अवसरों को ठुकराया गया है तो ज़्यादा सज़ा भी मिलेगी।

👉[मत्ती 10:15 मैं तुम से सच कहता हूँ कि इन्साफ़ के दिन✽ सदोम और अमोरा की हालत उस शहर से ज़्यादा सहने के लायक होगी। ] आपको समझना होगा आपके लिए दण्ड सही है या अनन्त जीवन ।
  • ० यीशु के लिए आज्ञाकारिता ही मायने रखती थी। इस से हटकर कुछ भी क्यों न हो, इसे उन्हों ने ठुकरा दिया। वह हमारे लिए इस में एक आदर्श हैं।

यह सच्चाई कि यीशु ने दूसरों से आराधना ली और स्वर्गदूतों को हुकुम दिया गया कि वे यीशु को दण्डवत् करे, साफ़ दिखाती है कि यीशु परमेश्‍वर थे जो देह में आए ।

जहां तक विश्वासियों का झुंड इकठ्ठा होती है वहां यीशु को छोड़ किसी भी तरह की बातें नहीं होनी चाहिए क्यों की प्रभु यीशु ने खुद कहा है जहां मेरे नाम से दो या तीन बाते करते हैं में खुद आजाता हूं !

ठीक उसी तरह आप यीशु के बारे मैं बाते नहीं करते तो  किसी व्यक्ति के बारे में निंदा  भी करते हैं तो वहां शैतान जरूर आजता है ।

जो व्यक्ति लगातार अपराध करने में लगा रहता है वोही उसका परमेश्वर हो जाता है ! अपराध में पड़े रहना शैतान का उपासना करना होता है ;  तो भायाे और बहनों आपको चुनाव करना है आप किसकी उपासना करोगे  और किसकी नहीं । यीशु को या शैतान ये आगे आपकी मर्जी ।

मनुष्य के स्वभाव ही बताते हैं कि कौन कैसा है : 👇

  • रोज़मर्रा के ज़िन्दगी में पवित्र  आत्मा के दिखाए गए मार्ग पर जीवन जीना चाहिए । पवित्र आत्मा को झूठ बोलने वाले , झगड़ा करने वाले , निन्दा करने वाले और ईर्ष्या जिसे जलन भी कहते हैँ ;

उन व्यक्तियों से पवित्र आत्मा सोकित हो जाते हैं । इस कारण हमे पवित्र आत्मा को ध्यान में रखते हुए बातचीत करनी चाहिए ! हमारे इस हरकत से प्रभु नाराज़ हो जाते हैं !

मसीह  यीशु  ने अपने  पृथ्वी के जीवन  काल में किसी की निंदायें नहीं की और ना ही पवित्र आत्मा को सोकित किया था !

मस्सी यीशु परमेश्वर होने के बावजूद भी ऐसा नहीं करते  थे तो हमे कितनी सतर्कता बरतनी चाहिए । जब की यीशु इंसान के रूप में आए और हमे जीवन जीने का तरीका बताया करते थे पवित्र वचन दिया ;

फिर भी आज के विश्वासी  लोग  वोही गलती दोहोराते हैं और उन्हें पता भी नहीं चल पता कि वो पाप में पड़ चुके हैं  ।

हर व्यक्ति अपनी गलतीयों को नजरअंदाज करता हैं  और इसी तरह अपनी गलती उनके ध्यान में नहीं आपाता  !

प्रभु यीशु ने कहा था सबसे पहले अपनी मन की रक्षा कर इसका क्या मतलब आता है इसका मतलब आता है ,

हर इंसान अपना चेहरा दर्पण में देखा करे जो उसे साफ दिखने लगेगा और वह व्यक्ति जान सकेगा कि उसके मन के चेहरे में केसे दाग धबबों से भरा हुआ है !

तो मेरे प्यारे भायों बहनों  हमे मस्सी यीशु को अपना नमूना बनाने की जरूरत है !

