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Aantim din ke vare me Bible kya kehti hai ? Bible Prophecy !

1.  Aantim din ke vare me Bible kya kehti hai ? Bible Prophecy !

एक के बाद सभी आपदाएँ आ पड़ेंगी; सभी राष्ट्र और सभी स्थान आपदाओं का अनुभव करेंगे— और ये हो भी रहा है !

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  • यिर्मयाह 16:5 -18👇

1) क्योंकि यहोवा कहता है, ‘तू ऐसे घर में मत जाना जहाँ मातम मनानेवालों को खाना परोसा जाता है, तू छाती पीटकर मत रोना, न ही हमदर्दी जताना।’

यहोवा ऐलान करता है, ‘क्योंकि मैंने इन लोगों से शांति छीन ली है, अपना अटल प्यार और दया उनसे वापस ले ली है।

2) इस देश में छोटे-बड़े सभी मरेंगे। उन्हें दफनाया नहीं जाएगा, कोई उनके लिए मातम नहीं मनाएगा, न ही उनके लिए अपना शरीर चीरेगा या सिर मुँड़वाएगा।

3) मातम मनानेवालों को कोई खाना नहीं देगा, उनके अपनों की मौत पर उन्हें कोई दिलासा नहीं देगा, कोई भी उन्हें दिलासे का प्याला नहीं देगा कि वे माँ या पिता को खोने के गम में पी सकें।

3) तू दावतवाले घर में मत जाना, उनके साथ बैठकर मत खाना-पीना।’

4) क्योंकि सेनाओं का परमेश्‍वर और इसराएल का परमेश्‍वर यहोवा कहता है, ‘मैं तेरे ही दिनों में तेरी आँखों के सामने इस जगह का ऐसा हाल कर दूँगा कि यहाँ से न तो खुशियाँ और जश्‍न मनाने की आवाज़ें आएँगी, न ही दूल्हा-दुल्हन के साथ आनंद मनाने की आवाज़ें।’

5) जब तू इन लोगों को ये सारी बातें बताएगा तो वे तुझसे पूछेंगे, ‘यहोवा ने क्यों कहा है कि वह हम पर इतनी बड़ी विपत्ति लाएगा? हमने अपने परमेश्‍वर यहोवा के खिलाफ ऐसा क्या गुनाह किया,  क्या पाप किया ?

6) तू उन्हें जवाब देना, ‘यहोवा ऐलान करता है, “क्योंकि तुम्हारे पुरखे मुझे छोड़कर दूसरे देवताओं के पीछे जाते रहे, उनकी सेवा करते रहे और उनके आगे दंडवत करते रहे।

उन्होंने मुझे छोड़ दिया और मेरे कानून का पालन नहीं किया।

7) और तुम तो अपने पुरखों से भी बदतर निकले। तुममें से हर कोई मेरी आज्ञा मानने के बजाय ढीठ होकर अपने दुष्ट मन की करता है।

8)  इसलिए मैं तुम्हें इस देश से निकालकर ऐसे देश में फेंक दूँगा जिसे न तुम जानते हो न तुम्हारे पुरखे जानते थे।

वहाँ तुम्हें दिन-रात दूसरे देवताओं की सेवा करनी पड़ेगी क्योंकि मैं तुम पर कोई रहम नहीं करूँगा।”’

9)  ऐलान करता है, ‘ऐसे दिन आ रहे हैं जब वे फिर कभी नहीं कहेंगे, “यहोवा के जीवन की शपथ जो इसराएलियों को मिस्र देश से निकाल लाया था!”

10) इसके बजाय, वे कहेंगे, “यहोवा के जीवन की शपथ जो इसराएलियों को उत्तर के देश से और उन सभी देशों से निकाल लाया था जहाँ उसने उन्हें तितर-बितर कर दिया था!”

