Bible sarkar ke banaye gaye kanun ke vare me kya sikhsya deti he ?

 Bible sarkar ke banaye gaye kanun ke vare me kya sikhsya deti he ?

बाईबल सरकार के बनाए गए कानून के बारे में क्या शिक्षा देती है ?

रोमियों 13:1-5

 

1 प्रत्येक व्यक्ति को सरकार के बनाए हुए कानून को मानना चाहिए। इसलिए कि सब प्रकार का अधिकार परमेश्वर की ओर से है, जो भी अधिकारीगण हैं, उन्हें परमेश्वर पिता ही ने नियुक्त किया है।

2 इसलिए जो कोई अधिकार का विरोध करता है वह परमेश्वर के द्वारा रखे प्रबन्ध का विरोध करता है। जो लोग ऐसा करते हैं, वे सज़ा पाएँगे।

3 क्योंकि अधिकारी लोग अच्छे काम करने वालों को दण्ड नहीं देते हैं, लेकिन बुरा करने वालों को। क्या तुम अधिकारी के डर के बगैर जीवन बिताना चाहते हो?

तो जो कुछ भला है, वह करो और वह तुम्हें शाबाशी देगा।

4 इसलिए कि वह भलाई करने वालों के लिए परमेश्वर की ओर से तुम्हारा सेवक है। यदि तुम बुरा करते हो, तो डरो, क्योंकि उसको सज़ा देने का अधिकार यों ही नहीं मिला है।

वह परमेश्वर पिता का सेवक है ताकि बुरा करने वालों को सज़ा दे।

5 इसलिए अपने विवेक के कारण तुम्हें अधिकारियों की बात माननी चाहिए, न कि सज़ा के डर से।

और किसी न किसी मनुष्य के राज्य में। ये पद बताते हैं कि उनका व्यवहार सरकारी अधिकारियों के लिए कैसा होना चाहिए।

 

 

  • इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी अधिकारी और शासक अच्छे हैं और परमेश्वर की मानते हैं। (इस पत्र के लिखे जाने के समय रोम का शासक नीरो अपने समय का सब से बुरा राजा था)।

सरकार की गलतियों, गुनाहों, असफ़लताओं और भ्रष्टाचार के बजाए वे परमेश्वर की ओर से हैं (भजन 75:2-7; दानि. 4:34-35)।

कभी-कभी परमेश्वर ऐसा होने देते हैं कि दुष्ट शासक, लोगों को सज़ा देने के लिए अधिकार हासिल करें। किन्तु सरकार के न होने के बजाए एक बुरी सरकार तो ठीक है।

टूट जाना – देश की सब से बुरी स्थिति है, क्योंकि तब बुराई को रोकने का कोई साधन नहीं।

 

 

  • यह मसीहियों की ज़िम्मेदारी है कि सरकार की बात मानें, क्योंकि वह परमेश्वर की इच्छा है (पद 2:5, 7)। एक स्थिति को छोड़ कर यह नियम हर हालत में लागू होता है।

यदि एक देश का कानून या एक अधिकारी की आज्ञा बाईबल के खिलाफ़ है, तब विश्वासियों को चाहिए कि वे उसे न मानें। देखिए प्रे.काम 4:18-20; 5:28-29.

 

  • जब तक सरकार का कानून परमेश्वर के वचन के खिलाफ़ न हो👉 (रोमि. 13:1-2) हर बात में सरकार की बात मानी जानी चाहिए। ऐसी हालत में परमेश्वर का हुकुम मानने के नतीजों को सहन करना ज़रूरी है।

इसका अर्थ यह नहीं कि शासक जानबूझकर परमेश्वर की सेवा करते है (हालाँकि कुछ ऐसा कर सकते है)। इस पृथ्वी पर शासन करने के लिए वे परमेश्वर के हाथ में मात्र हथियार हैं।

आपको पता है बहुत से लोग बाईबल में लिखी बातों से जादा अपनी बातों को पहले रखते हैं। यीशु मसीह ने कभी ऐसा नहीं किया क्यों कि उन्हें पता है परमेश्वर पिता ने इन सरकारों को और उनके कानून को ठेहराया है

इसलिए प्रभु यीशु ने पिता कि आज्ञा को पहला स्थान दिया चाहे उनकी जान क्यों न चली गई हो। कुछ भी हो जाए हमें परमेश्वर पिता के नियमों ; योजना उनके कानून के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए।

प्रेरितों के काम 4:18-20

 

18 उन्हों ने पतरस और यूहन्ना को बुलाकर आदेश दिया कि यीशु के सम्बन्ध में न बोलें, न सिखाएँ।

19 लेकिन पतरस और यूहन्ना ने जवाब में यह कहा, “तुम्हीं बताओ, क्या यह सही है कि हम परमेश्वर की बात न मानकर तुम्हारी मानें ?

20 क्योंकि यह हो ही नहीं सकता कि हम ने जो देखा और सुना है, वह सब न बताएँ।”

 

 

  • जिस तरह से एक ज़िन्दा इन्सान साँस लेता है, उसी तरह पवित्र आत्मा से भरा व्यक्‍ति यीशु के लिए बिना बोले रह नहीं सकता। तुलना करें👉 2 कुरि. 5:14.

