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प्रेम Bible Love verses

1. यूहन्ना 13:34

परमेश्वर का  बचान प्रेम Bible Love verses

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जो हमे बाइबिल में मिलती वोह इस तरह के हैं

मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूँ, कि एक दूसरे से प्रेम रखो। जैसा मैंने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।

2. 1 पतर. 1:22

सत्य की आज्ञा मानने से तुम ने अपनी आत्मा को पवित्र (शुद्ध) कर लिया है, ताकि आपस में एक दूसरे से सच्चा प्रेम कर सको। अपने पूरे मन से दूसरों से प्रेम रखो।

3. यूहन्ना 15:12

मेरा आदेश यह है कि जैसा मैंने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही प्रेम तुम भी एक दूसरे से रखो।

4. यूहन्ना 15:17

इन बातों की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिए देता हूँ ताकि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

5.  1 यूहन्ना 3:11

जो संदेश तुम ने शुरूआत से सुना है, वह यही है, कि हम एक दूसरे से स्नेह रखें।

6.  1 यूहन्ना 3:18

मेरे छोटे बच्चो, हमारा प्रेम शब्द का नहीं, लेकिन काम में और सच्चाई में दिखे।

7.  1 यूहन्ना 4:8

जो प्रेम नहीं करता है, वह परमेश्‍वर को नहीं जानता  है क्योंकि परमेश्‍वर प्रेम हैं।

8.  1 कुरिन्थ. 13:1

यदि मैं इन्सानों और स्वर्गदूतों की भाषाओं में बोलूँ, लेकिन मेरे पास प्रेम न हो, तो मैं ठन-ठन करने वाला पीतल और झनझनाती झाँझ की तरह हूँ।

9.  1 पतर. 4:7-8

सब कुछ जल्दी (अचानक) खत्म होने वाला है इसलिए समझदार होकर प्रार्थना में लगे रहो। प्रेम अनगिनित गुनाहों को ढाँप देता है, इसलिए एक दूसरे से प्रेम रखना सब से बड़ी बात होगी।

10.  मत्ती 5:44

लेकिन मैं तुम से यह कहता हूँ कि अपने दुश्मनों से प्यार करो और सताने वालों के लिए प्रार्थना ।

11.  मत्ती 22:37

उन्हों ने उस से कहा, “तू परमेश्‍वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्वि के साथ प्रेम रख।

12.  यूहन्ना 3:16

क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उन्हों ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उन पर विश्‍वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।

13.  यूहन्ना 14:15

यदि तुम मुझ से प्यार करते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।

14.  यूहन्ना 17:24

पिता, मैं चाहता हूँ कि जिन्हें आप ने मुझे दिया है, जहाँ मैं हूँ वहाँ वे भी मेरे साथ हों कि वे मेरी उस महिमा को देखें जो आप ने मुझे दी है, क्योंकि आप ने जगत की उत्पत्ति से पहले मुझ से प्रेम रखा।

15.  यूहन्ना 17:26

मैंने आपका नाम उनको बताया है और बताता रहूँगा कि जो प्रेम आप को मुझ से था, वह उन में रहे और मैं उन में रहूँ।”

16.  इफिसि. 5:25

पतियो, अपनी पत्नियों से प्यार करो, जिस तरह से यीशु नेचर्च से प्यार किया और अपने आप को उसके लिए दे दिया,

17.  1 यूहन्ना 3:16

इसी से हम परमेश्‍वर के प्रेम को जानते हैं, क्योंकि उन्हों ने अपने जीवन को हमारे लिए कुर्बान कर दिया। हमें भी अपना जीवन अपने भाइयो-बहनों के लिए देना चाहिए।   17 लेकिन जिस किसी के पास इस दुनिया की चीज़ें हैं, और वह अपने भाई को ज़रूरत में देखने के बावजूद अपने मन को, सख्त कर लेता है, तो परमेश्‍वर का प्रेम (या अगापे) उसके अंदर कैसे रह सकता है? 18 मेरे छोटे बच्चो, हमारा प्रेम शब्द का नहीं, लेकिन काम में और सच्चाई में दिखे।

18.  1 यूहन्ना 4: 8

जो प्रेम नहीं करता है, वह परमेश्‍वर को नहीं जानता है क्योंकि परमेश्‍वर प्रेम हैं।  9 परमेश्‍वर का प्रेम इस तरह से प्रगट हुआ, कि परमेश्‍वर ने अपने प्रिय एकलौते बेटे को इस दुनिया में भेजा, ताकि हम उनके द्वारा जिंदा रहें (जीवन पाएँ)।

19.  इफिसि. 2: 4

लेकिन परमेश्‍वर ने जो दया में धनी  हैं, अपने बड़े प्रेम की वजह से, हमें प्यार दिया।  5 उस समय भी जब हम अपनी दुष्टता की स्थिति में मरे हुए थे, तब परमेश्‍वर ने हमें मसीह के साथ जिला दिया (अर्थात् असीम दया के कारण हमें मुक्‍ति मिली)।

20.   इब्रानि. 1:9

आप ने खराई से प्रेम और बुराई से बैर रखा। इसलिए परमेश्‍वर, आपके परमेश्‍वर ने आपके साथियों से बढ़कर आनन्द के तेल से आपको अभिषेक किया।”

21.   2 तीमुथियुस 1:7

क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।

22.   इफिसियों 4:2

अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो।

23.   फिलिप्पियों 1:9

और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।

24.   विलापगीत 3:22

हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है।

25.  1 यूहन्ना 4:16

और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उस को हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।

26.  भजन संहिता 31:7

मैं तेरी करूणा से मगन और आनन्दित हूं, क्योंकि तू ने मेरे दु:ख पर दृष्टि की है, मेरे कष्ट के समय तू ने मेरी सुधि ली है ।

27.  भजन संहिता 86:5

क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है।

28.  इफिसियों 4:32

और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो॥

29.  1 कुरिन्थियों 13:13

विश्वास, आशा, प्रेम तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है ।

30.  1 कुरिन्थियों 16:14

जो कुछ करते हो प्रेम से करो॥

31.  1 कुरिन्थियों 13:7

वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।

32.  मत्ती 5:43-48

43  तुम सुन चुके हो कि कहा गया था, ‘तुम अपने पड़ोसी से प्यार करना  और दुश्‍मन से नफरत।’

44  लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ: अपने दुश्‍मनों से प्यार करते रहो और जो तुम्हें सताते हैं, उनके लिए प्रार्थना करते रहो।

45  इस तरह तुम साबित करो कि तुम स्वर्ग में रहनेवाले अपने पिता के बेटे हो क्योंकि वह अच्छे और बुरे दोनों पर अपना सूरज चमकाता है और नेक और दुष्ट दोनों पर बारिश बरसाता है।

46  क्योंकि अगर तुम उन्हीं से प्यार करो जो तुमसे प्यार करते हैं, तो तुम्हें इसका क्या इनाम मिलेगा? क्या कर-वसूलनेवाले भी ऐसा ही नहीं करते?

47  और अगर तुम सिर्फ अपने भाइयों को ही नमस्कार करो, तो कौन-सा अनोखा काम करते हो? क्या गैर-यहूदी भी ऐसा ही नहीं करते?

48  इसलिए तुम्हें परिपूर्ण होना चाहिए ठीक जैसे स्वर्ग में रहनेवाला तुम्हारा पिता परिपूर्ण है।

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |

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