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Apne satru ko pehchane

Apne satru ko pehchane

बाइबल “इस दुनिया” के बारे में भी ज़िक्र करती है, जिसका मतलब है मौजूदा हालात और लोगों के जीने का तौर-तरीका यहोवा ने कानून के करार के ज़रिए

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ऐसी व्यवस्था की शुरूआत की जिसे इसराएलियों या यहूदियों का ज़माना भी कहा जा सकता है। मगर बाद में उसने यीशु मसीह के फिरौती बलिदान के ज़रिए एक दूसरी व्यवस्था की शुरूआत की,

जो खासकर अभिषिक्‍त मसीहियों से जुड़ी है। इससे एक नया दौर शुरू हुआ जिसमें वे बातें पूरी होने लगीं जो कानून के करार में दर्शायी गयी थीं।

  • शैतान उनके लिए बहुत कमजोर है जो यीशु मसीह के साथ जीवन जी रहे हैं। जानते हैं जो प्रभु का वचन नहीं पड़ते वो क्यों नहीं पड़ते ?

क्यों की वे अपने को परमेश्वर से भी ज्यादा बुद्धिमान समझते हैं। मैने ऐसे बहुत सारे लोगों को देखा है जब वो प्रभु यीशु को नहीं जानते थे तो उनकी कन्डीशन बहुत बुरी थी

उनकी फाइनेंनसियल कन्डीशन बहुत खराब थी और जब वो प्रभु में आए नए नए प्रार्थना बहुत जोश में करते थे लेकिन जब परमेश्वर ने उन्हें नया नौकरी बिज़नेस में उठाया

आज वही लोगों का प्रार्थना जीवन सुन्य(zero) हो चुकी है । पहले परमेश्वर के लिए उनके जीवन में जगह थी पर अब पैसों ने परमेश्वर की जगह ले ली।

इसलिए यीशु मसीह ने अपने 13% प्रचार पैसों के ऊपर दी है।

  • आइए आज जो लोग बाईबल पड़ते हैं उनके बारे में कुछ केहना चाहता हूं ! पुराने नियम के अंदर भजन सायता में एक वचन है और उसमें ऐसा लिखा गया है

क्या ही धन्य है वे लोग परमेश्वर पिता की इस व्यवश्ता के किताब को दिन और रात मनन करते हैं वे उन पेड़ों के नाई हैं जिन कि जड़े पानियों में जा रही है वे हरे भरे रहगें ।

आप जानते हो पुराने नियम में जिस चीज पर सबसे ज्यादा जोर देने को कहा गया है वो है मनन का मतलब पढ़के उस चीज को याद रखना।

लेकिन नए नियम में यीशु ने जिस चीज को ज्यादा जोर डालने को कहते हैं वो है प्रकाशन ! की तुम्हें प्रकाशन मिले ।

जानते हो मनन करना एक व्यक्ति को शास्त्री बनाता है लेकिन प्रकाशन एक व्यक्ति को चेला बनाता है।

जानते हो प्रकाशन क्या होता है ?आज कल अधिकतर लोग प्रकाशन क्यों ढूंढते हैं ?

ताकि बता के लोगों का आदर खरीद सके । प्रभु तुम्हें प्रकाशन इसलिए नहीं देते हैं कि तुम दूसरो को जा जा कर बताओ ।

ऐसे लोग हैं जो प्रकाशन खुद के उन्नति के लिए नहीं पर दूसरों को बताने के लिए चाहते हैं।  लेकिन प्रकाशन खुद के उन्नती के लिए परमेश्वर पिता से मांगना चाहिए।

इसलिए पोलुस के लिए लिखा गया है परमेश्वर ने उसके बाजु में कुछ प्रोब्लेम दिया था उसको कहीं ऐसा ना हो प्रकाशनों के वजह से फूल ना जाए ।

प्रकाशन क्या होता है ? प्रकाशन ऐसी चीज है जो मानव बुद्धिमानी  (wisdom) से समझना ना मुमकिन है परमेश्वर अपने आत्मा के द्वारा समझाता है।