मैं उन्हें वापस उनके देश में ले आऊँगा जो मैंने उनके पुरखों को दिया था।’

11) क्योंकि मेरी आँखें उनका एक-एक काम देख रही हैं। वे मुझसे नहीं छिपे हैं, न ही उनका गुनाह मेरी नज़रों से छिपा है।

12)  पहले, मैं उनके गुनाह और उनके पाप का उनसे पूरा बदला चुकाऊँगा, क्योंकि उन्होंने मेरे देश को अपनी घिनौनी और बेजान मूरतों से दूषित कर दिया है, मेरी विरासत की ज़मीन को अपनी घिनौनी चीज़ों से भर दिया है।’”

० अन्‍तिम दिन वह दिन है, जिसे परमेश्‍वर ने इन्साफ़ करने के लिये ठहराया है। मत्ती 10:15 से सम्बंधित पदों को देखें।

ऐसा लगता है कि वह पुस्तक जो उस समय खोली जाएगी, उसमें मसीह के वचन होंगे (प्रका. 20:12)। चारों सुसमाचारों में ये शब्द हैं।

जो वे कहते हैं, यदि उसके अनुसार हम नहीं करते, तो हम स्वयं पर दण्ड लाते हैं।

० पौलुस परमेश्‍वर के दण्ड के सात सिद्धान्त दिखाता है – यह वास्तविक स्थिति पर निर्भर हैं, न कि इस पर कि लोग क्या सोचते हैं ।

यह सही न्याय होगा – पूर्णतया ईमानदारी का न्याय । यह इस आधार पर होगा कि लोगों ने क्या किया है

यह बिना पक्षपात के होगा – चाहे कोई यहूदी हो या गैरयहूदी, काला या गोरा, धनी या निर्धन । पौलुस द्वारा दिए गए वचन के अनुसार होगा । यह मनुष्यों के गुप्त गुनाहों का भी होगा । यह मसीह यीशु के द्वारा होगा ।

० “यह जीवन की किताब नहीं है। इस में उनके वे काम लिखे हैं जो उन्हों ने इस पृथ्वी पर रहते हुए किए थे। इसलिए हमें जीते जी परमेश्वर के दिखाए हुए मार्ग पर चलना चाहिए ;

अगर हम पवित्र आत्मा के बताए गए मार्ग को अंदेखा करते हैं तो हमारे बिनाष का कारण हम खुद है । परमेश्वर पिता ने हमे रोबोट नहीं बनाया उन्होंने हमे चुनाव के दो रास्ते दि , जिसे हमे चुनाव करना होगा ।

दानियेल 7:13, 14👇

13)  मैंने रात के दर्शनों में आगे देखा कि इंसान के बेटे जैसा कोई आकाश के बादलों के साथ आ रहा है! उसे ‘अति प्राचीन’ के पास जाने की इजाज़त दी गयी और वे उसे उसके सामने ले गए।

14)  उसे राज करने का अधिकार, सम्मान और एक राज दिया गया ताकि सब राष्ट्रों और भाषाओं के लोग उसकी सेवा करें। उसका राज करने का अधिकार सदा बना रहेगा, वह कभी नहीं मिटेगा और उसका राज कभी नाश नहीं होगा।

2.  अन्तिम दिन में बुरी आदतें : 👇क्या होगी ?

1) खुदकी सुननेवाला

2) पैसे के लालची

3) माता-पिता की आज्ञा न माननेवाले

4) गद्दार

5) हृदय में प्रेम का खाली होना

6) असंयमी

7) खूँखार , निर्दयी

8) परमेश्वर के नहीं वरन सुखविलास के चाहनेवाले

9) भक्ति का सिर्फ दिखावा करनेवाले पर उसकी शक्‍ति को न माननेवाले

(क) क्या आप मानते हैं कि हम अंतिम दिनों में जी रहे हैं, ?

(ख) “अन्त” के वक्‍त उन सभी का क्या होगा जो यहोवा परमेश्वर के खिलाफ खड़े होते हैं ? और उनका क्या होगा जो परमेश्वर के राज्य के खोज में लगे और उनके अधीन रहते हैं?

० जो मन परिवर्तन के लिए तैयार नहीं होता, उसे दण्ड देने के द्वारा और जो उसके राज्य के लिए दुःख उठाने के लिए तैयार है, उसे अनन्त विश्राम देने का द्वारा अपना न्याय प्रगट करते हैं  तुलना करे👉

[ इब्रानि. 10:30 क्योंकि हम परमेश्‍वर को जानते हैं, जिन्होंने कहा, “बदला लेना मेरा काम है, मैं ही दण्ड दूँगा” और फिर यह कि प्रभु अपने लोगों का इन्साफ़ करेंगे। ]

