Anugrah ke vare me Bible kya kehti he ?

 

Anugrah ke vare me Bible kya kehti he ?

(अनुग्रह के बारे में बाईबल क्या कहती है ?)

  • यह नए नियम का एक महत्वपूर्ण पद है और 100 से अधिक बार उपयोग किया गया है। अयोग्य गुनाहगारों को परमेश्वर द्वारा मुफ़्त में उद्धार का दिया जाना अनुग्रह या कृपा है।

वह उन्हें वह सब कुछ देते हैं जिसकी उन्हें इस संसार में उद्धार पाने के लिये और उनके लिये जीवित रहने के लिये आवश्यकता है। परमेश्वर ने अपने बेटे को हमारे लिये मरने हेतु दे दिया

और अपने आत्मा को हमारे अन्दर वास करने के लिये दिया। यह उनका अनुग्रह था। परमेश्वर का अनुग्रह बड़े ही स्पष्ट और अद्भुत रीति से मसीह में प्रगट हुआ है (2 कुरि. 8:9)।

अनुग्रह पर केस निर्भर रह सकतें हैं ? आईए देखते हैं ?

2 कुरिन्थियों 12:9

9 लेकिन प्रभु यीशु बोले, “मेरा अनुग्रह तुम्हारे लिए काफ़ी है। इसलिए कि मेरी सामर्थ निर्बलता ही में ज़्यादा काम करती है।” इसलिए मैं बड़े आनन्द से अपनी कमजोरियों में गर्व करूँगा, ताकि मसीह की ताकत मुझ में बनी रहे।

 

  • बाईबल ऐसा बताती है पोलुस यहां पर घमंड में घिरने के बहुत बड़े खतरे में दिखाई दे रहा है ; आप जानते हो आत्मिक घमंड कितनी बड़ी खतरनाक चीज है ,

आपको पता है लोगों को अपने बुद्धिमान (intelligent) होने का कितना घमंड है। आप सोचिए क्यों टीवी वाले अपने बॉक्स में एक पुस्तिका(Booklet) देते हैं क्यों ? ताकि आप जान पाओ ये टीवी कैसे चलाते(Operate) हैं।

कई लोग क्या करते हैं उस पुस्तिका(Booklet) को फेक देते हैं क्यों ? क्यों कि वो जानते इसे कैसे चलाते हैं। अगर आप उनको बोलोगे इस (Booklet)को पढ़तो लो तो वो बोलेंगे मुझे सब पता है।

आपको पता है ये जरूरी नहीं है कि लोगों को अपने पैसों पर , गाड़ियों पर , घर पर या वो विदेश(Abroad) से अपनी पढ़ाई कर के आए इस बात पे घमंड हो पर बहुतों को अपने बुद्धिमानी (intelligent) पर भी घमंड है

के में दूसरों से जादा जनता हुं जादा स्मार्ट हुं। ये अधिकत्तर पुराने मस्सियों में पाया जाता है जिन्होंने सीखने को बन्द हि कर दिया है।

 

  • बाईबल ऐसा बताती है के पोलुस एक समय था जब तीसरे स्वर्ग में उठा लिया गया था। आप जानते हो तीन स्वर्ग है एक जो आपको दिखाई देता है चांद सितारे सूरज हैं दूसरा स्वर्ग जहां पर अंतरिक्ष(Space)घूमते रहते हैं

और तीसरा स्वर्ग जहां पर परमेश्वर रहते हैं। पोलुस कहता है में पहला दूसरा स्वर्ग पे नहीं में तीसरा स्वर्ग पर उठाया गया हूं। और उसके बाद बाईबल में लिखा गया है वो मुर्दों को जिलाया था

दुष्ट आत्माएं पोलुस के मुंह के शब्द से निकलती थी उसके ऊपर ऐसा अभिषेक आता था अगर वो कपड़ा ले अपने कुर्ते पर घिस कर आपको देदे और फिर आप किसी और को दे तो वो व्यक्ति चंगा हो जाते थे ,

