बपतिस्मा का क्या मतलब है ? (Baptisma ka kya matlab he ?)

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बपतिस्मा का क्या मतलब है ? (Baptisma ka kya matlab he ?)

मत्ती 28:19

19 इसलिए जाकर सभी देशों के लोगों को शिष्य बनाओ। उन्हें पिता पुत्र और पवित्रात्मा के नाम से बपतिस्मा दो।

 

  1.  यीशु ने अपने लोगों को तीन आज्ञाएँ दी – शिष्य बनाओे, बपतिस्मा दो, जो शिष्य बने उन्हें सिखाओ। हर पीढ़ी के मसीहियों की यह ज़िम्मेदारी है।

यही प्राथमिकता होनी चाहिए बपतिस्मा सभी को नहीं, सिर्फ़ उनको जो शिष्य बनते हैं। बपतिस्मे पर ज़्यादा जानकारी के लिए शिष्यता का मतलब है

अपने स्वार्थ के लिए न जीना और नया जीवन जीना जिनमें मसीह केन्द्र है और प्रेम का केन्द्र बपतिस्मा इन दो बातों के बारे में बताता है।

बपतिस्मा इन दो बातों के बारे में बताता है। रोमि. 6:3-6 से है कि उनके शिष्य बपतिस्मा लें, जो विश्वासी उन्हें खुश करना चाहते हैं, उन्हें बपतिस्मा लेना चाहिए।

 

2.  में आपको सबसे पहले ये बताना चाहता हूँ बपतिस्मा पिता पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से होना चाहिए अगर आप किसीे और नाम से बपतिस्मा लिया है तो में आप से” बताना चाहता हूं

आप बाईबेल के विरुद्ध गाये हैं बपतिस्मा हमेसा पिता पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से ही लेना चाहिए!  आप सोचते होंगे क्यों बपतिस्मा पिता पुत्र पवित्र आत्मा के नाम से ही लेना चाहिए?

जब परमेश्वर ने दुनिया बनाई जैसेे कि 👉इसमें लिखा है (यूहन्ना 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।) वचन जो पृथ्वी बनने से पहले था उसने शरीर धारण किया

और आप अच्छे से जानते हो शरीर में कोन आया है यीशु मस्सी अब में आप को एक बात बताना चाहता हूँ बाईबेल ऐसा बताती है यीशु मस्सी ने जब देह धारण किया ;

और बाईबेल में लिखा है परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी कि रचना की तो कैसे किया मु के वचन से की अब ध्यान दीजिये पिता ने कहा अंधेरेे में ज्योती हो जाये मैं ये समझाना चाहता हूँ

यहाँ ध्यान दीजिये👉 ( यूहन्ना 1:14 और वचन ने देह धारण की और कृपा और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में आकर रहा, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।)

इसका मतलब है यीशु मस्सी वो हमारे बीच में शरीर में आया और हमारे बिच डेरा किया अब आईए हम दुनिया बनने से पहले आते हैं परमेश्वर ने  काहा अंधेरेे में ज्योती हो जाये अब पिता मु से शब्द केहे  राहा है बेटे को निकाल राहा है

और उस समय पृथ्वी पर पवित्र आत्मा मंड्रा राहा था ; इसलिए दुनिया के सुरुवात से पहले पिता पुत्र पवित्र आत्मा एक साथ मंड्रा रहे थे ये बाईबेल की सुरुवात है !

और अगर आप नया नियम पढ़ेगें वहाँ आप को पता चलेगा जब प्रभु यीशु मस्सी बपतिस्मा ले रहे थे तब वो जमीन पर खड़े थे पानी में जो युहन्न बपतिस्मा दाता से बपतिस्मा ले रहे थे और लिखा गया था ये मेरा प्रिय पुत्र है

और लिखा है कबुतर के सम्मान पवित्र आत्मा फिर से उतरा अभी नये नियम के सुरुवात में भी पिता पुत्र और पवित्र आत्म एक साथ दिखे आप इन्हें अलग नहीं कर सकते याद रखियेगा ये तीनों एक हैं

लेकिन ये तीनों के अलग अलग काम है ! पिता ने अपना प्रेम केसे प्रकट किया पुत्र यीशु के द्वारा ; अब पुत्र यीशु ने अपना अनुग्रह कैसे प्रकट किया पवित्र आत्मा देने के द्वारा जैसे वचन में लिखा है

प्रभु यीशु मस्सी का अनुग्रह परमेश्वर पिता का प्रेम और पवित्र आत्मा का सहभागिता हम सभो के साथ रहे आप ये तीनों को कभी अलग नहीं कर सकते हो ये तीनों एक हैं इसलिए में केहता हुँ

आप का बपतिस्मा सबसे पहले पिता पुत्र पवित्र आत्म के नाम से होना चाहिए  !