उदाहरण : यीशु एक जगह पर प्रार्थना करने के लिए ऊपर गया और जैसे ही वह ऊपर गया वहां उसे एलियाह और मुुसा मिलने के लिए आए ये बात देख कर पत्तरस कहता है

प्रभु क्या में तम्बू बनाऊं ताकि आप लोक बैठ कर आराम से बाते कर सको ऊपर से यानी की स्वर्ग से आवाज आई ये मेरा प्रिय पुत्र है इसकी सुनो

अब एक बात गोर किजिए पत्तरस को कैसे पता चला की ये एलियाह और मुुसा है लेकिन वो तो 900 साल पहले आए थे याद रखना वो एक प्रकाशन था वो प्रकट किया गया था पत्तरस पर।

अगर आप चाहते हो कि परमेश्वर अपनी पहचान आपको बताए आप पर प्रकट करे परमेश्वर बताए कि वो कोन है तो सुनिए उसके लिए एक चीज आपको करनी पड़ेगी ।

याद रखिए इस बात को मस्सी के अंदर सिर्फ पापों की क्षमा मुफ्त में है बाकी हर चीज के लिए कीमत है और जानते हो वो कीमत क्या है  ? और वो कीमत है आपका समय ।

जो अधिकतर लोग परमेश्वर को अपना समय देना बेवकूफी समझते हैं। उनको लगता है बिज़नेस करना , बच्चों को समालना ,

नौकरी करना हर चीज करना पहले है और परमेश्वर को बादमें बचा कुचा समय देना उनके लिए अच्छा है। कोई बात नहीं आपकी 600 साल भी पूरा हो जाए तो भी आपको परमेश्वर का प्रकाशन नहीं मिलेगा ।

में उन लोगों की बात कर रहा हूं जो आवश्यक रूप से (necessarily, radically) परमेश्वर के लिए समय निकालते हैं।

प्रकाशन का मतलब है ऐसी चीज जो इंसानी बुद्धि से समझना कठिन ही नहीं बल्कि नामुमकिन है आप सोचो पवित्र आत्मा अगर पतरस के अंदर प्रकट ना करते तो

क्या सोचते रहता वो अंदाजा लगाता रहता कि ये कोन होगा । जिनको परमेश्वर का प्रकाशन नहीं है वो अंदाजा लगा कर बाईबल पड़ते हैं ।

2000 साल पहले चेलों को प्रकाशन मिलता था आज कलिश्या को प्रकाशन क्यों नहीं मिलता । पोलुस ने प्रार्थना की थी में प्रार्थना करता हूं कि इनलोगों को ज्ञान और प्रकाशन की आत्मा मिले

और आखरी में कहता है इनकी हृदय की आंखे ज्योति मय हो बाईबल को समझने के लिए चतुर मन की जरूरत नहीं है साफ हृदय की जरूरत है ।

जरा सोचिए 3 साल पहले आपको किसीने चिट किया था 2 साल पहले किसीने आपके पैसे ले के नहीं दिया था और

1 साल पहले किसीने आपको वादा कर के पूरा नहीं किया था क्या आपका मन उन लोगों के प्रति  साफ़ (clean) है ।

यीशु ने एक जगा ऐसा कहते हैं है पिता में तुझे धन्यवाद देता हूं क्यों की तूने ये बात बालकों पे प्रकट की है । पता है बच्चों पे क्या अच्छी बात है ?

बड़ों को मनाना बहुत कठीन बात है लेकिन बच्चों को मनाना बहुत ही आसान है। जानते हो प्रकाशन किन्हें मिलता है ?

प्रकाशन उन्हें मिलता है जिनके हृदय साफ़ है जानते हो हृदय को साफ़ केसे रखा जाता है सोचो जब आप को कोई डांटता है कोई आपको बुरा भला कहता है

कोई आपके पिट के पीछे गंदी गंदी बाते करता है और विचार आपके अंदर घुसते रहतें हैं लेकिन आप बोलते हो नेइ प्रभु तू उसका न्याय कर में गंदगी नहीं रखूंगा अपने अंदर इसे कहते हैं

हृदय को सुध रखना और जानते हो ऐसे लोगों को क्या आशिष मिलती है ? ऐसे लोगों पर परमेश्वर प्रकट होता है ऐसे लोगों पर प्रकाशन मिलता है।