वो 10 हजार अन्य भाषाओं में बोल सकता था पूरी ऐसीय में घूम घूम के कलिश्या बनाई थी इसके चेले थे सब कुछ था। लेकिन वो एक चीज जानता था ये चीज उसके बहुत करीब आचुकी थी और वो थी आत्मिक घमंड।

लेकिन यहां पे क्या हुआ जब प्रभु ने देखा ये आदमी घमंड में गिर सकता है में आपको आत्मिक घमंड के बारे में बोल रहा हूं ये बहुत खतरा होता है एक होता है चीजों का घमंड और दूसरा होता है

आत्मिक घमंड नबूकदनेस्सर कहता है ये पूरा बैबिलोन मेने बनाया है इसे कहते हैं चीजों का घमंड लेकिन यीशु मस्सी कहता है एक आदमी कहता है में दसवांस देता हूं , में प्रार्थना करता हूं , में उपवास करता हूं ये है आत्मिक घमंड।

इस बात को याद रखिएगा जब यीशु ने कहा धन्य हो तुम जो भूखे और प्यासे हो तुम त्रूप्त किए जाओगे याद रखना अगर आप त्रूप्त हो गए हो उसके बाद क्या वचन लिखा है दयालु बनो जैसे वो दयालु है ताकि तुम पर दया कि जाए।

क्यों ये वचन इसके नीचे आया जानते हो इस बात को जब तुम आत्मिक रीति से पूरी तरह से भर जाओ उसके बाद किसीको तुच्छ मत समझना उनके साथ दया से व्यवहार करना।

यहां पर क्या लिखा है पोलुस को बहुत सारे परमेश्वरीयकृपा(blessings)मिली है पर उसके साथ एक समस्या(problem)भी मिली है और जानते हैं वो समस्या क्या है

पोलुस का एक तरफ़(side) में दर्द था और इसलिए वो प्रभु को इस विषय में प्रार्थना कि और प्रभु ने कहा मेरा अनुग्रह तेरे साथ है। और यहां पर बहुत अच्छी चीज भी लिखी है इसलिए कि

मेरी सामर्थ निर्बलता ही में ज़्यादा काम करती है।” इसलिए मैं बड़े आनन्द से अपनी कमजोरियों में गर्व करूँगा, हम तो निर्बलता में परेशान रहते हैं पर पोलुस अपनी निर्बलता में घमंड करता है

जिसके पास कमजोरियां है उसके पास सामर्थ आती है ; लेकिन जो अपने आपको मजबूत समझते हैं और कहते हैं में 2 घंटा बाईबल पड़ता हूं 2 घंटा प्रार्थना करता हूं अन्य भाषाओं में बात कर सकता हूं

तो नरक में अन्य भाषा के साथ चले जाना इतना घमंड है इनको अपने आत्मिक होने को हर चीज में घमंड। जैसे इस्राएल कहते थे हम इब्राहीम कि संतान है को करेंगे चलेगा युहन्ना कहता है

मत कहो कि तुम इब्राहीम कि संतान हो परमेश्वर पथरों से अपनी संतान निकाल सकता है ; कभी कलिश्या के विषय में अपने जीवन के विषय में जो आपके पास है उसके विषय में घमंड मत करना।

हम सब कमजोरियों से घिरे हुए हैं। लेकिन ये बहुत जरूरी है कि परमेश्वर का अनुग्रह आपकी कमजोरियों को स्पर्श(touch) करे तब जाके कमजोरियां सामर्थ में बदलती है।

 

  • बाईबल ऐसा बताती है एक समय था जब यीशु मसीह के सामने दो नवी आए थे एक ज़िन्दा उठाया गया था और दूसरे को परमेश्वर ने दफनाय था उनका नाम है मूसा और एलिया।

और ये दोनों जब यीशु के समय में  मिलने के लिए आए थे तो लिखा गया है उन्होंने यीशु के साथ कुछ चर्चा कि थी वो ऐसे ही मिलने के लिए नहीं आए थे बहुत जरूरी संदेस देने के लिए आए थे क्यों कि