 

3.  अब में दूसरी बात बताना चाहता हूँ बपतिस्मा एक रीती रिवाज नहीं है बपतिस्मा कोई परमपरा नही है याद रखना जो में वचन पढ़ा है जाओ और उन्हें पिता पुत्र पवित्र आत्म के नाम से बपतिस्मा दोदो

और ये परमेश्वर पिता की आज्ञा है आप में से कोई भी व्यक्ति इस पृथ्वी पर जन्म ले चुका है या लेने वाला है उसको बपतिस्मा लेना जरुरी है याद रखिये कई सारे लोग सोचते हैं की बपतिस्मा नहीं लिया है तो चलेगा

और ये केहते हैं यीशु मस्सी के दाहीनी और चोर ने भी तो बपतिस्मा नहीं लिया तो फिर भी वो स्वर्ग गया तो हम भी क्यों स्वर्ग नही जा सकते मेरे भायों बहनो एक वचन को  उद्धरण( reference) को लेकर

आप पुरा बाईबेल को नहीं समझ पाएंगे ; ऐसा बहुत सारे लोग कहते हैं उस चोर ने भी बपतिस्मा नहीं लिया तो फिर में क्यों लुँ तो में एक उदाहरण देता हूँ यीशु ने फिर क्यों बपतिस्मा लिया

उन्हों ने कोन से पाप किये युहन्न बपतिस्मा दाता ने क्या प्रचार किये अपने पाप से मन फिराओ फिर बपतिस्मा लो !  मेने ऐसे बहुत से लोगों को देखा है जो उनके बाप दादा ने बपतिस्मा लिया

हम भी लेंगे इसका क्या मतलब है कैसे लोग हैं इस दुनिया में उनके बच्चों का मन पाप से नहीं फिरा या केहे सकते हैं पाप क्या हो उनको  ज्ञान( knowledge) भी नहीं है उन्हें बपतिस्मा लेने देते हैं !

अब एक बार बपतिस्मा होने के बाद वो रद्द नहीं कर सकते पर आप जिन बच्चों को आपने बपतिस्मा दिलाया है उन्हें ठीक से प्रभु के साथ चलना तो सिखाईए उन्हें प्रभु में ईमंदार बनना तो सीखाइये

क्या आप यीशु मस्सी के जीवन का पीछा करते हैं उनके जैसे बनने की कोशीश करते हैं अगर नहीं तो फिर कैसे आप बपतिस्मा ले सकते हैं !

क्या कोई बपतिस्मा लेते हैं यीशु के जीवन के बारे में कुछ जानकारी है क्या आप यिशु मस्सी में विश्वास ला चुके हैं क्या आप जानते हैं पाप क्या है मन फिराना क्या है क्या आप के बच्चे को यीशु मसीह में समझ है।

बपतिस्मा का मतलब जानिए फरिसीयों की तरह बपतिस्मा मत्त लीजिए दूसरे बपतिस्मा ले रहे हैं तो हम भी लेंगे ऐसा मत कीजिए पहले खुदा को जानिए फिर बपतिस्मा लीजिए दो दिन के आये हुए व्यक्ति को बपतिस्मा मत दीजिए।

 

  • पेहली बात बपतिस्मा आप पिता पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से ही लेना चाहिए
  • दुसरी बात बपतिस्मा आप किसी को भी नहीं दे सकते क्यों की बपतिस्मा कोई रीति रिवाज नहीं है ये प्रभु की आज्ञा है
  • और तिसरी बात में आप से बताना चाहता हूं बपतिस्मा किनको लेना चाहिए 👉( प्रेरितों के काम 8:37 फ़िलिप्पुस ने उत्तर दिया “यदि तुम पूरे मन से भरोसा करते हो, तो तुम्हें बपतिस्मा दिया जा सकता है।” उसने कहा, “

मुझे यकीन है कि यीशु मसीह परमेश्‍वर के बेटे हैं।”) बपतिस्मा लेने से पहले ऐसा नहीं है कि आपको सिद्ध होना है लेकिन बपतिस्मा लेने से पहले आपको दो चीज करने कि जरूरत है

(1)- आपको अपनी परिस्थिति (condition) मालुम होनी चाहिए और अपनी किसी को दो दिन दिनों में पता नहीं चलती है उसको 4 , 5 महीने लग जाती है जब तक आप अपने चरित्र ( Character) को जाने

आप परमेश्वर को प्रार्थना करें प्रभु मेरे अंदर बहुत सारे बाते हैं येही है पहली चीज। और

(2) अगर आप अपने पाप के बारे में जानते हैं प्रभु ने आप पर जाहिर किया है आपके अंदर गुन्हा है आप अपना मन फिरा रहें हैं इस चीज को लेकर कि यीशु ही अकेला है