  • जब तक हमारे पास कड़ा बुराई करने वाला मन होगा हम दूसरों की मदद न कर सकेंगे। हमारे इस रवैये का मतलब होगा हमारे खुद को ऊँचां समझने का ख्याल हमें अन्धा बना देता है।

ऐसे लोगों को यीशु “कपटी” कहते हैं क्योंकि जो दूसरों को नापते-जोखते हैं वे खुद दोषी हैं ।

हमे हर समय हमारे  रवैये को परखने की जरूरत है क्योंकि ये जरूरी नहीं कि हम जो आज अच्छा व्यवहार करते हैं वो कल भी वैसा ही होगा ।

क्यों कि शैतान द्वारा हमारा पुराने स्वभाव का परीक्षा होता है ; इंसान का शत्रु शैतान और वो खुद इंसान होता है जो बार बार अपराध करने में चुकता नहीं ।

  • जिस तरह से अपने आपका मूल्यांकन करना चाहिए, वे नहीं करते हैं। परमेश्‍वर ने हमें इस दुनिया में इसलिए नहीं रखा है कि हम उनका इन्साफ़ करने वाले बनें।

हम दोष लगाने से केसे बचे : 👇

  • हर एक शिष्य को चाहिए कि वह दूसरों को अपने से अच्छा समझें – अगर हम ऐसा करते हैं तो हम दूसरों पर दोष नहीं लगाएँगे। हमे नरंतर बाईबल अध्ययन करनी चाहिए ।

जिससे हमें सही और गलत का पता चलसके । “ निंदा करना  “अपराध” है  , मेरे भायों और  बहनों हर एक व्यक्ति जो दूसरे व्यक्ति की निंदा करता है वह अपराधि केहलाता है

जो दोष लगाते हैं वे परमेश्वर का नाम खराब करते हैं  जो इंसान को निंदा करता हैं वे यहोवा का निंदा करता है ।” दोषी ठहराना पवित्र आत्मा का काम है “,

न्याय करना परमेश्वर  का काम है और प्यार करना  मेरा काम है।” जब एक बहादुर आदमी  उठ खड़ा  होता है दूसरों की रीढ़ हड्डी टूट  जाती है। “ यहां परमेश्वर जब न्याय करने को खडे हो जाते हैं अच्छे अछों पहलवानो की हड्डी  टूटनी शुरू हो जाती है ।

मान लीजिए परमेश्वर पिता की दृष्टि आप पर पड़ती है और वो आपको दूर से देखता है , आप दोष लगाते ,लगाते पहलवान बन चुके हो

तब वो सोचता होगा अब समय आगया है उस पहलवान की हड्डी को तोडा जाए , मेरा कहने का मतलब ये है कि परमेश्वर ताकतवरों को कमजोर बनाता है ।

👉नीतिवचन 25:23: “उत्तर की हवा आगे बारिश लाती है, और एक भद्दी जीभ, गुस्सा दिखता है।”

  • गपशप एक गुप्त लालसा की तरह है। हम कहते हैं कि हम इसे पसंद नहीं करते हैं, लेकिन जब यह पहुंच के भीतर होता है, तो हम इसका विरोध नहीं कर सकते।

हमें यह जानने के लिए अचानक भूख लगती है कि हम क्या जानते हैं … किसी और के बारे में । इसे रोकना इतना कठिन क्यों है?

👉 नीतिवचन 18: 8 कहता है, ” गपशप सुनने से  एक हिस्सा बन जाता है  और जो लोग इसे सुनते हैं और विश्वास करते हैं। मैं केवल मनोरंजन के लिए किसी व्यक्ति के जीवन के बारे में गंदे वर्णन  नहीं कर सकता । लेकिन गपशप कई स्वादों में आती है, और इसमें सुनना भी शामिल है।

गपशप करना बुरी आदत है किसी की बदनामी करना भी कहा जाता  है :👇

  • यह अफवाह फैलाने के रूप में परिभाषित किया गया है या किसी व्यक्ति के बारे में जानबूझकर नुकसान का कारण हम बन जाते  है। इसका लेखक हम खुद होते हैं ।

क्यों कि ये हमारे अंदर से निकलते हैं ।

  • बाइबल केेहती है अनगिनत बार बदनामी का  ज़िक्र करती है: “लेकिन अब आपको अपने आप को इन सभी चीजों से छुटकारा पाना चाहिए:

क्रोध,  नफ़रत , निंदा और गंदी भाषा अपने होठों से दूर रखे ”

👉 (कुलुस्सियों 3: 8)। हमारा पुराना जीने का तरीका मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया है और विश्‍वासियों ने इसे उतार दिया है

👉 (कुल. 3:9) । पौलुस क्यों कहता है कि वे उसे उतार दें? इसलिए कि सोचने और करने के पुराने तरीके हम से चिपके रहना चाहता है और हमें उन्हें ठीक करना चाहिए। कुड़कुड़ाना दूसरों पर आरोप लगाने की तरह है और हमारा यह काम नहीं है।