एक दिन एक आदमी बाईबल पढ़ रहा था और पढ़ते पढ़ते बाईबल के सबसे कठिन लेटर पर आया इब्रानियों के पत्री पर और वो क्या पढ़ रहा था

मिलाप वाला तम्बू और जानते हो उसकी पत्नी बेचारी किचेन में खाना पका रही थी और उसका पसीना माथे पर से बेहे रहा था और बच्चा बेचारा भुक के लिए तड़प रहा था

और ये आत्मिक पति परमेश्वर से बोल रहा था प्रभु मुझसे बात कर प्रभु बोला बाईबल बंद कर और जा अपनी पत्नी की मदत कर । जानते हो लोग बाईबल क्यों पड़ते हैं ताकि प्रकाशन पा सके ।

प्रकाशन उन्हें मिलता है जिनका हृदय साफ़ है जिनको किसी से कोई सिकायत नहीं है । लुधियाना में एक परमेश्वर के जन थे साधू सुंदर सिंह उन पर परमेश्वर प्रकट हुआ था।

कोई पुत्र को नहीं जानता केवल पिता और ना कोई पिता को जनता है केवल पुत्र और वोही जिस पर पुत्र प्रकट करना चाहे ।

इसलिए एक जगह पर ऐसा लिखा गया है जब परमेश्वर को ये भाया की वह अपने पुत्र को मुझमें प्रकट करे पोलुस कहता है।

इसी किताब (बाईबल) को पढ़ने वाले लोगों ने प्रभु यीशु को क्रॉस पर चढ़ाया था क्यों की उन्होंने किताब समझा था उस परमेश्वर को नहीं याद रखिए आज भी जो इस किताब को जानते हैं

इस में ये लिखा है और उस में वो लिखा है पर उस में लिखा वो गहराई को नहीं जानते हैं वो सिर्फ़ और सिर्फ़ कठोर होते हैं ऐसे मत बनिए ।

अगर आप प्रभु के इस वचन को समझना चाहते हैं तो किसी के लिए नफ्रत मत रखो । अगर आपको ऐसा लगता है कि किसी के लिए आपको जलन होतो है

या उसको अच्छे से सुनाना चाहते हो और बाईबल खोलते हो , तो अच्छा होगा कि पहले बाईबल बंद कर लो परमेश्वर के सामने जाओ

और अपना संबंध को अच्छा बनाओ और बोलो प्रभु मुझे माफ़ कर मेरे में गड़बड़ आ गई है मुझे ठीक कर दीजिए उसके बाद वचन पढ़ो नहीं तो में सच्च कहता हूं आप अपनी समय बरवाद कर रहे हो।

बाईबल खोलने से पहले 10 मिनिट चुप चाप से बैठ जाओ और प्रभु से कहो प्रभु मेरे अंदर किसी के लिए गंदगी है तो बता भले ही आप पास्टर हो या कोई भविष्यदक्ता  हो या

और कोई बड़े माहा हस्ती क्यों ना हो पर परमेश्वर अगर आप को आपकी गलती दिखाऐ आप उन्हें माफी मांगना चाहे वो आपसे छोटा क्यों ना हो  ।

जिस आदमी ने अपने जीवन में मै मै कहता रहता है मतलब अपने आप को बहुत इम्पोर्टेंट समझना चालु कर दिया है हम साफ देखते हैं वो कुछ ही समय में गिरेगा ।

गिरने का मतलब क्या है ?(Girne ka matlab kya hai ?)