जो परमेश्वर का पुत्र है ये बात आप विश्वास करते हैं और आप अपने आपको जानते हैं अपने पाप को जानते हैं और आप अपने मन को बना लिये हैं कि मुझे पाप से निकलना है तो आप बपतिस्मा ले सकते हैं।

और आप सोचते होंगे बपतिस्मा लेने के बाद भी पाप नहीं होगा तो आप ग़लत हैं पाप होता है हम गिरते भी है पर प्रभु यीशु मसीह हमे उठाते हैं और अपने लहु से सुध करते हैं हमे माफ करते हैं।

4.  अब जब आप बपतिस्मा लेते हैं तो क्या होता है ? जब आप पानी में जाते हैं आपका पास्टर आपको पानी में डुबो देता है आपको बाहर निकालता है और उसके बाद ये प्रचार (Declare) हो जाता है कि आप बपतिस्मा ले चुके हो।

कया अर्थ है बपतिस्मा का क्यों प्रभु ने ऐसा आज्ञा का ऐसा नमूना( pattern) रखा है पहले आपको पानी में जाना है याद रखिए आपको खुद से नहीं जाना है कोई आपको पानी ले कर जाएगा जैसे यूहन्ना ने यीशु को पानी के अंदर लिया था

वैसे आपके पास्टर आपको पानी के अंदर में पहले दुबाएंगे उदाहरण : जैसे कि में आपको पानी में ले जाता हूं फिर आपको बहार निकालता हूं ठीक उसी तरह।

अब क्यों प्रभु ने बपतिस्मा की विधी इस तरह से पालन कर ने को काहा है मतलब कि पानी के अंदर डुबो के निकालने कि विधी को। इसका मतलब है जब आप बपतिस्मा लेते हो आपने अनुमति (allow) दिया है

आप में से जो कोई चाहे मुझे नीचे लेके जा सकता है अगर आप चाहो तो मेरा नाम खराप कर सकता है मेरे लिए कुछ भी बोलो मेरे विरुद्ध कुछ बोलो इसका अर्थ है नीचे ले जाना और

जब पानी के अंदर से बहार निकालने का मतलब क्या है ? इसका मतलब क्या है इसका मतलब है तुम्हें जो करना है मेरे साथ करो में विश्वास करता हूं कि मेरा खुदा मुझे वापिस खड़ा करेगा इसे केहते हैं बपतिस्मा।

यही अर्थ बताया गया है रोमियों के 6 अध्याय के अंदर जहां बताया गया है बपतिस्मा का सही मतलब खुद के लिए मरना खुद के लिए ख़तम हो जाना क्या मतलब था इसका जब यूहन्ना बपतिस्मा दाता जब प्रचार कर रहे थे के आओ

और अपने पापों से मन फिराओ और बपतिस्मा लो। हमारे प्रभु यीशु ने कुछ पाप नहीं किया था फिर भी बपतिस्मा क्यों लिया था प्रभु हमे ये समझाना चाहता था अब मैं अपना जीवन नीचे तक ले चुका हूं के जिसको जो बोलना है

वो बोलो मेरा बाप मुझे वापिस खड़ा करेगा। मेरे भाइयों बहनों बपतिस्मा का मतलब है अपने आप में मरना , अपनी गंदी अभिलाषाओं के लिए मरना , अपने बुरे विचारों में मरना ,

अपनी पुरानी आदतों में मरना बाईबल ऐसा बताती है ये मृत्यु का बपतिस्मा है ये👉 रोमीयों 6:3 क्या तुम्हें यह नहीं मालूम कि हम जितनों को यीशु मसीह में बपतिस्मा दिया गया, वह यीशु की मौत में बपतिस्मा था।

यहाँ पौलुस किस “बपतिस्मे” की बात कर रहा है? यह यूनानी भाषा का है। यदि इस शब्द का अनुवाद करें, तो कुछ इस तरह पढ़ा जाएगा – हम सभी जो मसीह में डुबाए गए, उनकी मृत्यु में डुबोए गए थे।

इसलिए इस मृत्यु में डुबोए जाने से, हम उनके साथ दफ़नाए गए थे। इसलिए डुबोए जाने का अर्थ पानी में डुबोना नहीं मसीह में डुबोना होगा। यह उनके साथ एक खास सम्बन्ध में शामिल होना,

पवित्र आत्मा के द्वारा उनकी देह का अंग बनना, मसीह के साथ एक होने को दिखाता है। 👉(1 कुरि. 12:12-13; यूहन्ना 17:21, 23)।

 

5.  बाईबल में बपतिस्मा देना या बपतिस्मे का अर्थ कई स्थानों पर एक अलंकारिक भाषा में है। देखें 👉लूका 12:50; 1 कुरि. 10:2. जिन आत्मिक सच्चाइयों के विषय पौलुस यहाँ सिखाता है, पानी का बपतिस्मा उनकी ओर इशारा करता है।