यीशु मनुष्य थे और वो परमेश्वर पिता के मार्गदर्शन(lead) पर निर्भर(depend) थे और ये दोनों बताने आए थे कि कुछ ही समय के बाद तू पकड़ाया जाएगा लोग तुझ पर मारेंगे थूकेंगे पीटेंगे

और यही वो घड़ी होगी जिसके लिए सब इंतजार कर रहे हैं और ऐसा समय आया जहां पर यीशु ने प्रार्थना कि किद्रोंन के नाले पर और उसके बाद यीशु चेलों के साथ बैठे

और जानते हो चेलों को क्या कहा सुनो रखवाला पकड़वाया जाएगा और तुम सब ठोकर खाओगे वहां पर जब पतरस ने ये बात सुनी कि यीशु मस्सी गिरफ़्तार होंगे तब उसने वहां पर एक वादा किया था

जैसे हम भी कलिश्या पर आते हैं तो वादा करते हैं प्रभु तूने मुझे अपना सही चीज दिखाई है में और कभी नहीं करूंगा। लेकिन दो या तीन दिनों के बाद अपना वादा को रख पाते हो। उसके बाद चार दिन के बाद उससे भी नीचे गिर जाओगे।

अब सुनिए जब आप प्रभु में नहीं थे तब आप गुन्हेगार थे लेकिन जब हमने सचायां सुनी उसके बाद छेड़खानिया की उसके बाद वो पहले से अधिक बुरायां कि।

यीशु ने कहा एक आत्मा जब निकलेगी अगर तुममें वचन नेई पाएगी तो सात ओर आत्मा ले कर आएगी। आप जानते हो यीशु क्या कह रहे थे अगर सच्चाई सुनने के बाद तुमने थोड़ी सी भी नौटंकी कि तो

जब तुम अविश्वासी थे इससे बुरे विश्वासी बनके हो जाओगे।

 

  • बाईबल ऐसा बताती है यीशु ने घोषणा कि के वो मरने जा रहा हूं और पतरस जानते हो वहां पर क्या कहता है यहां पर पतरस खुद पर कितना विश्वास(confident) करता है। पतरस कहता है ये सब छोड़ देंगे तुझे पर में तुझे नहीं छोडूंगा ;

आपको पता है  कितनी बड़ी मुरखता है परमेश्वर से ये कहना कि में ये नहीं करूंगा , अपने आप पर इतना भरोसा करना और प्रभु पर नहीं अपने बल पर सब कुछ ठीक करने कि कोशिश इसे कहते हैं मुरखता कि बात।

मेरे भायों बहनों कभी भी कोई इंसान को ऐसा नहीं केहनी चाहिए कि प्रभु तूने जो मुझ को मेरी अपनी गलती दिखाई है वो में कभी नहीं करूंगा आईनदा से वो भी तेरे मदद के बगैर।

 

  • कहीं बार आज भी लोग प्रभु भोज कि रोटी लेते हैं थोडी भावुक(emotional) हो के कहते हैं प्रभु मेरे लिए मरा और में हमेशा अपनी ही चलाता हूं प्रभु आज मुझे एक मौका दे कहते हैं और आप भी जानते हैं

दो दिनों के बाद वापस आपकी जुवान फिसलनी शुरु हो जाती है वापस मन संसारिक होना चालू हो जाता है फिर आप संसार में घुसना शुरू कर देते हो ; जानते हो इसका मतलब क्या है

जब पतरस ने वादा किया वो साथ चलेगा उसको नहीं छोड़ेगा तब यीशु ने कहा सुन शैतान ने तुझे मुझसे मांगा है मेने तेरे लिए प्रार्थना भी कि है और वो इसलिए मांगा है

ताकि तुम्हें गेहूं के नाई फटके यहां पर एक बात ध्यान दीजिए क्या पतरस ने एक बार भी यीशु से पूछा प्रभु ये सब क्या है जो तू बोल रहा है मुझे जरा समझा लेकिन पतरस ने एक बार भी इस बात को ध्यान से सुना भी नहीं

यीशु ने क्या कहा लेकिन वो अपने पर डटा रहा और एक समय आया जब यीशु गिरफ़्तार हुए तब पतरस के अंदर से उसकी कमज़ोरी ऐसे बाहर आई उसके बाद वो क्या करना शुरू कर दिया  ?