  • चर्च में कुछ ऐसे लोग शायद होंगे जो अनैतिक जीवन बिता रहे थे। लेकिन याकूब शायद आत्मिक दायरे के व्यभिचार की बात करता है,

क्योंकि वह तुरन्त दुनिया से दोस्ती के बारे में कहता है।आत्मिक व्यभिचार के बारे में देखें यिर्म. 2:2; 3:6-9; यहेज. 16:31-34; होशे 1:2. इसका मतलब है

कि परमेश्‍वर के कहलवाने वाले लोग किसी और चीज़ के लिए परमेश्‍वर को छोड़ दें।

दुनिया से दोस्ती परमेश्‍वर के लिए नफ़रत क्यों हैं? यहाँ दुनिया का मतलब लोगों की इस दुनिया से है जो अपराध से सनी हुयी है।

यह दुनिया परमेश्‍वर के खिलाफ़ में बलवा करने वाली है। यह बुराई से प्रेम करती है, परमेश्‍वर से नफ़रत। इसलिए इस दुनिया से दोस्ती का मतलब है

सच्चे प्रभु के दुश्मनों के साथ मिल जाना और प्रभु का दुश्मन हो जाना है। हम इन बातों को ध्यान से समझें।

क्या हम इस दुनिया के मित्र बनना चाहेंगे जिसने यीशु को क्रूस पर चढ़ाया? क्या हम इसके लक्ष्य, आकांक्षा, आमोद प्रमोद के तरीकों और रास्तों को अपनाएँगे? हम सावधान रहें। रोमि. 12:2 से मिलाएँ।

  • मनुष्यों के बारे में और संसार के बारे में बाईबल बहुत कुछ कहती है। दुनिया परमेश्‍वर को नहीं जानती (यूहन्ना 1:10)।

लोग आत्मिक अन्धेरे को पसन्द करते हैं मसीह और उनके मानने वालों से नफ़रत (यूहन्ना 7:7; 15:19)।

  • इसका “शासक” और “ईश्‍वर” शैतान है (यूहन्ना 12:31; 2 कुरि.4:4) परमेश्‍वर के आत्मा को हासिल नहीं कर सकता (यूहन्ना 14:17) इसका ज्ञान बेवकूफ़ी है (1 कुरि. 1:20; 3:19) यह अस्थायी है

(1 कुरि. 7:31; 2 कुरि. 4:18) बिना ईश्‍वर और बिना आशा के हैं (इफ़ि. 2:12) इसके साथ दोस्ती, परमेश्‍वर से दुश्मनी है (याकूब 4:4) यह भ्रष्ट है (1 पतर. 1:4) यह घमण्ड और अभिलाषा से भरी है

(1 यूहन्ना 2:15-17) यह दुष्टता में है (1 यूहन्ना 5:19) आश्चर्य नहीं कि पौलुस लोगों को कहता है कि इसके समान न बनें। दुनिया में ऐसी ताकतें हैं, जो लोगों को ढालती हैं और दुष्टता की प्रेरणा देती हैं।

  • विश्‍वासियों को मसीह के समान बनना चाहिए। यह परमेश्‍वर के आत्मा का भीतरी काम है। यह मन के नए बनते जाने से है (इफ़ि. 4:22-23)।

हमारे विचार बहुत मायने रखते हैं। हमारे बर्ताव को वे संचालित करते हैं।

  • एक बदला हुआ जीवन जीने के लिए हमारे विचार आधीन होना और मन परमेश्‍वर के सत्य से भरा होना ज़रूरी है ( 2 कुरि. 10:5; कुल. 3:16; भजन 1:1-3; फ़िलि. 2:5; 4:8; इब्रा. 8:10)।

अपने पूरे मन से हम को परमेश्‍वर से प्यार करना चाहिए (मत्ती 22:37)। इसे नए किए जाने की ज़रूरत हमें है।

जो लोग अपने आप को परमेश्‍वर के प्रति समर्पित नहीं करते और बदलाव के लिए परमेश्‍वर के आत्मा से सहयोग नहीं करते, अपने लिए परमेश्‍वर की इच्छा नहीं जान पाएँगे।

यदि हम उस अच्छी योजना को जानना चाहेंगे, तब हमें वह करना चाहिए, जो वह हमसे कहते हैं।

  • यीशु मसीह ने पहली बार साफ़ तरीके से कहा कि संसार के लोग (सभी अविश्‍वासी) उन से घृणा करते हैं हालांकि यह बात 3:20 में पहले ही से थी।

वह घृणा का कारण भी बताते हैं – लोग यह सुनना नहीं चाहते कि उनके कार्य बुरे हैं। वे नहीं चाहते थे कि दूसरे लोग जानें कि वे क्या हैं।