० परमेश्‍वर कभी-कभी लोगों से बदला लेते हैं और यहाँ रह विश्‍वासियों को बचा लेते हैं। अधिकांश बातों के सम्बन्ध में लोगों का न्याय तभी होगा, जब प्रभु यीशु उस युग के अन्त में आएँगे।

तभी सभी बातें ठीक कर दी जाएँगी, न्याय स्थापित किया जाएगा। लोग देखेंगे कि न्याय प्रबल है। तब परमेश्‍वर के लोगों को आराम मिलेगा। उसके पहले ऐसा नहीं होगा।   👉

[ मत्ती 24:29-30; उन क्लेश के दिनों के तुरन्त बाद सूरज अन्धेरा हो जाएगा, चाँद की रोशनी भी जाती रहेगी, आसमान से तारे नीचे गिर पड़ेंगे और आसमान की शक्‍तियाँ हिलायी जाएँगी।

30) तब पुत्र के आने का निशान आसमान में दिखायी देगा। दुनिया के सभी निवासी दुखी होवेंगे। वे परमेश्‍वर के पुत्र को बड़ी शान के साथ आसमान में बादलों पर आते देखेंगे। ]

० यीशु ने कहा, वह 70 ईस्वी में नहीं हुआ, लेकिन इस दुनिया के अन्त में होगा। ये चिन्ह महाक्लेश के तुरन्त बाद होंगे,

लेकिन बड़े भयानक “प्रभु के दिन” के पहले – वह समय जब परमेश्‍वर इस दुनिया के लोगों की दुष्टता के लिए उन्हें सज़ा देना शुरू करेंगे। 👉

[ 1 थिस्स. 5:2  क्योंकि तुम आप ठीक जानते हो कि जैसे रात को चोर आता है, वैसे ही प्रभु का दिन आने वाला है। ]👈

प्रभु के दिन पर नोट्स पढ़ें। यीशु मसीह के आने के पहले सूरज, चाँद और सितारों के साथ कुछ होगा। यह सब कुछ प्रभु के दिन के पहले और महाक्लेश के बाद होगा।

यह एक बड़ी गलती होगी अगर महाक्लेश (जो शैतान और उसके दुष्ट लोगों की वजह से होगा), उसी समय को समझ बैठें जब परमेश्‍वर का गुस्सा इस पृथ्वी पर भड़केगा।

हमारी भविष्यवाणी के बारे में हमें यह ज़रूरी बात समझनी है। इस पद की तुलना👉 [ प्रे.काम 2:19-20 ]

० “जो परमेश्‍वर को नहीं पहचानते”- लोग सच्चे परमेश्‍वर को इसलिए नहीं जानते क्योंकि वे ऐसा चाहते ही नहीं। किसी भी ऐसे अवसर को वे ठुकराते हैं।

परमेश्‍वर के साथ संगति के बजाए वे गलत को प्राथमिकता देते हैं। संसार पहले ही से दण्डित है   क्योंकि लोग परमेश्‍वर को नहीं जानते हैं, बुरे लोग यही करते हैं।

वे परमेश्‍वर के या अपने विषय में किसी भी सच्चाई को दबाना चाहते हैं जो उन्हें परमेश्‍वर या पश्चात्ताप की ओर ले जाती है।

वे अपने परमेश्‍वर और उसके सत्य के बारे में गलत धारणा रखते हैं और ज्योति के बजाए अँधेरे को चाहते हैं। यह उनकी बड़ी बुराई और बड़ा अन्धकार है ;

अन्‍तिम न्याय के दिन सामान्य सज़ा सुनवाए जाने के लिये इन्तज़ार नहीं करना है। वे दोषी ठहर चुके हैं। इन दो पदों में यह बात बतायी गयी है।

वे अपने कार्यों के द्वारा दर्शाते हैं कि वे किस तरह के लोग हैं और दण्ड और शिक्षा के कितने लायक हैं। मसीह के रूप में रोशनी जगत में आयी है ।

उन्हों ने परमेश्‍वर, मनुष्य और मुक्‍ति के विषय में सत्य के अद्भुत प्रकाशन को प्रगट किया। परन्तु संसार के लोग अन्धकार को पसंद करते थे।

० “सुसमाचार को नहीं मानते”- यह उन लोगों की ओर संकेत है, जिन्होंने सुनने के पश्चात् इन्कार कर दिया है।