 

प्रेरितों के काम 5:29

 

29 तब पतरस और दूसरे प्रेरितों ने जवाब में कहा, “ज़रूरी बात (कर्तव्य) यह है कि हम परमेश्वर की बात मानें, न कि इन्सानों की।

 

  • जब लोगों और परमेश्वर की आज्ञा में टकराव है, तो यही एक सिद्धान्त है। आज्ञा मानने का मतलब था सताव, जेल में डाला जाना और आखिर में मौत। इन सब के बावजूद उन्हों ने इस सिद्धान्त को पकड़े रखा।

तीतुस 3:1-2

 

जो लोग शासन करते हैं या अधिकारी हैं, उनके प्रति आज्ञाकारी होने और अच्छे काम करने को तैयार रहने के लिए लोगों से कहो किसी की बुराई न करें, झगड़ालू न हों, लेकिन कोमल स्वभाव रखें और दूसरों के साथ नम्रता से पेश आएँ।

 

1 तीमुथियुस 2:1-3

 

1 अब मैं सब से पहले यह बिनती करता हूँ कि बिनती, प्रार्थना, निवेदन, और धन्यवाद सब मनुष्यों के लिए किए जाएँ।

2 राजाओं (नेताओं), अधिकारियों और सब ऊँचे पद वालों के लिए इसलिए कि हम शान्तिपूर्वक और चैन के साथ सारी भक्ति और परमेश्वर के प्रति भय युक्त आदर के साथ जीवन बिता सकें।

3 यह हमारे मुक्तिदाता परमेश्वर यीशु को अच्छा लगता, और भाता भी है,

 

 

  • पौलुस कहता है कि शासकों की आलोचना नहीं, उनके लिये प्रार्थना करो। वह यह संकेत करता है कि मसीही विश्वासियों की दुआएँ एक देश को प्रभावित कर सकती हैं। यह तब भी सच है जब कि अधिकारी मसीह को मानने वाले नहीं हैं,

यहाँ तक कि विरोधी भी हो सकते हैं। (ऐसा पौलुस के दिनों में हुआ करता था)। शायद कुछ देशों में विश्वासियों के शान्ति से न रहने का कारण यह है कि जैसा करना चाहिए, वे अपने अधिकारियों के लिये प्रार्थना नहीं करते।

 

रोमियों 2:13

 

13 इसलिए कि नियमशास्त्र सुनने वाले धर्मी (सिद्ध) नहीं ठहराए जाएँगे, लेकिन वे जो नियमों के अनुसार जीवन जीते हैं, सिद्ध ठहराए जाएँगे।

 

  • परमेश्वर पिता के वचन को सुनना काफ़ी नहीं था – कर्मों से धर्मी ठहराए जाने के लिए उन्हें उनके अनुसार जीना था। यीशु को छोड़ कर और कोई ऐसा करने में समर्थ नहीं था -रोमियों 3:9, 19, 23; याकूब 2:10; निर्ग. 19:21-25.

 

1 यूहन्ना 3:4

 

जो कोई उचित करने से चूक जाता है, वह व्यवस्था (परमेश्वर के मापदण्ड) को तोड़ता है, क्योंकि चूक जाना (बलवा करना) व्यवस्था के खिलाफ़ जाना है।

 

 

  • परमेश्वरीय इच्छा के खिलाफ़ और गलत सही की शिक्षा के खिलाफ़ जाना गुनाह करना है। यह तो इस तरह है कि परमेश्वरीय नियम आदि हैं नहीं, या सही चालचलन की कोई रूपरेखा ही नहीं है।

यह मनुष्य की स्वार्थी इच्छाओं का जीवन है।

 

यूहन्ना 19:10,11

 

10 पिलातुस ने उसे कहा, “मुझ से क्यों नहीं बोलते? क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हें छोड़ देने का और क्रूस पर चढ़ाने का भी मुझे अधिकार है?” 11 यीशु ने उत्तर दिया, “यदि तुम्हें ऊपर से न दिया जाता,

तो तुम्हारा मुझ पर कुछ अधिकार न होता। इसलिए जिसने मुझे तुम्हारे हाथ पकड़वाया है, उसका अपराध ज़्यादा है।”

 

 

  • यीशु पिलातुस की गलतफ़हमी के विषय में शान्त नहीं हैं। “ऊपर से” का अर्थ है, स्वर्ग से, परमेश्वर से। इस पृथ्वी पर परमेश्वर महान राजा हैं और यदि परमेश्वर अनुमति नहीं देते,

तो पिलातुस कुछ नहीं कर सकता था। भजन 2; 40:1-2; यशा. 40:21-23; दानि. 4:34-35 से तुलना करें। इन सब बातों में पिलातुस ने बुरा तो किया किंतु जिसने (कैफ़ा प्रधान पुरोहित –  यूहन्ना 18:28) पिलातुस के हाथों सुपुर्द किया,

उसका अपराध बड़ा था। अपराध करने के भी कई स्तर हो सकते हैं, तुलना करें लूका 12:47-48 से।

 

प्रेरितों के काम 17:26

 

26 उसने एक ही इंसान से सारे राष्ट्र बनाए कि वे पूरी धरती पर रहें और उनका वक्त ठहराया और उनके रहने की हदें तय कीं

1 पतरस 2:13-17

 

13 यीशु की खातिर नागरिकों के लिए बनाए गए हर इन्तज़ाम (कानून) के आधीन रहो। राजा के आधीन इसलिए कि वह सब के ऊपर शासन करता है।

14 अधिकारियों के आधीन इसलिए क्योंकि वे गलत करने वालों को सज़ा देने और सही करने वालों को सम्मानित करने के लिए परमेश्वर द्वारा ठहराए गए हैं।

15 परमेश्वर की इच्छा यह है कि तुम भले काम करने से बेअकल लोगों की अज्ञानता की हरकतों को बन्द कर दो।

16 अपने आपको आज़ाद जानो, लेकिन अपनी इस आज़ादी को बुराई के लिए, आड़ न बनाओ और अपने आपको परमेश्वर के सेवक, समझकर रहो।

17 सब की इज़्ज़त करो, भाई बहनों से प्यार रखो, परमेश्वर से डरो और राजा को सम्मान दो।

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