👉याकूब 4:11 इसे सीधे कहता है: “भाइयों, एक दूसरे की निंदा मत करो।”

👉नीतिवचन 20:19 हमें बताता है कि एक गपशप विश्वास को धोखा देती है; इसलिए ऐसे आदमी से बचें जो बहुत ज्यादा बातचीत करता हो।

  • “नकारात्मक लोगों को अपनी खास समय मत दीजिए ! फालतु के गपशप  करने से खुद को बचाए रखे क्यों कि इजिसे निंदाए करना सुरु होती ।

गपशप करने से आपके आत्मिक जीवन के साथ-साथ आपके बाहरी जीवन में भी परेशानीयां  आसकती है।

गपशप करना हमारे जीवन में साधारण बात हो चुकी है और लोगों की बुरी आदतें बन चुकी है । “मुझे नहीं पता  कि आपको कैसे कहूं , मस्सी भायो बहनों  हमारा सबसे बड़ा पाप में से यह है कि हम एक मजबूर गपशप करने वाले व्यक्ति हैं ” यह  किस्सा मानव स्वभाव के दलदल दिल पर हावी होना सुरु हो जाती है ।

हम में से अधिकांश, अगर  खुद के साथ ईमानदार हो जाएं तो हम स्वीकार करेंगे कि हम गपशप रास्तों के दोनों किनारों पर खडे हैं। देखा जाए तो यीशु और शैतान दोनो के रास्तों के बीचों बीच खडे हैं !

  • बाइबल बताती है कि हम जो बोते हैं वही काटते हैं। जीभ जो स्वाभाविक रीति से अनियन्‍त्रित है उसके बारे में याकूब कह रहा है।

जीभ से  मतलब बोलने की योग्यता या जो मन और दिमाग में है, उसको कहना। जीभ बड़ी बर्बादी का कारण हो सकती है ।

इसकी एक चिंगारी से बड़ी आग लगने के कारण बहुत कुछ बर्बाद हो जाती है। जीभ अपने आप में पूरी दुनिया है। स्वभाव से यह संसार बुरा है -अभिलाषा और बुराई की वजह से आग लगी हुयी है। यह आग नरक से आयी हुयी है। शैतान ने लोगों को सिखाया है कि झूठ बोलें, धोखा दें बुरा कहें। गपशप करना बुराइयों में से एक है ।

एक गपशप करने वाले ने रहस्यों का खुलासा किया, लेकिन वह जो भरोसेमंद है वह एक मामले को छुपा लेता है।

इसलिए जो कुछ तुम ने अन्धेरे में कहा है, वह उजियाले में सुना जाएगा, और जो तुम ने अन्दर के कमरे में फ़ुसफ़ुसाया है , वह छत पर से कहा जाएगा।

अफवाहें : 👇

  • आप कुछ सुनते हैं, और यह अच्छा नहीं है, और यह भी सच नहीं है। लेकिन आप किसी को बताते हैं या किसी और से इसके बारे में अधिक जानकारी लेते हैं।

अफवाह बन जाते हैं और  गपशप फैल जाती है।👉 नीतिवचन 13: 3 कहता है, “जो अपने होठों की रखवाली करता है, वह अपने जीवन की रक्षा करता है, लेकिन जो क्रोध से बोलता है, वह बर्बाद हो जाएगा।”

  • परमेश्वर के लोगों के मार्गदर्शक के रूप में, दाऊद का मानना ​​था कि एक सनकी या अभिमानी व्यक्ति को परमेश्वर के काम में कोई स्थान मिलनी नहीं  चाहिए ।
  • लोग इस तरह से बहाना कर सकते थे कि उन्हें जानकारी या ज्ञान नहीं था। लेकिन यह उन्हें मालूम हो चुका है कि सही क्या है, इसलिए बहाना बनाने से काम नहीं चलेगा। यह ध्यान दें कि सही काम जिसे किया जाना चाहिए, यदि हम नहीं करते हैं, अपराध है, जिस तरह बुरा करना अपराध है।