संसार उनके भाईयों से उस समय बैर नहीं रख सकता था, क्योंकि वे उस समय तक संसारिक थे, इसलिए उनके विरोधी थे।

  • यूहन्ना रचित सुसमाचार में, 70 से अधिक बार शब्द ‘संसार’ (जगत या दुनिया) उपयोग हुआ है, जो कि बाईबल की किसी भी पुस्तक से अधिक है।

यीशु ने यह प्रगट किया कि संसार खोया हुआ है , अँधेरे में है , परमेश्‍वर से घृणा करता है , शैतान के द्वारा शासित है , परमेश्‍वर की आत्मा को ग्रहण करने के योग्य नहीं है , अपराधी और अपराधी है ।

अपनी पहली पत्री के प्रथम दो पदों में यूहन्ना ने संसार के विषय में बताया है (1 यूहन्ना 2:16; 5:19)। रोमि. 12:2; याकूब 4:4; और 1 यूहन्ना 2:16.

  • अविश्‍वासी संसार, जो सच्चे परमेश्‍वर की आज्ञा नहीं मानता है। 1 यूहन्ना 2:16; 5:19 देखें। वह संसार अंधकार में है और उसी में बना रहना चाहता है।

इस गिरी हुयी दुनिया में कुछ भी ऐसा नहीं है, जो विश्‍वासी के प्रेम के लायक है। ऐसी इच्छाएँ जो इन्सान के बुरे स्वभाव से निकलती हैं, ऐसे इच्छाएँ देखने में आती हैं, घमण्ड से आती हैं –

यही चीजें दुनिया में हैं – तुलना करें उत्पत्ति 4:21; मत्ती 15:19; रोमि. 1:28-32. इसलिए हम दुनिया के समान न बनें।

  • नियमों-आज्ञाओं ने बुरी इच्छाओं को उत्पन्न किया। जिस कार्य को करने पर दोष लगता है, उसे करने की इच्छा मनुष्य में होती है। मना किया हुआ फल मीठा लगता है। किन्तु इस सब का परिणाम मौत है । 👇

रोमि 3:20👇

20 इसलिए सिर्फ़ नियमशास्त्र के पालन करने से कोई व्यक्‍ति परमेश्‍वर की निगाह में धर्मी (सिद्ध) ठहराया नहीं जाएगा, क्योंकि नियमशास्त्र ही के द्वारा मालूम पड़ता है, क्या बुरा है और क्या नहीं।

  • मूसा के माध्यम से जिन विधियों और आज्ञाओं को परमेश्‍वर ने इस्राएल को दिया था, वही “नियमशास्त्र” है।

इसलिए कि इन बातों को करने में कोई खतरा नहीं हो सकता, इन के द्वारा मुक्‍ति भी नहीं पा सकता। दुष्ट स्वभाव के कारण पवित्र सिद्धान्तों का पालन असंभव है।

एक नियम को तोड़ने का अर्थ है, सभी नियमों को तोड़ना (याकूब 2:10)।👇

याकूब 2:10👇

10 वह इन्सान, जो एक को छोड़ कर सभी आज्ञाओं का पालन करता है, उस इन्सान की तरह है जिसने पूरी आज्ञाओं को नहीं माना है।

  • कोई भी जन आज्ञा को तोड़ने वाला है यदि वह सभी आज्ञाओं को मानता है लेकिन एक को तोड़ देता है।

यदि वह प्रेम करने के हुक्म को नहीं मानता है तो बहुत बड़ी आज्ञा को तोड़ देता है और बड़ा अपराधी है।

इसलिए हम देखते हैं कि पक्षपात करना एक छोटा गुनाह नहीं है। हम में से हर एक ने सृष्टिकर्ता नियम को कहीं न कहीं तोड़ा है।

इसलिए पूरे नियम के तोड़े जाने का दण्ड हमें मिलना चाहिए (कुल. 3:10)। हम में से हर एक को यीशु के द्वारा माफ़ी चाहिए (रोमि. 3:9, 19, 23) “एक को छोड़” यूनानी शब्द का मतलब है

लड़खड़ाना’ लेकिन संदर्भ के हिसाब से याहवे की आज्ञा को न मानना। देखें 3:2 जहाँ वही शब्द का इस्तेमाल हुआ है।