कभी कभी हम एक समय पर तीन से ज्यादा बार गुस्सा कर लेते हैं ; आपको पता है पतरस एक घंटे के अंदर तीन बार एक ही गुन्हा में गिरा।

 

  • यीशु मस्सी ने काहा है जो मेरा इन्कार करेंगे में अपने स्वर्गीय पिता के सामने उनका इन्कार कर दूंगा। आपको पता है पतरस बहुत गंभीर(serious) पाप में गिरा। बहुत सारे लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि

बाईबल को इस इरादे(intention) से बैग में रखते हो कि लोगों को पता ना चले कि में चर्च जाता हूं या कभी कभी आप लोगों को ऐसा कहते हो हं में भी चर्च जाता हूं या कभी कभी परमेश्वर आपको कहता है

उसको सुसमाचार बता वो मुसीबत में है तब आप कहते हो नहीं नहीं ; तो आपको पता है आप भी वही गलती कर रहे हो जो संत पतरस ने किया था ।

आपको पता है हमारे लोग  इन समाज से कितने डरते रहते हैं , उनको अपनी खुद कि इजत के लिए कितनी फिक्र रहती है । लोगों को अपने इजत कि कितनी लालसा रहती है।

अपनी इजत को कायम रखने के लिए वो इतना झूठ बोल देते हैं। सच में किस बात से शर्म करे हम ! जो लोग कहते हैं हमने अपना धर्म बदला है हमने पैसे लिए हैं लेकिन सच्चाई हम जानते हैं प्रभु ने हमारा जिन्दगी बदला है।

ये आप भी जानते हैं यहां पर पैसे नहीं मिलते हैं उल्टा हमे पैसे देने पड़ते हैं। लोगों का मदद करना पड़ता है। क्यों कि हमारे प्रभु ने हमे आज्ञा दी है के जाओ और उनकी मदद करो ।

जिन लोगों को हमारे बारे में पता तक नहीं है हम उन लोगों की फिकर करते हैं क्या ये सही है। अगर उनको पता चलता है हमारी इमेज का क्या होगा । ये तो ग़लत है हमे उनके बारे में नहीं सोचनी चाहिए। हमें प्रभु के तरफ ध्यान देनी चाहिए।

  • एक इंसान के अंदर अगर तुम सामर्थ देख रहे हो तो उसका चाबी है समर्पण। आज लोगों को एक एक घंटा फोन पे बात करने के लिए समय है लेकिन परमेश्वर को मदद मांगने के लिए आपके पास समय नहीं है।

हम इतनी कमजोरियों से घिरे हुए हैं इतनी निर्बलता से घिरे हुए हैं यहां देखिए पोलुस कहता है निर्बलता मेरे पास भी है लेकिन में परमेश्वर के पास अनुग्रह मांगने जाता हूं। कितने लोग प्रभु के सामने जाते हो ;

और कहते हो प्रभु सच में मेरा कंडिशन पतरस के जैसे ही वादे करता हूं तोड़ता हूं ये बार बार करता हूं। उस दिन सुना था झूठ नहीं बोलना है फिरसे झूठ बोल दिया ,

सुना था गुस्सा नहीं करना है फिर से गुस्सा कर दिया आपको पता है परमेश्वर क्या कहेगा 100 साल तक ऐसे ही रहेगा अगर तू प्रवचन(sermon) को सुनकर घर पे चला जाएगा तुझे अनुग्रह चाहिए आ बैठ और मुझे मांग में तुझे दूंगा।

धोके में मत जियो कहीं लोगों को अनुग्रह पानेका रास्ता ही नहीं पता। आपको पता है हम अनुग्रह से कब हटते हैं ? तुम जो व्यवस्था के द्वारा धर्मी बनने कि कोशिश करते हो अनुग्रह से वंचित हो। जब तुम अपनी मदद करते हो ;