मसीह के प्रति आज्ञाकारिता के बजाए, जिसे वे स्वतंत्रता कहते हैं, उसे चाहते हैं। यहाँ ध्यान दें मसीह के सुसमाचार की आज्ञा मानी जानी चाहिए, मात्र विश्‍वास काफ़ी नहीं है।

देखा जाए तो सुसमाचार पर विश्‍वास करने का परिणाम इसके प्रति आज्ञाकारिता है। विश्‍वास करना और आज्ञा मानना एक दूसरे से जुड़े हुए हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता।

बिना कार्य का विश्‍वास नहीं होता है।  उदाहरण : यीशु मसीह आप को कुछ  नहीं कर ने को केहतें हैं जैसे कि –  झूठ बोलना पाप है ; तो आपको झूठ बोलने के वजह सचाई बोलने की अभ्यास करलेनी चाहिए !

० परमेश्‍वर किसी को दण्ड नहीं देना चाहते। जब लोग पश्चात्ताप से इन्कार करते और अपराध में लगे रहते है। न्यायी होने के कारण वह दण्ड देते हैं।

यदि परमेश्‍वर अपराधी को दण्ड नहीं देते हैं, तो वह न्यायी नहीं हैं और एक क्रम न होने के कारण संसार अस्त व्यस्त होगा।

० उनके सर्वनाश का यही अर्थ है। वे उस परमेश्‍वर से अलग किए जाएँगे, जो आशीष आनन्द और शान्ति का स्त्रोत है। अपने जीवनकाल में उन्हों ने इसी का चुनाव किया था ।

यही उन्हें मिलेगा भी। यह न्याय भी है कि उन्हें दण्ड मिले।

० पौलुस ने सिखाया था कि आखिरी तुरही फूँके जाने पर मसीह से मिलने चर्च (कलीसिया) ऊपर उठायी जाएगी।

“चुने हुओं” – यूहन्ना 6:37; जो कुछ पिता मुझे देते हैं वह सब मेरे पास आएगा, और जो कोई मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूँगा।

एक और बड़ी प्रतिज्ञा। यह पद दिखाता है कि यीशु मसीह के पास आने के द्वारा हम जीवन की रोटी में से खाते हैं।

आत्मिक जीवन प्राप्त करने का मात्र यही एक मार्ग है उनके पास आने का अर्थ शारीरिक रीति से कहीं यात्रा करना नहीं है, लेकिन विश्‍वास करना,

भरोसा रखना है, जैसा उन्हों ने किया था – उस प्रकार से गलत नियत से अविश्‍वास के साथ आना नहीं है। इसका अर्थ है हमारे हृदयों का, हमारी आत्मा का, उनकी ओर मुड़ना।

० जो लोग आते हैं उन्हें वह वापस नहीं भेजते हैं। इन शब्दों पर ज़ोर दिया गया है। चाहे कोई व्यक्‍ति क्यों न हो, कहीं भी क्यों न हो, यदि वह मसीह के पास आता है, मसीह उसे स्वीकार करेंगे।

इस पद को पढ़ कर किसी को भी यह सोचकर चिन्तित नहीं होना है, कि यदि परमेश्‍वर ने उसे चुना नहीं है तो शायद मसीह उसे ग्रहण न करें।

उसका मसीह के पास आना इस बात का सबूत कि परमेश्‍वर ने उसे चुना है। यह सत्य है कि मानवजाति में से कुछ व्यक्‍तियों को परमेश्‍वर ने मसीह को दिया है।

इसके पहले कि कोई व्यक्‍ति मसीह के पास आए, कोई यह नहीं जान सकता कि वह उन में से एक है। परन्तु परमेश्‍वर द्वारा सभी चुने हुए मसीह के विश्‍वास में आएँगे।

उनका आना यह साबित करेगा कि परमेश्‍वर ने उन्हें यीशु को दिया है। अपराधी, जो उद्धार चाहता है, उसे परमेश्‍वर के गुप्त उद्देश्यों के प्रति रुचि नहीं दिखानी चाहिए।

किन्तु सीधे मसीह के पास आना चाहिए । उनके पास जो कोई आना चाहता है, वह आ सकता है ।

० हनोक की भविष्यवाणी इस युग के लोगों के बारे में थी। पवित्र आत्मा ने यहूदा को हजारों वर्ष पहले हनोक द्वारा कहे गए शब्दों को कहने के लिए प्रेरित किया।