नीतिवचन 12:19👇

(19)सच बोलनेवाले होंठ हमेशा कायम रहेंगे, मगर झूठ बोलनेवाली जीभ पल-भर की होती है।

नीतिवचन 15:4👇

(4)शांति देनेवाली ज़बान जीवन का पेड़ है, मगर टेढ़ी बातें मन को कुचल देती हैं।

1 पतरस 2:1👇

(2)इसलिए हर तरह की बुराई, छल, कपट, ईर्ष्या, पीठ पीछे बदनाम करना, यह सब खुद से दूर करो।

याकूब 3:8👇

(8) मगर जीभ को कोई भी इंसान काबू में नहीं कर सकता। यह ऐसी खतरनाक और बेकाबू चीज़ है जो जानलेवा ज़हर से भरी है।

भजन 41:7👇

(7) मुझसे नफरत करनेवाले सभी आपस में फुसफुसाते हैं, मेरे खिलाफ साज़िश रचते हैं।

भजन 141: 3👇

(3) हे यहोवा, मेरे मुँह पर एक पहरेदार ठहरा, मेरे होंठों के द्वार पर पहरा बिठा।

नीतिवचन 13:3👇

(3)जो ज़बान पर काबू रखता है वह अपनी जान बचाता है, मगर जो अपना मुँह बंद नहीं रखता वह खुद को बरबाद करता है।

नीतिवचन 21:23👇

(23)जो अपने मुँह और ज़बान पर काबू रखता है, वह खुद को मुसीबत से बचाता है।

याकूब 1:26👇

(26)अगर कोई आदमी खुद को परमेश्‍वर की उपासना करनेवाला समझता है मगर अपनी ज़बान पर कसकर लगाम नहीं लगाता, तो वह अपने दिल को धोखा देता है और उसका उपासना करना बेकार है।

1 तीमुथियुस 5:11-13👇

(11) दूसरी तरफ, जवान विधवाओं का नाम सूची में मत लिख क्योंकि जब उनकी यौन-इच्छाएँ मसीह की सेवा में उनके लिए रुकावट बन जाती हैं, तो वे शादी करना चाहती हैं।

(12) वे दोषी ठहरेंगी क्योंकि उन्होंने पहले जो विश्‍वास ज़ाहिर किया था अब वे उसके खिलाफ जाती हैं।

(13) साथ ही उन्हें खाली रहने और घर-घर घूमने की आदत पड़ जाती है। हाँ, वे न सिर्फ खाली रहती हैं बल्कि उन्हें गप्पे लड़ाने की आदत पड़ जाती है और वे दूसरों के मामलों में दखल देती रहती हैं। वे ऐसी बातों के बारे में बोलती हैं जो उन्हें नहीं बोलनी चाहिए।

लूका 12: 3 👇

(3) इसलिए जो कुछ तुम अँधेरे में कहते हो वह उजाले में सुना जाएगा और जो तुम अंदर के कमरों में फुसफुसाकर कहते हो उसका घर की छतों पर चढ़कर ऐलान किया जाएगा।

याकूब 3: 5 👇

(5)जीभ हालांकि छोटा सा अंग है, लेकिन बहुत बड़ी बर्बादी ला सकती है। एक छोटी सी चिंगारी पूरे जंगल को जला सकती है।

(6) जीभ आग की एक लपट है। यह दुष्टता से भरी है जो तुम्हारे पूरे जीवन की नाश कर सकती है। यह तुम्हारे जीवन को पूरी दिशा को बर्बादी की धधकती लपटों में बदल सकती है, क्योंकि वह खुद नरक से सुलगायी जाती है।

रोमि 12:2 👇

इस दुनिया के समान मत बनो, लेकिन तुम्हारे मन के बदले जाने के कारण खुद बदलते जाओ, ताकि तुम परमेश्‍वर की सही, अच्छी और अपनाने लायक इच्छा की पुष्टि कर सको।

मत्ती 7:3-5👇

(3)  तुम अपने भाई की आँख के तिनके को क्यों देखते हो और अपनी आँख का लट्ठा तुम्हें महसूस नहीं होता?