पानी में उतरना मसीह के साथ मरने और गाड़े जाने को दिखाता है। पानी से बाहर आना मसीह के साथ जी उठने को दिखाता है। मसीह में जो कुछ परमेश्‍वर ने हमारे लिए किया, उसका अभिप्राय यह था,

“कि हम नया जीवन जीएँ”, एक जी उठा हुआ जीवन, अपराध की गुलामी और आत्मिक मौत से आज़ादी का जीवन।

 

6.  बपतिस्मे का मतलब है ‘डुबोना’। यूहन्ना के बपतिस्मे का मतलब है, मन बदलाव और गुनाहों की माफ़ी। लेकिन बपतिस्मे से यह उत्पन्न नहीं होता है।

मरकुस 1:4 आदि देखें। पानी में कोई संस्कार, वह कहीं का क्यों न हो, इन्सान के मन को नहीं बदल सकता, सिर्फ़ परमेश्वर यह बदलाव ला सकते हैं। यह तब होता है जब मनुष्य गंभीरता से यीशु को अपनाता है।

👉(यूहन्ना 1:12-13; 3:3-8; 5:24; प्रे.काम 13:38+-39)। मसीह बपतिस्मा यीशु के नाम और पवित्र आत्मा के वरदान से जुड़ा हुआ है  पतरस यह नहीं सिखा रहा है कि मुआफ़ी के लिए बपतिस्मा ज़रूरी है।

मुक्ति के लिए बपतिस्मा ज़रूरी नहीं है। लेकिन जो यीशु पर भरोसा करते हैं, सार्वजनिक रूप से उन्हें बपतिस्मा के द्वारा साक्षी देनी चाहिए।

यदि एक व्यक्ति कहता है कि यीशु पर भरोसा है, लेकिन बपतिस्मा नहीं लेता है, तो उसके विश्वासी होने पर शक है। यीशु ने यह नहीं कहा ‘जो बपतिस्मा न ले’ नाश हो जाएगा, लेकिन जो “विश्वास न करे”। तुलना करें यूहन्ना 3:17-18.

 

7.  लोग पानी का बपतिस्मा पाए हुए हो सकते हैं, अपने आप को मसीही भी कह सकते हैं और स्थानीय चर्च के सदस्य भी हो सकते हैं, परन्तु प्रभु यीशु मसीह के सच्चे चर्च (उनकी देह) के अंग नहीं होते हैं,

जब तक मन बदलाव और विश्वास के द्वारा मुक्ति नहीं पाते। पौलुस संस्था के विषय में नहीं कहता, परन्तु एक जीवित देह के विषय में कहता है, जिसमें परमेश्वर का आत्मा रहता है और काम करता है।

केवल परमेश्वर के आत्मा के द्वारा ही उसमें दाखिल किया जा सकता है। पवित्र आत्मा के बपतिस्मे के विषय में दो विचारधाराएँ हैं: एक यह कि मुक्ति पाने से पवित्र आत्मा का बपतिस्मा मिल जाता है।

दूसरी यह कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाए हुए व्यक्ति को अन्य भाषा चिन्ह के रूप में मिलती है। प्रत्येक व्यक्ति का यह लक्ष्य होना चाहिये कि वह निरन्तर आत्मा की भरपूरी 👉(इफ़ि. 5:18) पाए लूका 11:13 देखें।

 

8.  “पवित्र आत्मा का बपतिस्मा”-

यहाँ पर चार अलग अलग तरीकों इस बात को कहा गया है, यह बताने के लिए कि शिष्यों ने पेन्तिकुस्त के दिन क्या पाया।

यहाँ – पवित्र आत्मा का बपतिस्मा

पद 8 – जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा

– प्रेरितों के काम 2:4 : ‘पवित्र आत्मा’

– प्रेरितों के काम 10:47 : ‘पवित्र आत्मा पाया’

ये चारों पद एक ही घटना के बारे में बताते हैं जो कि ( प्रेरितों के काम 2:1-4) में है। यह देखना ज़रूरी है।

9. उस दिन मसीह ने परमेश्‍वर के आत्मा को एक नए रूप में दिया।

यह ऐसा था मानो आत्मा में डुबोया जाना या उण्डेला जाना (प्रेरितों के काम 2:33; प्रेरितों के काम 10:45) इसका परिणाम यह हुआ

कि उनका पूरा व्यक्तित्व पवित्र आत्मा से भरपूर हो गया था। मसीही जीवन जीने की ताकत भी तभी उन्हों ने पायी। वे पवित्र आत्मा की अगुवाई तथा प्रेरणा पाने लगे और गवाही देने भी लगे।