आपको पता है मस्सी जीवन में अपनी मदद  करना एक पाप है। कास आप इस बात को समझ पाओ अपनी मदद करना पाप है बहुत लोग क्या करते हैं प्रभु से अनुग्रह लेने नहीं जाते हैं इसी लिए वो अपने मस्सी जीवन से परेशान हैं लोग ;

उनके आंखों पे उनका कन्ट्रोल नहीं है , उनके माइंड पे उनका कन्ट्रोल नहीं है , उनके निर्णय कितने मुरकता के हैं क्यों ? प्रभु यीशु बोले, “मेरा अनुग्रह तुम्हारे लिए काफ़ी है ये कब कहा प्रभु ने पोलुस को ,

जब वो प्रभु के पास गया था तब  कभी भी आपको दर्द हो तो आप दो प्रार्थना करो प्रभु या तो मुझे चंगा करदे या तो अनुग्रह दे अगर आपको प्रभु चंगा ना करे तो आपको बरदास करने कि शक्ति देगा।

कभी आप खुद पर ध्यान देते हैं इतनी बार प्रचार सुनने के बाद भी उस वचन के मुताबिक चलते हो फिर तीसरे दिन ही आप उस वचन के खिलाफ में चलते हैं ऐसा क्यों होता है इसका मतलब क्या है आप जानते हैं ?

क्यों कि आप परमेश्वर पिता को अनुग्रह नहीं मांगते हो और अनुग्रह अपने आप नहीं आता है इसे प्रभु से मांगना जाता है। जब यीशु ने कहा है मांगो तो तुम्हें मिलेगा ! तो आप अनुग्रह मांगो प्रभु से और प्रभु आप को देगा।

  • जिस पतरस ने प्रभु यीशु का तीन बार इनकार किया था वही पतरस प्रेरीतों के काम में खड़ा हो के प्रभु के अनुग्रह को पाके कहता है तुमने जीवन के कर्ता को मारा है में गवाह हूं।

मै आपसे कुछ केहना चाहता हूं आपके पास कमजोरियां है तो ये आपके लिए एक गुड न्यूज है क्यों कि परमेश्वर ने ठाना है वो निर्बलों को उठाएगा वो कमजोरों पर अपनी सामर्थ प्रकट करेगा

फिर वही सामर्थ तुम्हें कमजोरियों पर विजय देगी तुम्हें परेशान होने कि जरूरत नहीं है तुम्हें हिम्मत हारने कि जरूरत नहीं है तुम्हें सिर्फ प्रभु से अनुग्रह मांगने कि जरूरत है तुम्हें मिलता नहीं क्यों कि तुम मांगते नहीं हो ।

जितना तुम परमेश्वर से अपनी कमजोरियां बोलोगे उतना परमेश्वर पिता तुम पर अपनी सामर्थ प्रकट करेगा । आपको कुछ समझ आया हम कभी भी खुदसे अपनी मदद नहीं कर सकते हैं ;

हमे परमेश्वर के अनुग्रह की जरूरत पड़ेगी बिना परमेश्वर की अनुग्रह के बगैर खुद कि शक्ति से हम अपने लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं।

इसलिए अपने आप पर विश्वास करना बंद कीजिए और परमेश्वर पिता के अनुग्रह पर निर्भर रहीए । इससे पहले परमेश्वर तुम्हें इस्राएल करे उससे पहले बोलो में याकुब हूं। बोलो हां प्रभु याकुब हैं मुझ में पर इस्राएल भी तो तुही मुझे बनाएगा।

 

2 कुरिन्थियों 12:9

9 लेकिन प्रभु यीशु बोले, “मेरा अनुग्रह तुम्हारे लिए काफ़ी है। इसलिए कि मेरी सामर्थ निर्बलता ही में ज़्यादा काम करती है।” इसलिए मैं बड़े आनन्द से अपनी कमजोरियों में गर्व करूँगा, ताकि मसीह की ताकत मुझ में बनी रहे।

  • परमेश्वर ने उसे एक प्रतिज्ञा दी। साथ में यह भी बताया कि यदि वह मसीह में बलवान होना चाहता था, तो अपने आप में कमज़ोर होने के साथ,