(एक पुस्तक हनोक की किताब में विचित्र कहानियाँ है, जो परमेश्‍वर द्वारा प्रेरित नहीं हैं। यह सिद्ध करना कठिन है कि यहूदा ने उसका उपयोग किया)।

यहूदा यदि हनोक को भविष्यद्वक्‍ता न कहता, तो हम को मालूम भी नहीं पड़ता जैसा कि आज भी है। हनोक के दिनों में भक्‍तिहीनता सामान्य बात थी। इसलिए वह इसकी तेज़ निन्दा करता है।

3.  अन्तिम दिन के आयतें :👇

3.1.  1 यूहन्ना 2:18👇

18) छोटे बच्चो, आखिरी समय आ चुका है और जैसा तुम ने सुना था कि मसीह विरोधी आएगा, वह सच था, क्योंकि मसीही विरोधी अभी भी बहुत से हैं। इसी से हम जान पाते हैं, कि ये आखिरी समय है।

० जब कि दुनिया में कितने लोग गरीब हैं, असहाय हैं भूखे मर रहे हैं, धन संचय अपराध है। जो पीड़ा परमेश्‍वर इन धनी लोगों पर भेजेंगे वह उनकी मज़दूरी होगी।

3.2.  मत्ती 24:14👇

14)  और राज की इस खुशखबरी का सारे जगत में प्रचार किया जाएगा ताकि सब राष्ट्रों को गवाही दी जाए और इसके बाद अंत आ जाएगा।

० यह खुशी की खबर इसलिए है क्योंकि लोगों के बीच यह परमेश्‍वर के राज्य में दाखिल होने के लिए अपनी इच्छा से परमेश्‍वर को सुपुर्द करने के लिए नेवता देती है।

प्रेरितों के सारे सेवा काल में इस का ऐलान और शिक्षा एक खास जगह रखती थी यह काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है, लेकिन जारी है।

ऐसी जगह और आदिवासी क्षेत्र हैं, जहाँ खुशखबरी नहीं पहुँची है। जब सब लोग (देश) सुन चुकेंगे, तब दुनिया का अन्त होगा।

बाईबल में ‘देश’ शब्द का मतलब होता है गैर यहूदी लोग, चाहे वे कहीं भी क्यों न हों।

3.3.  प्रकाशितवाक्य 20:1-3👇

1) और मैंने एक स्वर्गदूत को स्वर्ग से उतरते देखा जिसके पास अथाह-कुंड की चाबी और हाथ में एक बड़ी ज़ंजीर थी।

(2)  उसने उस अजगर को, उस पुराने साँप को जो इबलीस और शैतान है पकड़ लिया और 1,000 साल के लिए उसे बाँध दिया।

(3) और उसे अथाह-कुंड में फेंक दिया6 और अथाह-कुंड को बंद करके उस पर मुहर लगा दी ताकि वह 1,000 साल के खत्म होने तक राष्ट्रों को फिर गुमराह न करे। इसके बाद ज़रूरी है कि उसे थोड़ी देर के लिए आज़ाद किया जाए।

3.4.  यहेजकेल 7:15👇

15) बाहर तलवार है, अंदर महामारी और अकाल है। जो बाहर मैदान में होगा वह तलवार से मार डाला जाएगा और जो शहर के अंदर होगा वह अकाल और महामारी से मारा जाएगा।

3.5.  यशायाह 46:10👇

10) अंत में क्या होगा यह मैं शुरू में ही बता देता हूँ , और जो बातें अब तक नहीं हुईं, उन्हें बहुत पहले से बता देता हूँ।

मैं कहता हूँ, ‘मैंने जो तय* किया है वह होकर ही रहेगा और मैं अपनी मरज़ी ज़रूर पूरी करूँगा।

3.6.  प्रेरितों 17:31👇

31) क्योंकि उसने एक दिन तय किया है जब वह सच्चाई से सारी दुनिया का न्याय करेगा और इसके लिए उसने एक आदमी को ठहराया है।

और सब इंसानों को इस बात का पक्का यकीन दिलाने के लिए परमेश्‍वर ने उसे मरे हुओं में से ज़िंदा किया है।”

3.7.  प्र. व. 1:3👇

3) आशीषित वह व्यक्‍ति है जो इन भविष्यद्वाणी की बातों को पढ़ता, सुनता और मानता है, क्योंकि समय पास है।