(4) जब तुम्हारी ही आँख में लट्ठा हो, तो तुम अपने भाई से कैसे कह सकते हो कि लाओ, मैं तुम्हारी आँख से तिनका निकाल दूँ।

(5) हे ढोंगी, पहले अपनी आँख में से लट्ठा निकाल लो, तब तुम अपने भाई की आँख का तिनका अच्छी तरह देखकर निकाल सकोगे।

रोमियों 2:1-3👇

(1) इसलिए हे लोगो, तुम जो दूसरों पर टीका-टिप्पणी करते हो, तुम कोई बहाना नहीं बना सकते। क्योंकि जिस मुद्दे पर तुम लोगों की बुराई करते हो, तुम खुद वही करते हो।

(2) लेकिन हम यह जानते हैं जो लोग ऐसा करते हैं, उनके खिलाफ़ में परमेश्‍वर का इन्साफ़ सच्चाई के अनुसार है।

(3)हे मनुष्यो, तुम उन सभी की बुराई करते हो, जो ऐसे काम करते हैं, लेकिन वही काम खुद करते हो तो क्या सोचते हो कि परमेश्‍वर की सज़ा से बच जाओगे?

फ़िलिप्पियों 2:3👇

(3) अपने नाम के लिए या स्वार्थ की भावना से कुछ न किया जाए, लेकिन मन की दीनता से हर एक दूसरों को अपने से अच्छा (उत्तम) समझे।

2 कुरिंथियों 11:3👇

(3)मगर मुझे डर है कि जैसे साँप ने चालाकी से हव्वा को बहका लिया था, वैसे ही तुम्हारी सोच न बिगड़ जाए और तुम्हारी सीधाई और पवित्रता भ्रष्ट न हो जाए जिसे पाने का हकदार मसीह है।

1 तीमुथियुस 2:14👇

(14)और आदम बहकाया नहीं गया था, बल्कि औरत पूरी तरह से बहकावे में आ गयी और गुनहगार बन गयी।

याकूब 3:10,11.👇

(10 )“एक ही मुंह से धन्यवाद और स्राप दोनों निकलते हैं। हे मेरे भाज़्यइयो, ऐसा नहीं होना चाहिए।”

नीतिवचन 12:18👇

(18) बिना सोचे-समझे बोलना, तलवार से वार करना है, लेकिन बुद्धिमान की बातें मरहम का काम* करती हैं।

कुलुस्सियों 3:8👇

(8) मगर अब तुम इन सब बातों को खुद से पूरी तरह दूर करो, जैसे क्रोध, गुस्सा, बुराई,+ गाली-गलौज+ और मुँह से अश्‍लील बातें+ कहना।

1 कुरिन्थ. 2:15👇

(15)आत्मिक जन हर बात की पहचान रखता है, लेकिन उसे लोग समझ नहीं पाते हैं।

याकूब 4:17👇

(17) इसलिए जो भलाई करना जानता है, लेकिन करता नहीं, यह गुनाह है।

1 तीमुथियुस 5:1, 2👇

(1)किसी बुज़ुर्ग आदमी को सख्ती से मत डाँट। इसके बजाय, उसे अपना पिता जानकर प्यार से समझा, जवानों को भाई,  (2)बुज़ुर्ग औरतों को माँ और कम उम्र की औरतों को बहनें जानकर पूरी पवित्रता के साथ समझा।

गलाति 6: 1-10👇

(1) भाइयो-बहनो, कोई भी व्यक्‍ति अपराध में गिर सकता है। तुम आत्मिक लोगों को चाहिए कि तुम भी सतर्क रहो, ताकि अपराध में न गिरो। अपराध में फँस जाने वाले व्यक्‍ति को नम्रता से समझाओ।

(2) एक दूसरे का बोझ उठा कर मसीह का नियम पूरा करो।

3 यदि कोई व्यक्‍ति यह सोचे कि वह कुछ है, जब कि कुछ नहीं है, तो वह स्वयं को धोखा देता है।

(4) प्रत्येक व्यक्‍ति अपने काम को जाँचे और कर के दिखाए, तब उसे किसी दूसरे के काम में नहीं लेकिन अपने काम में खुश होने का मौका मिलेगा।

(5 ) क्योंकि हर एक को अपनी ज़िम्मेदारी खुद पूरी करनी है। (6) जो दूसरों से वचन की शिक्षा पाता है वह सभी अच्छी वस्तुओं को उनके साथ बाँटे।

(7)  धोखे में मत रहना, परमेश्‍वर को मज़ाक में नहीं लिया जा सकता, मनुष्य जो कुछ भी बोता है, वही काटेगा भी।

( 8 )जो अपने मन के अनुसार जियेगा, वह बर्बादी की फ़सल काटेगा। जो पवित्रात्मा के मार्गदर्शन में चलेगा, वह पवित्र आत्मा से अनन्तकालिक फ़सल (सदाकाल का जीवन) पाएगा।