अपनी कमज़ोरी को जानना ज़रूरी था। प्रतिज्ञा यह थी कि वह उसे सहने के साथ आत्मिक लाभ उठाने में मदद करेंगे। परमेश्वर कभी भी कोई दर्द, खतरा, बोझ आदि हमारे रास्ते में बिना शक्ति दिए हुए नहीं आने देंगे। प्रत्येक युग में,

हर स्थिति में उनकी मदद मिलेगी। शारीरिक निर्बलता में प्रभु यीशु की शक्ति मददगार होती है, यह पौलुस ने सीख लिया।

इसलिए कि उसकी इच्छा यह थी कि मसीह की शकति उस पर रहे (फ़िलि. 3:10)। प्रत्येक उस बात को वह सहने के लिए तैयार था, जो उसे कुछ सिखा सकती थी।

  • शुरू से आखिर तक मुकति अयोग्य लोगों के लिए एक इनाम थी। इस में मनुष्य की कोशिश से कुछ लेना-देना नहीं है। प्रे.काम 15:11; रोमि. 3:24; 4:4; 5:15; 6:23; 11:6; तीतुस 3:4-7.

 

  • जो परेशान हैं और गुनाह से सताए जाते हैं, यहाँ पर संभव सब से मीठा सत्य है। हम यह न सोचें कि परमेश्वर के कानून को पालन करने या “अच्छा” बनने से हम गुनाह पर जीत हासिल कर सकते हैं।

केवल परमेश्वर की सहायता गुनाह के शिकंजे को फेंकने में सहायक हो सकती है – वह अनुग्रह जिससे हमें गुनाह की माफ़ी, सदाकाल का जीवन, पवित्र आत्मा एवं अपराध से लड़ाई के लिए बल मिलता है।

 

  • गुनाह के कारण मौत ने शासन किया। गुनाह बहुत ही क्रूर है, जो अपनी सेवा करने वालों को मौत रूपी मेहनताना देता है ( यूहन्ना 8:34)। परमेश्वर की दया, मृत्यु और गुनाह से अधिक सामर्थी है।

यह अपराध को नाश करती है। लोगों को धर्मी बनाकर सदा के जीवन में प्रवेश कराती है ( रोमियों 6:23; तीतुस 3:3-7)।

  • मसीह के द्वारा दया शासन करती है (इब्रा. 4:16)। जो लोग विश्वास करते हैं, उनके गुनाह माफ़़ कर देती है। उन्हें गुनाह के क्रूर शासन, मृत्यु से छुड़ा कर उनके दोष को पूरी तरह से दूर करती है (रोमियों 6:14; रोमियों 8:1)।

यहाँ दो मालिक हैं – वह गुनाह जो आदम से आया और वह कृपा(अनुग्रह) जो मसीह से आयी ( यूहन्ना 1:16-17)। हमें चुनाव करना है कि किस मालिक की सेवा करेंगे।

  • कृपा के आधार पर ही पूरे राष्ट्र में से परमेश्वर ने उन्हें चुना, जिन्होंने यीशु पर विश्वास किया। परमेश्वर के चुनाव का उनकी अच्छाई या योग्यता से कोई लेना देना नहीं था -रोमियों 3:24.

 

  • दुनिया का इन्कार करने और परमेश्वर के प्रति समर्पण इन सब के लिए परमेश्वरीय सहायता की ज़रूरत है। “कृपा” और “शान्ति”- ये दोनों मसीह के संदेश के विशेष शब्द हैं। पवित्रता,

उपयोगिता और भले जीवन के लिए जो कुछ आवश्यक है वह दया से मिलता है। यूहन्ना 1:14  हम परमेश्वर की दया के योग्य कभी नहीं है। यह वह दया है जिसे कमाया नहीं जा सकता, हम इसके योग्य भी नहीं है।

यहाँ शान्ति का अर्थ है मन का विश्राम, जो मसीह देते हैं (मत्ती 11:28-30; यूहन्ना 14:27; 16:33)। यह परमेश्वर दया और शान्ति देने वाले हैं, मसीह भी वह देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों के स्वभाव एक हैं। फ़िलि. 2:6.