रोमि 4:15

15 क्योंकि नियमशास्त्र के पालन नहीं किये जाने से प्रकोप पैदा होता है, लेकिन जहाँ नियमशास्त्र है ही नहीं उसके तोड़े जाने का सवाल ही नहीं उठता।

  • जो लोग परमेश्‍वर के नियमों के पालन से मुक्ति पाना चाहते हैं वे अपने ऊपर और अधिक परमेश्‍वर का क्रोध लाते हैं। क्योंकि नियम के अनुसार करने के बजाए वे उसे तोड़ते हैं।

नियम के अनुसार न करने से वे और अधिक अपराधी ठहरते हैं, तुलना करें  गल. 3:10) यदि मुक्‍ति पाने के लिए मूसा के नियम का पालन आवश्यक होता, तो कोई भी न बच पाता।

यहूदी उसके अनुसार कर न सके और गैरयहूदियों के पास वह थी ही नहीं।

रोमि 5:20

20 इसके अलावा नियमशास्त्र इसलिए आया ताकि बुराई का खुलासा हो सके। किन्तु जहाँ अपराध का खुलासा हुआ, कृपा और अधिक बढ़ गयी।

  • इसलिए कि आज्ञाएँ तोड़ी जाती हैं, अपराध बढ़ता है। जब आज्ञाएँ नहीं हैं, तो तोड़ने का सवाल ही नहीं (4:15) 7:7-12 में पौलुस दिखाता है कि परमेश्‍वर की आज्ञाएँ गुनाह को बढ़ाती हैं।

नियमों को देने में उद्देश्य यह नहीं था कि वह गुनाह को बढ़ने देना चाह रहे थे (बिना आज्ञा और नियम के वह बढ़ रहा था – उत्पत्ति 6:5,11; 8:21),

लेकिन इसलिए कि लोग दया की आवश्यकता को जानें और उनकी दया सारी महिमा और सामर्थ में प्रगट हो।

रोमि 6:16

16 क्या तुम यह नहीं जानते हो, कि तुम गुलाम के रूप में जिसकी आज्ञा मानने के लिए अपने आप को दे देते हो, उसी के तुम गुलाम हो।

या तो गुनाह के गुलाम, जो मौत तक ले जाता है या आज्ञाकारिता के गुलाम, जो धार्मिकता (खरे-जीवन) की ओर ले चलती है।

  • लोग यह सोच सकते हैं, कि वे अपराध करने के लिए “आज़ाद” हैं। उनका अपराध में बना रहना प्रगट करता है, (बर्बादी) कि उनके पास कोई आज़ादी नहीं है और वे गुनाह के गुलाम हैं

(यूहन्ना 8:34; 2 पतर. 2:19) जब वे गुनाह करते हैं, गुनाह को उनके ऊपर अधिकार मिलता है और वह उन्हें अपने वश में रखता और बारम्बार वही करने को प्रेरित करता है।

अन्त में मौत को उत्पन्न करता है। हमारे लिए एक और बात संभव है। यह परमेश्‍वर के प्रति आज्ञाकारिता है, जिसका अर्थ है,

गुनाह का इन्कार करना और अपने आपको उसके लिए मृतक जानना। यह सही जीवन का पथ है। इन दोनों के बीच का कोई मार्ग नहीं है। मत्ती 7:13-14 से तुलना करें।

यूहन्ना 8:34

34 यीशु ने उनको उत्तर दिया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूँ कि जो कोई अपराध करता है, वह अपराध का गुलाम है।

  • अब यीशु इतना स्पष्ट बोलते हैं कि सभी समझ सकते हैं। कितने ही ऐसे लोग हैं जो यह सोचते हैं कि परमेश्‍वर के वचन द्वारा,

लगाए गए सारे प्रतिबंधों को हटाने और अपने मार्ग पर चलते रहने के द्वारा वे आज़ादी प्राप्त करते हैं। किंतु अपनी इच्छा के अनुसार चल कर अपने स्वयं को स्वतंत्र करने का