उस समय से आज तक जब कभी कोई व्यक्ति यीशु पर विश्वास लाता है वह पवित्र आत्मा पा जाता है। (देखें यूहन्ना 7:37-39; गल. 3:2; इफ़ि. 1:3)।

यदि वे मसीह की आत्मा नहीं पाते हैं, जो कि परमेश्वर का आत्मा है, तो वे मसीह के नहीं है। इसका अर्थ है, कि उन्हों ने सचमुच में यीशु मसीह पर विश्वास नहीं किया है। वे ऊपर (स्वर्ग) से जन्में नहीं हैं (देखें रोमि. 8:9)

10.- 1 कुरि. 12:12-13 के मुताबिक हर विश्वासी परमेश्‍वर के आत्मा से मसीह की देह (मण्डली, चर्च) में बपतिस्मा पा चुका है (परमेश्वर के आत्मा से या में) –

यूनानी भाषा ये दोनों शब्द सही हैं।

यहाँ भी उसी शब्द का इस्तेमाल हुआ है जो प्रेरितों के काम में हुआ है। यह भी तभी होता है जब व्यक्ति यीशु को प्रभु और मुक्तिदाता के रूप में स्वीकार करता है।

व्यक्ति को इस तरह से इन्तज़ार नहीं करना है जैसे शुरु के प्रेरितों को करना पड़ा था। परमेश्‍वर ने यहूदी त्यौहार पिन्तेकुस्त को सही समझा कि अपना आत्मा उसी दिन दें।

तभी से पवित्रात्मा का युग शुरू हुआ। तभी से कृपा (अनुग्रह) का ज़माना शुरू हुआ। अब यह कृपा का युग वर्षों से चल रहा है। इसलिए किसी को प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।

11.  यीशु मसीह को स्वीकार करने या पवित्रात्मा पाने के समय ही हम यीशु की देह में जोड़े जाते हैं।

तभी से हर एक को भरपूरी में रहना चाहिए। (इफ़ि. 5:18)।

केवल एक ही पवित्र आत्मा का बपतिस्मा है। लेकिन भरने का अनुभव बार-बार का है। यह जानते हुए कि हमारे भीतर पवित्र आत्मा है और हमें पवित्र आत्मा का बपतिस्मा मिल चुका है,

कोई कारण नहीं होना चाहिए कि हम भरपूर न हों यदि हम पूरे मन से चाहेंगे।

12.बाईबल में कुछ एक पद हैं, जहाँ पवित्रात्मा ‘में’ या ‘द्वारा’ बपतिस्मा शब्द आए हैं। यूहन्ना बपतिस्मा इन्हें इस्तेमाल करता है (देखें मत्ती 3:11)। हमारे पास यीशु के भी शब्द हैं।

जिन्हें पतरस प्रेरितों के काम में बताता है (11:16)। इसके अलावा हमें 1 कुरि. 12:13 में पौलुस का कथन मिलता है।

 

13.  में है। इसका मतलब, प्रभु के लोगों का शुद्ध किया जाना हो सकता है। यहाँ आग का मतलब है, परमेश्वरीय ताकत जो उन में आने पर सच्चाई की गवाही देने के लिए शक्‍ति देगी (यिर्म. 20:9 से तुलना),

या आग परमेश्वर के न्यायिक गुस्से की तरफ़ इशारा है (पद 7; तुलना करें व्यव. 32:32; यशा. 30:30; 2 थिस्स. 1:7-8)। यह दूसरा अर्थ ज़्यादा सही लगता है।

गेहूँ (परमेश्वर के सच्चे लोग) पवित्र आत्मा से ओत-प्रोत हो जाएँगे। (भूसी – जो प्रभु के सच्चे लोग नहीं हैं – भजन 1:4) आग से बपतिस्मा पाएँगे या पीड़ा में रहेंगे।

14.  प्रभु के वचन के सभी सिखाने वालों के लिए यूहन्ना एक नमूना है। वह सादा जीवन बिताता था। चतुराई और धार्मिक राजनीति में नहीं था। दीन था, लेकिन शेर की तरह हिम्मती। उसने कुछ बातों पर ज़ोर डालाः

  1. बुराई के खिलाफ़ परमेश्वरीय गुस्सा।
  2. मन बदलाव और चालचलन में परिवर्तन।
  3. पीढ़ियों से सम्बन्धित नहीं, लेकिन परमेश्‍वर से व्यक्‍तिगत सम्बन्ध।
  4. बुरे लोगों पर आने वाला न्याय, लेकिन परमेश्‍वर के सच्चे लोगों पर भविष्य में भलाई।
  5. सब के ऊपर यीशु की सर्वश्रेष्ठता।
  6. जो लोग यीशु की शिक्षा को अपनाते हैं, मन बदलाव करते हैं, उनको पवित्र आत्मा मिलता है।