(9) भलाई करने में हम थक न जाएँ, क्योंकि यदि हम हिम्मत न हारें, तो निश्चित समय पर फ़सल देखेंगे।

(10)  इसलिए जब हमें अवसर मिलता है, सब के साथ भला व्यवहार करें, विशेषकर उनके साथ जो विश्‍वास के घराने के हैं।

मत्ती 25:41-46👇

(41) तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, ‘हे स्त्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ , जो शैतान और उसके दूतों के लिए तैयार की गई है।

(42 ) क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया। मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी नहीं पिलाया।

(43) मैं विदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नहीं ठहराया। मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपड़े नहीं पहनाए, बीमार और जेल में था, और तुम ने मेरे ऊपर ध्यान न दिया।’

(44) तब वे उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने आपको कब भूखा, प्यासा या परदेशी या नंगा या बीमार या जेल में देखा, और आपकी सेवा टहल न की?

(45) तब वह उन्हें उत्तर देंगे, ‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि तुम ने जो उन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया।’

(46)ऐसे लोग अनन्त दण्ड भोगेंगे, परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेश करेंगे।”

तीतुस 2:1-5👇

(1) परन्तु जो बातें सही शिक्षा के अनुसार हैं, तुम उन्हीं को कहा करो।

(2) बुज़ुर्ग लोगों को गंभीर, आदरणीय, संयमी, विश्‍वास, प्रेम और धीरज में मज़बूत होना चाहिए।

3 उसी तरह बुज़ुर्ग महिलाएँ भी व्यवहार में आदरणीय, बदनामी न करने वाली, शराब से परे रहने वाली और अच्छी बातें सिखाने वाली हों

(4) ताकि वे जवान महिलाओं को सिखाएँ कि वे पतियों और बच्चों से प्रेम करने वाली हों।

(5) संयमी, पवित्र घर का देखभाल करने वाली, भली और पति की आज्ञा मानने वाली बनें, ताकि प्रभु के संदेश की बदनामी न हो।

भजन 37:27👇

(27) तू बुराई छोड़ दे और भले काम कर, तब तू सदा बना रहेगा।

भजन 97:10👇

(10)यहोवा से प्यार करनेवालो, बुराई से नफरत करो। वह अपने वफादार लोगों की जान की हिफाज़त करता है, उन्हें दुष्टों के हाथ से छुड़ाता है।

आमोस 5:15👇

(15)बुराई से नफरत करो और भलाई से प्यार करो, शहर के फाटक पर न्याय की जीत हो। तब शायद सेनाओं का परमेश्‍वर यहोवा यूसुफ के बचे हुओं पर कृपा करे।’

रोमियों 12:9👇

(9)तुम्हारे प्यार में कपट न हो। बुरी बातों से घिन करो, अच्छी बातों से लिपटे रहो।

मत्ती 15:18👇

(18)मगर जो कुछ मुँह से निकलता है, वह दिल से निकलता है और यही सब एक इंसान को दूषित करता है।

याकूब 3:6👇

(6)जीभ भी एक आग है। यह हमारे शरीर के अंगों में बुराई की एक दुनिया है क्योंकि यह पूरे शरीर को दूषित कर देती है और इंसान की पूरी ज़िंदगी में आग लगा देती है और यह गेहन्‍ना की आग की तरह भस्म कर देती है।

याकूब 3:9-10👇

(9) कभी-कभी यह हमारे प्रभु और पिता की बड़ाई करती है और कभी परमेश्‍वर की समानता में बनाए गए लोगों के खिलाफ़ ज़हर उगलती है। (10) इसलिए आशीष और शाप एक ही मुँह से उमड़ कर बाहर आते हैं। मेरे भाइयो-बहनो, यह बिलकुल सही नहीं है।

उत्पत्ति 1:26, 27👇

(26)फिर परमेश्‍वर ने कहा, “आओ हम इंसान को अपनी छवि में, अपने जैसा बनाएँ। और वे समुंदर की मछलियों, आसमान के पंछियों, पालतू जानवरों और ज़मीन पर रेंगनेवाले सभी जंतुओं पर और सारी धरती पर अधिकार रखें।”

(27) परमेश्‍वर ने अपनी छवि में इंसान की सृष्टि की, हाँ, उसने अपनी ही छवि में इंसान की सृष्टि की। उसने उन्हें नर और नारी बनाया।