प्रयत्न करने के द्वारा ताकि अपने शरीर की इच्छाओं की पूर्ति कर सकें, वे अपने लिये जंजीर बनाकर निर्दयी स्वामी – अपराध के दास बनते जा रहे हैं।

रोमि 6:21

21 जिन बातों में अभी तुम शर्म महसूस करते हो, पुराने समय में तुम्हें उन बातों से क्या फ़ायदा होता था? क्योंकि उन सभी बातों का अन्त मौत है।

  • रोम के विश्‍वासियों ने पूरी तरह से मन बदला था और स्वयं को परमेश्‍वर के प्रति सौंप दिया। वे अपने पुराने जीवन से शर्माते थे।

यदि कोई व्यक्‍ति विश्‍वासी होने का दावा करता है और अपने पुराने जीवन के गुनाहों से लजाता नहीं, तो सचमुच उसके जीवन में कुछ गड़बड़ी है।

वह कभी भी वापस पुराने गुनाहों में जा सकता है (2 पतर. 2:22)। किसी के लिए भी गुनाह के जीवन का अन्त मौत ही है, चाहे वह कुछ भी क्यों न कहे।

2 पतर. 2:22

22 लेकिन वे एक सच्ची कहावत के जैसे हैं: “कुत्ता अपनी उल्टी को फिर चाटता है और धुला-धुलाया सूअर फिर से कीचड़ में जाता है।”

  • पहला नीतिवचन नीति. 26:11 में है लेकिन दूसरे कहावत का स्त्रोत नहीं पता है। सच्चे विश्‍वासी भेड़ें हैं (यूहन्ना 10:27) कुत्ते और सुअर नहीं।

भेड़ न तो “उल्टी” या “कै” खाती है न ही कीचड़ में लोटती है। यह संभव है कि यीशु के लोग गुनाह में गिर जाएँ (याकूब 3:2; 1 यूहन्ना 2:1;

गल. 2:11-13; 5:17) लेकिन वे उसमें पड़े नहीं रहते हैं (नीति. 24:16; 1 यूहन्ना 3:9)। पतरस ऐसे लोगों की सही तस्वीर देता है जो किसी वजह से धार्मिक बन जाते हैं।

वे कुछ समय के लिए पुरानी बुराईयों को छोड़ देते हैं। लेकिन बहुत जल्दी उनका असली रूप बाहर आ जाता है और वे पुरानी बुराई में फँस जाते हैं। एक नहलाया गया सुअर, सुअर ही रहेगा, बदलेगा नहीं।

सत्रुता के आयतें(Satruon ki ayete) :👇

1 यूहन्ना 2:16

16 जो कुछ भी इस दुनिया में है – पुराने स्वभाव की चाहत, आँखों की अभिलाषा और ज़िन्दगी (जीविका) का घमण्ड, पिता की ओर से नहीं है, लेकिन इस संसार की ओर से है।

यूहन्ना 15:18

18 यदि संसार तुम से दुश्मनी रखता है, तो तुम जानते हो कि उसने तुम से पहले मुझ से भी दुश्मनी रखी। संसार अपनों से प्रीति रखता है।

यूहन्ना 7:7

7 संसार तुम से दुश्मनी नहीं कर सकता, लेकिन वह मुझ से करता है। क्योंकि मैं उसके विरोध में यह गवाही देता हूँ कि उसके काम बुरे हैं।

रोमि 12:2

2 इस दुनिया के समान मत बनो, लेकिन तुम्हारे मन के बदले जाने के कारण खुद बदलते जाओ, ताकि तुम परमेश्‍वर की सही, अच्छी और अपनाने लायक इच्छा की पुष्टि कर सको।

यूहन्ना 3:19

19 सज़ा की आज्ञा का कारण यह है कि रोशनी जगत में आयी और मनुष्यों ने अन्धेरे✽ को रोशनी से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उनके काम बुरे थे।

गलातियों 1:4

4 हमारे परमेश्‍वर और पिता की मरज़ी के मुताबिक मसीह ने हमारे पापों के लिए खुद को दे दिया ताकि हमें इस दुष्ट दुनिया की व्यवस्था से छुटकारा दिलाए।