क्या हम जो खुशी का संदेश देते हैं, परमेश्वर को सन्तुष्ट करना चाहते हैं? आईये, हम यूहन्ना की नकल करें।

 

15.  एक महान परमेश्वर का दास है और उसका नाम है पोलुस और देखिये वो अपने विषय में क्या लिखता है अगर आप का भी ये लक्ष्य है में आपको सच केहता हूँ

आप कभी भी अपने जीवन में निंदा या तिरस्कार(Condemnation) नही करेंगे जानते हैं Condemnation का मतलब क्या होता है आज बहुत सारे लोग अपने आप को पसन्द नही करते हैं ;

अगर आप उनको कहोगे आप धर्मी हो उसके बाद भी उनके अन्दर एक इमैज बनी हुई है नही में घटिया हूँ मेरी वजाह से लोगों का जिंदगी खराप हुई है वो हुआ है ये हुआ है!

में आपसे केहना चाहता हूँ वचन केहता है प्रभु ने हमें अपने लहु से खरीदा है अब हम अपने नही है तो जरा सोचीये अगर हम अपने नही है तो क्या हक् है प्रभु के चीजो पर दोष लगाने का !

 

16.  यहाँ बपतिस्मे का मतलब है वह दुख और मौत जिसमें यीशु डूबने वाले थे। परमेश्वरीय प्रेम के दबाव को यीशु ने अनुभव किया, जिसमें यह शामिल था कि मनुष्य जाति मुक्ति पाए।

इसी बोझ के दबाव से यीशु ने हर तरफ़ के दुख, यहाँ तक कि मौत को पापियों की क्षमा के लिए स्वीकार किया।👇

लुका 12: 50👇

मुझे तो मौत (दुख) में डुबोया जाना है, और जब तक ऐसा न हो, तब तक मेरे अन्दर उलझन बनी रहेगी ?

 

2 पवित्र शास्त्र बाईबेल हमें बपतिस्मा लेने के बाद फिर से पाप करते रहने को क्यों मना करती है ? हमें बपतिस्मा लेने के बाद यीशु के लिए और उनके जैसे ही ईमानदारी से जीवन क्यों जीना चाहिए ? आइऐ देखते हैं ? 👇

17.  विश्वासी मसीह में हैं। और मसीह के साथ एक हैं जैसे मृत्यु यीशु का हुआ है और जी उठना भी उनका ही हुआ है👉 (रोमियों 8:1) शब्द पिछले पदों से जोड़ता है और इस बात की निश्चयता देता है

कि👉( रोमियों 7:14-25) में पौलुस खुद को मसीह यीशु में एक  व्यक्ति बताता है। गुनाह के साथ उसका सम्बन्ध बिल्कुल तोड़ दिया गया था। . उसका भीतरी भाग बदला गया था,

इसलिए वह परमेश्वर की बातों में मगन हो रहा था👉  (रोमियों 7:22)। वह मसीह यीशु के द्वारा परमेश्वर को “मौत की देह” – से छूट जाने के लिए धन्यवाद भी देसका👉 (रोमियों 7:25)।

इन बातों से वह दिखाता है कि वह मसीह में है, इसलिए उसके लिए कोई सज़ा नहीं है। ऐसी स्थिति में किसी के लिए भी सज़ा नहीं है। अपराध के साथ एक कश-म-कश की वजह से,

विश्वासी अपने आप को दोषी ठहराने की सोच सकते हैं, किन्तु परमेश्वर उन्हें दोषी नहीं ठहराते। 👉(रोमियों4:7-8) से तुलना करें – जिन अपराधों को परमेश्वर लोगों के विरोध में नहीं देखते, कैसे उनके लिए दोषी ठहरा सकते हैं ?

जो कुछ भी मसीह में नए लोग या विश्वासी बनने से पहले थे। यह ऐसा कुछ नहीं, जिसे हम स्वयं करते हैं। जब मसीह 30 ए. डी. में क्रूस पर चढ़ाए गए विश्वासी उनके साथ क्रूस पर चढ़ाए गए थे।

और यीशु हम्मे जीवित हैं इस् आयत को हम इसमें पाते हैं 👉(गलातियों. 2:20) विश्वासियों की देह में रहने वाला बुरा स्वभाव। जिस प्रकार हमारी देह नाश नहीं की गयी जब मसीह हमारे स्थान पर मरे,

उसी प्रकार यह स्वभाव भी नाश नहीं किया गया। किन्तु मसीह की मौत यह संभव करती है, कि वह हमें इस गुनाह के स्वभाव की ताकत से छुड़ाए परमेश्वर की दया के कारण अब ज़रूरी नहीं कि हम इसकी गुलामी में रहें

 