  • हमारे महापुरोहित प्रभु यीशु परमेश्वर के साथ राज्य करते हैं। 1:3; प्रका. 3:21. हमारे पापों के लिये बलिदान हो जाने के कारण, अब कृपा का राज्य है।

देखें रोमि. 5:21; 6:14. वह स्वयं हमसे कहते हैं कि हम अपनी ज़रूरतों के लिये उनके पास आएँ – मत्ती 6:9-13; 7:7-10; यूहन्ना 16:23-24. हमारी सब से बड़ी ज़रूरतें हैं दया और कृपा। हमें चूकने और बुराई में गिरने से बचना है,

और यदि हम चूक जाते हैं तो हमें क्षमा की आवश्यकता है। हमें वह बल चाहिए जो कृपा हमें प्रदान करता है और जब हम अपनी कमज़ोरी में गिर जाते हैं तब हमें तरस और दया की ज़रूरत होती है।

हम कृपा के सिंहासन के पास आते हैं, हमें यह निश्चित जानना है कि कोई भी ताकत परमेश्वर को हमारी ज़रूरत की वस्तुओं को हमें देने से नहीं रोक सकती।

हम जानते हैं कि हमारी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये वह तैयार हैं (फ़िलि. 4:19 तुलना करें)।

  • पौलुस समझ गया कि उसके लिये परमेश्वर का सेवक होना, एक प्रेरित होना मात्र प्रभु की दया थी (इफ़ि. 3:7-8; 2 तीमु. 1:9; तीतुस 3:3-4)।

 

उसका यह कहना कि मैंने सब से अधिक काम किया, अपनी बड़ाई करना नहीं था। यह परमेश्वर की उस कृपा की बड़ाई करना था जो परमेश्वर ने उसके जीवन में की थी।

अनुग्रह के आयतें :-👇

इफ़िसियों 2:8

8 इसी अनुग्रह (शर्तहीन कृपा) और विश्वास के द्वारा से तुम्हें मुक्ति मिली है। यह तुम्हारी किसी योग्यता से नहीं, यह मुक्ति परमेश्वर की तरफ़ से ईनाम है। 9 यह कर्मों से नहीं मिलती है ताकि कोई घमण्ड न कर सके।

रोमियों 6:14

14 अपराध तुम्हारे ऊपर शासन न कर सके, क्योंकि तुम नियमशास्त्र के आधीन नहीं, शर्तहीन असीमित कृपा (अनुग्रह) के आधीन हो।

रोमियों 5:21

21 ताकि जिस प्रकार से अपराध ने मौत में शासन किया, वैसे ही कृपा भी (अनुग्रह, फ़ज़ल) प्रभु यीशु मसीह के द्वारा सदाकाल के जीवन में प्रगट हो (राज्य करे)।

रोमियों 11:6

6 यदि कृपा(अनुग्रह) से, तो फिर कर्मों को कोई जगह नहीं। नहीं तो कृपा, कृपा नहीं कहलाती, किन्तु यदि यह कामों के अनुसार है तो फिर यह असीमित दया के कारण नहीं। नहीं तो काम फिर कभी काम न रह जाते।

यूहन्ना 1:14

14 और वचन ने देह धारण की और कृपा(अनुग्रह) और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में आकर रहा , और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

रोमियों 3:24

24 लेकिन जो छुड़ाया जाना मसीह यीशु में उनकी महान कृपा(अनुग्रह) से है उसके द्वारा वे मुफ़्त में सज़ा मुक्त किए गये हैं।

याकूब 4:6

6 बुरी इच्छाओं का डट कर मुकाबला करने के लिए वह ज़्यादा से ज़्यादा अनुग्रह देते हैं। जैसा कि बाइबल कहती है, परमेश्वर घमण्डी इन्सान का मुकाबला करते हैं, लेकिन नम्र पर कृपा करते हैं।

रोमियों 1:7

7 रोम में रहने वाले उन सभी को जिनसे परमेश्वर प्यार करते हैं और जो पवित्र होने के लिए बुलाए गए हैं, हमारे पिता परमेश्वर और स्वामी यीशु मसीह की तरफ़ से लगातार कृपा और शान्ति मिलती रहे।