इफिसियों 4:29👇

(29)कोई बुरी बात तुम्हारे मुँह से न निकले, मगर सिर्फ अच्छी बात निकले जो ज़रूरत के हिसाब से हिम्मत बँधाए ताकि सुननेवालों को फायदा हो।

भजन 140:3👇

(3)उन्होंने अपनी ज़बान साँप की जीभ जैसी तेज़ कर रखी है, उनके होंठों के पीछे साँपों का ज़हर है।

नीतिवचन 12:18👇

(18) बिना सोचे-समझे बोलना, तलवार से वार करना है, लेकिन बुद्धिमान की बातें मरहम का काम करती हैं।

नीतिवचन 18:7👇

(7)मूर्ख की ज़बान उसे तबाह कर डालती है, उसके होंठ उसकी जान के लिए फंदा बन जाते हैं।

सभोपदेशक 5:2👇

(2)बोलने में जल्दबाज़ी मत कर, न सच्चे परमेश्‍वर के सामने जो मन में आए वह कह दे। क्योंकि सच्चा परमेश्‍वर स्वर्ग में है और तू धरती पर। इसलिए तेरे शब्द थोड़े ही हों।

भजन 39:1👇

(1)मैंने कहा, “मैं बहुत सावधानी बरतूँगा ताकि अपनी जीभ से पाप न कर बैठूँ। जब तक कोई दुष्ट मेरे सामने रहेगा तब तक मैं अपने मुँह पर मुसका बाँधे रहूँगा।”

नीतिवचन 17:27👇

(27)जिसमें सच्चा ज्ञान होता है, वह सँभलकर बोलता है, जिसमें समझ होती है, वह शांत रहता है।

नीतिवचन 21:23👇

(23)जो अपने मुँह और ज़बान पर काबू रखता है, वह खुद को मुसीबत से बचाता है।

याकूब 1:19👇

(19)मेरे प्यारे भाइयो, यह बात जान लो: हर कोई सुनने में फुर्ती करे, बोलने में उतावली न करे और गुस्सा करने में जल्दबाज़ी न करे।

नीतिवचन 10 :18👇

(18) जो नफरत छिपाए रखता है, वह झूठ बोलता है और जो दूसरों को बदनाम करने के लिए बातें फैलाता है, वह मूर्ख है।

नीतिवचन 10 :19👇

(19) जहाँ बहुत बातें होती हैं, वहाँ अपराध भी होता है, लेकिन जो ज़बान पर काबू रखता है, वह सूझ-बूझ से काम लेता है।

लैव्यव्यवस्था 19 :16 👇

(16) तुम किसी के बारे में झूठी बातें फैलाकर उसे अपने लोगों के बीच बदनाम न करना। तुम अपने संगी-साथी की जान के दुश्‍मन न बनना। मैं यहोवा हूँ।

भजन 15:3👇

(3)वह अपनी ज़बान से दूसरों को बदनाम नहीं करता, अपने पड़ोसी का कुछ बुरा नहीं करता, न ही अपने दोस्तों का नाम खराब करता है।

मेरी गलतियां मुझसे कहो दूसरों से नहीं , क्यों कि सुधरना मुझे है दूसरों को नहीं ……..तो मस्सी विश्वासियों किसी की निंदा करने से बेहतर होगा आप उस व्यक्ति के मुंह के सामने बोले क्यों की जो सामने से नहीं बोलता वो हमेशा दूसरों के चुगलियां करता फिरता रहता जाता है ! अपने ज़ीभ का इस्तमाल आत्मिक उन्नति के लिए करो , दूसरों के मामले में दख़ल अंदाजी करने के लिए नहीं !

मेरे भायो बहनों जो आपके पिट पीछे चुगलीयां करते हैं उनसे बुरा मत मानिए क्यों कि जिसमें पवित्र आत्मा के मार्ग दर्शन  नहीं होती ; वे इस तरह के उटपटांग हरकद कर बैठते हैं ! उन पर ध्यान मत दीजिये जो आपके पिट पीछे बात करते हैं , इसका सीधा मतलब आता है आप उनसे दो कदम आत्मिक उन्नति कर रहे होंगे । हमेशा बुराई ढूंढने वाले व्यक्ति उस इंसान की तरह होता है जो शुद्ध और पवित्र जीवन को छोड़ कर गंदगी में रहना पसंद करते हैं !

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |
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