18.  परमेश्वर की निगाह में हम ने आदम में होकर गुनाह किया और मसीह में मरे भी (2 कुरि. 5:14; कुल. 3:3)। आदम के अपराध के कारण हम पर सज़ा आयी (5:16, 18)।

मसीह की मौत के कारण इस से आज़ादी मिली। मसीह के साथ मरने के कारण हम अपराध से आज़ाद (सज़ा मुक्त) किए गए। गुनाह के साथ सम्बन्ध तोड़ दिया गया।

हमारे नाम पर अब कोई अपराध लिखा नहीं हुआ है (4:7-8)। मसीह के दुखों और मौत के कारण हमारे गुनाहों के लिए कीमत चुका दी गयी है।

ऊपर लिखी सभी बातें प्रत्येक विश्वासी के जीवन की सच्चाई हैं न कि कुछ सुपर विश्वासियों की। मसीह के साथ विश्वासी अब उस नए आत्मिक जीवन को जीते हैं,

जिसे सृजनहार ने उन्हें दिया है (यूहन्ना 5:24; 14:23) उसके साथ वे सदा जीएँगे (1 थिस्स. 4:17)।

19.  मृत्यु अपराध का परिणाम है (रोमियों 5:12; रोमियों 6:23)। विश्वासियों के गुनाहों की सज़ा रूप में मसीह मरे (रोमियों 3:25; यूहन्ना 1:29; 1 कुरि. 15:3)। अब वह सदा के लिए जीवित हैं (प्रका. 1:18)।

वे परमेश्वर के लिए जीवित हैं, ताकि जग के मालिक को प्रसन्न करें, उनकी इच्छा पूरी करें (यूहन्ना 8:29) न स्वयं और अपराध के लिए।

 

रोमियों 6:3 -9

3 क्या तुम्हें यह नहीं मालूम कि हम जितनों को यीशु मसीह में बपतिस्मा दिया गया, वह यीशु की मौत में बपतिस्मा था।

4 इसलिए हम बपतिस्मे में यीशु के साथ मौत में गाड़े गए, ताकि जिस तरह से परमेश्‍वर की शक्ति से यीशु मसीह जिलाए गए, हम उसी तरह जीवन के नयेपन में जी सकें।

5 क्योंकि यदि हम यीशु की मौत की समानता में जोड़ दिए गए हैं, तो हम उनके जी उठने की समानता में भी जोड़ दिए जाएँगे।

6 हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व (पुराना जीवन) यीशु के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया था, ताकि गुनाह (अपराध) का शरीर बेकार हो जाए और अब से हम अपराध की सेवा न करें।

7 क्योंकि जो मसीह के साथ मर चुका है, वह गुनाह से मुक्‍त किया जा चुका है और धर्मी है।

8 अब यदि हम मसीह के साथ मर चुके हैं, हमें विश्‍वास है कि हम मसीह के साथ जीवित भी रहेंगे।

9 यह जानते हुए कि मसीह जो मरे हुओं में से जिलाए गए, फिर से मरेंगे नहीं। अब उनके ऊपर मौत का अधिकार नहीं रह गया।

10 क्योंकि जब वे एक बार मर गए, तो यह मौत अपराध के लिए सदा काल की मौत थी, किन्तु जो जीवन वह जीते हैं वह परमेश्वर के लिए जीते हैं।

 

बपतिस्मा के आयतें :

 

मत्ती 3:11

11 मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूँ जो मन बदलाव✽ को दिखाता है, लेकिन जो मेरे बाद आने वाले हैं, वह मुझ से ज़्यादा ताकतवर हैं। मैं उनकी जूती उठाने के लायक भी नहीं हूँ। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा✽ देंगे।

 

मत्ती 3:6

6 अपने-अपने पापों को मान लेने के बाद यूहन्ना ने उन्हें यर्दन नदी में बपतिस्मा दिया।

 

मरकुस 1:4

4 यूहन्ना आया, और वह पापों (गुनाहों) की माफ़ी के मनबदलाव के लिए बपतिस्में का ऐलान करने के साथ लोगों को यरदन नदी में बपतिस्मा दिया करता था।

 

प्रेरितों के काम 2:38

38 पतरस ने उन्हें जवाब दिया, “अपना मन बदलो और तुम में से हर एक यीशु मसीह के नाम से गुनाहों की मुआफ़ी के लिए बपतिस्मा ले। ऐसा करने से तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे।

 

मरकुस 16:16

16 जो विश्वास लाएगा बपतिस्मा लेगा, मुक्ति पा जाएगा। लेकिन जो विश्वास नहीं लाएगा, सज़ा से मुक्त नहीं हो पायेगा

 

प्रेरितों के काम 22:16

16 अब तुम देर क्यों कर रहे हो? उठो और बपतिस्मा लो। और उनका (यीशु का) नाम लेकर अपने पापों को धो डालो।’