प्रेरितों के काम 15:11

11 लेकिन हमें यकीन है कि जैसे उन्हें अनुग्रह से मुक्ति (माफ़ी) मिली, हमें भी यीशु मसीह से मिलेगी।”

प्रेरितों के काम 18:27

27 जब वह अखाया से गुज़रना चाहता था, भाइयों ने शिष्यों पर ज़ोर डाल कर कहा, कि उसे अपनाएँ। जब वह वहाँ पहुँचा, उसने उन सब की मदद की, जिन्होंने अनुग्रह के द्वारा विश्वास किया था।

प्रेरितों के काम 20:24

24 लेकिन इन बातों से मैं बिल्कुल परेशान नहीं होता हूँ। न ही मैं अपने जीवन को कीमती जानता हूँ। ऐसा इसलिए, ताकि परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार की गवाही दे सकूँ और यीशु से मिली सेवा को कर के खुशी से अपनी दौड़ पूरी कर सकूँ।

रोमियों 5:2

2 विश्वास के द्वारा हमारी पहुँच उस शर्तहीन कृपा (अनुग्रह) तक होती है, जिसमें आज तक हम बने हुए हैं और परमेश्वर की महिमा की आशा में खुश होते हैं।

इब्रानियों 4:16

16 इसलिए आओ, हम उस सिंहासन के पास हिम्मत से पहुँचें, जहाँ कृपा मिलती है, ताकि ज़रूरत के वक्त हमें मदद मिल सके।

तीतुस 3:3-7

क्योंकि पुराने जीवन में हम भी बेवकूफ़़, आज्ञा न मानने वाले , धोखे में, तमाम अभिलाषाओं में और सुखविलास की चाह रखते हुए, कड़वाहट, ईर्ष्या और नफ़रत की ज़िन्दगी जीते थे।

लेकिन जब हमारे परमेश्वर और मुक्तिदाता की दया और मोहब्बत लोगों के लिए प्रगट हुयी, तो उन्हों ने हमें मुक्ति दी जो हमारे धर्म-कर्म से नहीं लेकिन उन्हीं की कृपा द्वारा नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के नए बनाने से थी।

जिसे उन्हों ने बहुतायत से हमारे मुक्तिदाता यीशु द्वारा हम पर उण्डेली। इसलिए कि उनकी कृपा से धर्मी (निर्दोष) ठहराए जाने से हम अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें।

1 कुरिन्थियों 15:1

10 लेकिन परमेश्वर की अपार कृपा (अनुग्रह) से मैं अब जो हूँ सो हूँ । मेरे लिए प्रभु का अनुग्रह बेकार नहीं रहा। लेकिन मैंने उन सब की तुलना में सब से अधिक प्रचार किया। इस में भी मेरा कुछ नहीं, यह उनकी कृपा का परिणाम था।

2 तीमुथियुस 1:9

9 उन्हों ने हमें मुकति दी और पवित्र बुलाहट से बुलाया है। यह बुलाहट हमारे भले कामों के कारण नहीं, किन्तु उनके अपने उद्देश्य और अनुग्रह (शर्तहीन कृपा) के कारण थी, जो सृष्टि के बनाए जाने से पहले मसीह यीशु में हमें मिली थी।

तीतुस 3:5-7

5 तो उन्हों ने हमें मुक्ति दी जो हमारे धर्म-कर्म से नहीं लेकिन उन्हीं की कृपा द्वारा नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के नए बनाने से थी।

6 जिसे उन्हों ने बहुतायत से हमारे मुक्तिदाता यीशु द्वारा हम पर उण्डेली। 7 इसलिए कि उनकी कृपा से धर्मी (निर्दोष) ठहराए जाने से हम अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें।

2 पतरस 3:18

लेकिन हमारे मुक्तिदाता यीशु मसीह की असीम कृपा और उनकी पहचान में बढ़ते जाओ। उन्हीं की बड़ाई अब से लेकर सदा तक होती रहे।

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