यूहन्‍ना 15:19

19 अगर तुम दुनिया के होते तो दुनिया तुम्हें पसंद करती क्योंकि तुम उसके अपने होते। मगर तुम दुनिया के नहीं हो बल्कि मैंने तुम्हें दुनिया से चुन लिया है, इसलिए दुनिया तुमसे नफरत करती है।

2 तीमुथियुस 4:10

10 इसलिए कि देमास ने इस ज़माने  के मोह में पड़कर मुझे छोड़ दिया है और वह थिस्सलुनीके चला गया। क्रेसकेंस गलातिया को और तीतुस दलमतिया को चला गया है।

रोमि 12:20

20 इसलिए “यदि तुम्हारा दुश्मन भूखा है, उसे खाना खिलाओ, यदि वह प्यासा है, उसे पीने के लिए कुछ दो। ऐसा करने से तुम उसके सिर पर जलते कोयलों का ढेर रखोगे।”

निर्गमन 14:14

14 यहोवा खुद तुम्हारी तरफ से लड़ेगा और तुम चुपचाप खड़े देखोगे।”

व्यवस्थाविवरण 1:30

30 तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा तुम्हारे आगे-आगे जाएगा और वह तुम्हारी तरफ से लड़ेगा, ठीक जैसे वह मिस्र में तुम्हारे देखते तुम्हारी तरफ से लड़ा था।

व्यवस्थाविवरण 20:4

4 क्योंकि तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा तुम्हारे साथ-साथ चल रहा है और वह तुम्हारी तरफ से दुश्‍मनों से लड़ेगा और तुम्हें बचाएगा।’

2 इतिहास 20:29

29 जब सब देशों के राज्यों ने सुना कि यहोवा ने इसराएल के दुश्‍मनों से युद्ध किया है, तो परमेश्‍वर का खौफ उन सबमें समा गया।

निर्गमन 15:13, 14

13 अपने अटल प्यार की वजह से तूने अपने छुड़ाए हुए लोगों को राह दिखायी है, तू अपनी शक्‍ति से उन्हें अपने पवित्र निवास तक ले चलेगा।

14 देशों के लोग यह खबर सुनेंगे और थरथराएँगे, पलिश्‍त के रहनेवालों को डर और चिंता जकड़ लेगी।

यहोशू 9:3

3 गिबोन के लोगों ने भी सुना कि यहोशू ने यरीहो और ऐ का क्या हाल किया है।

यहोशू 9:9

9 उन्होंने कहा, “तेरे ये दास एक दूर देश के रहनेवाले हैं। हम इसलिए आए हैं क्योंकि हमने तेरे परमेश्‍वर यहोवा के नाम के बारे में सुना है।

हमने यह भी सुना है कि वह कितना महान है और उसने मिस्र में कैसे बड़े-बड़े काम किए।

2 इतिहास 17:10

10 यहूदा के आस-पास के सभी राज्यों में यहोवा का खौफ छा गया और उन्होंने यहोशापात से लड़ाई नहीं की।

भजन 71:10

10 मेरे दुश्‍मन मेरे खिलाफ बोलते हैं, जो मेरी जान के पीछे पड़े हैं, वे मिलकर साज़िश रचते हैं,

2 शमूएल 17:1, 2

1 फिर अहीतोपेल ने अबशालोम से कहा, “मुझे इजाज़त दे कि मैं 12,000 आदमी चुनकर आज रात ही दाविद का पीछा करूँ।

2 मैं ऐसे वक्‍त पर उस पर टूट पड़ूँगा जब वह थका-माँदा और कमज़ोर होगा। मैं उसे डरा दूँगा, तब उसके साथ जितने लोग हैं वे सब भाग जाएँगे। और राजा जब अकेला रह जाएगा तो मैं उसे मार डालूँगा।

याकूब 4:4

4  हे व्यभिचारी लोगो क्या तुम्हें यह नहीं मालूम कि इस दुनिया की दोस्ती तुम्हें परमेश्‍वर का दुश्मन बनाती है?

मैं फिर कहता हूँ कि यदि तुम्हारा मकसद इस दुनिया का मज़ा लूटना है, तुम परमेश्‍वर के दोस्त नहीं हो सकते।

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |
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