 

रोमियों 6:3

क्या तुम्हें यह नहीं मालूम कि हम जितनों को यीशु मसीह में बपतिस्मा दिया गया, वह यीशु की मौत में बपतिस्मा था।

 

लूका 3:21-22

 

21 जब लोग वहाँ आकर बपतिस्मा ले रहे थे, यीशु को भी बपतिस्मा दिया गया। जब यीशु प्रार्थना कर रहे थे, आसमान खुल गया।

22 एक फ़ाख्ते की शक्ल में पवित्र आत्मा उनके ऊपर उतरा और आसमान से एक आवाज़ आयी, “तुम मेरे प्रिय बेटे हो। मैं तुम से खुश हूँ।”

 

1 कुरिन्थियों 12:13

13 इसलिए कि एक देह में हम सब को, एक ही आत्मा में बपतिस्मा दिया गया। चाहे यहूदी, या यूनानी या गुलाम या स्वतन्त्र हम सभी को एक ही आत्मा दिया गयाहै।

 

प्रेरितों के काम 1:5

5 वह यह कि यूहन्ना ने तुम्हें पानी से बपतिस्मा दिया था, लेकिन बहुत जल्दी ही तुम पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाओगे।

 

प्रेरितों के काम 10:47

47 तब पतरस ने कहा, “जिन लोगों ने हमारी तरह पवित्रात्मा पाया है, क्या उनके बपतिस्मा लेने में कोई रोक लगा सकता है?”

 

प्रेरितों के काम 19:4

4 तब पौलुस ने कहा, “इस में कोई शक नहीं है, कि यूहन्ना ने तुम्हें मन बदलाव का बपतिस्मा दिया था।” लेकिन उसने कहा था, कि “यीशु मसीह जो आने वाले हैं, उन्हीं पर तुम्हें विश्‍वास होना चाहिए।”

 

प्रेरितों के काम 2:41

41 तब जिन लोगों ने खुशी से उसकी बातों को स्वीकार किया था, उन्हें बपतिस्मा दिया गया। उसी दिन लगभग तीन हज़ार लोग उन में मिल गए।

 

प्रेरितों के काम 8:12-13

12 लेकिन जब उन्हों ने परमेश्‍वर के राज्य के सम्बन्ध में फ़िलिप्पुस की बातों और यीशु मसीह के नाम पर विश्‍वास कर लिया, स्त्री और पुरुषों को बपतिस्मा दिया गया।

13 शमौन ने भी स्वयं विश्‍वास किया। बपतिस्मा पाने के बाद फ़िलिप्पुस के साथ-साथ रहा। वह बड़े-बड़े सामर्थ के कामों और चिन्हों को देखकर अचरज से भर जाता था।

 

प्रेरितों के काम 19:4-5

4 तब पौलुस ने कहा, “इस में कोई शक नहीं है, कि यूहन्ना ने तुम्हें मन बदलाव का बपतिस्मा दिया था।” लेकिन उसने कहा था, कि “यीशु मसीह जो आने वाले हैं, उन्हीं पर तुम्हें विश्वास होना चाहिए।”

5 यह सुनने के बाद उन्हें प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा दिया गया।

 

कुलुस्सियों 2:12

12 और तुम बपतिस्मे में मसीह के साथ गाड़े गए, उन्हीं में परमेश्‍वर की सामर्थ के द्वारा विश्‍वास से जिलाए भी गए, जिन्होंने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया है।

 

प्रेरितों के काम 10:48

48 तब उसने हुक्म दिया कि यीशु मसीह (परमेश्‍वर पिता, पुत्र और पवित्रात्मा) के नाम से उन्हें बपतिस्मा दिया जाए। उन्हों ने उससे बिनती की कि कुछ और दिन तक वह उनके साथ रहे।

प्रेरितों के काम 11:16

16 तब वही बात मुझे याद आयीः ‘यूहन्ना ने तुम्हें पानी से बपतिस्मा दिया था, लेकिन तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा मिलेगा।’

 

यूहन्ना 1:33

33 मैं तो उन्हें पहचानता नहीं था, लेकिन जिन्होंने मुझे पानी से बपतिस्मा देने को भेजा था, उन्हीं ने मुझ से कहा था, कि जिस पर तुम आत्मा को उतरते और ठहरते देखो, वही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देने वाले हैं।

 

यूहन्ना 3:5

5 यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूँ, जब तक कोई व्यक्ति पानी और आत्मा से न जन्में, तब तक वह परमेश्वर के राज्य में दाखिल नहीं हो सकता।

 

यूहन्ना 3:16

16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उन्हों ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उन पर विश्‍वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।

 

गलातियों. 3:27

27 तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा पाया है उन्हों ने मसीह को ओढ़ लिया है।

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