3.8.  2 पतरस 3:7👇

7) मगर परमेश्‍वर के उसी वचन से, आज के आकाश और पृथ्वी को आग से भस्म करने के लिए रखा गया है और उन्हें न्याय के दिन और भक्‍तिहीन लोगों के नाश के दिन तक ऐसे ही रखा जाएगा।

3.9.  यूहन्‍ना 12:47,48👇

47) लेकिन अगर कोई मेरी बातें सुनता है मगर उन्हें मानता नहीं, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराऊँगा क्योंकि मैं दुनिया को दोषी ठहराने नहीं बल्कि बचाने आया हूँ।

48) जो कोई मुझे ठुकरा देता है और मेरे वचन स्वीकार नहीं करता, उसे दोषी ठहरानेवाला कोई और है। जो वचन मैंने कहा है वही उसे आखिरी दिन में दोषी ठहराएगा।

3.10.  यिर्मयाह 24:10 👇

10) मैं उन पर तब तक तलवार, अकाल और महामारी भेजता रहूँगा जब तक कि वे इस देश से मिट नहीं जाते, जो मैंने उन्हें और उनके पुरखों को दिया था।”’”

3.11.  व्यवस्थाविवरण 28:59👇

59) तो यहोवा तुम पर और तुम्हारे बच्चों पर भयानक-से-भयानक कहर ढाएगा। वह तुम पर ऐसे बड़े-बड़े कहर और दर्दनाक बीमारियाँ ले आएगा कि तुम उन्हें सालों-साल झेलते रहोगे।

3.12.  यिर्मयाह 15:2👇

2) और अगर वे पूछें, ‘हम कहाँ जाएँ?’ तो उनसे कहना, ‘यहोवा कहता है, “जिनके लिए जानलेवा महामारी तय है, वे महामारी के पास जाएँ!

जिनके लिए तलवार तय है, वे तलवार के पास जाएँ! जिनके लिए अकाल तय है, वे अकाल के पास जाएँ! जिनके लिए बँधुआई तय है, वे बँधुआई में जाएँ!”’

3.13.  यिर्मयाह 9:22👇

22) तू कहना, ‘यहोवा ऐलान करता है, “लोगों की लाशें ऐसी पड़ी रहेंगी जैसे मैदान में खाद पड़ी रहती है, जैसे खेत में कतार-भर पूले पड़े रहते हैं जिन्हें कटाई करनेवाला काटकर छोड़ देता है। और उन्हें इकट्ठा करनेवाला कोई नहीं होगा।”’”

3.14.  यहेजकेल 5:12👇

12) तेरे एक-तिहाई लोग महामारी से मर जाएँगे या अकाल की मार से मिट जाएँगे। और एक-तिहाई लोग तेरे चारों तरफ तलवार से मार डाले जाएँगे और बचे हुए एक-तिहाई लोगों को मैं चारों दिशाओं में तितर-बितर कर दूँगा। फिर मैं एक तलवार खींचकर उनका पीछा करूँगा।

प्र. व. 20:11-15👇

11) फिर मैंने एक बड़ा सफ़ेद सिंहासन और उस पर बैठे हुए को देखा। उनके सामने से पृथ्वी और आकाश भाग खड़े हुए औेर उनके लिए कोई जगह नहीं मिली।

12) और मैंने उन मरे हुओं को जो छोटे या बड़े थे, परमेश्‍वर के सामने खड़े देखा और किताबें✽ खोली गयीं। उसके बाद जीवन की किताब खोली गयी।

मरे हुओं का इन्साफ़ उन कामों के आधार पर हुआ जिनका बयान इन किताबों में था।

13)  समुद्र ने उन मरे हुओं को उगल दिया जो उसमें थे। मौत और कब्र ने अपने में समाए मृतकों को उगल दिया और प्रत्येक का इन्साफ़ उसके कामों के अनुसार हुआ।

14) मौत तथा अधोलोक आग की झील में डाल दिए गए। यह दूसरी मौत है।

15) जिस किसी का नाम जीवन की किताब में लिखा हुआ नहीं पाया गया, वह आग की झील में डाल दिया गया।

2 थिस्सलुनीकियों 1:6-9👇

6)  वाकई परमेश्‍वर की नज़र में यह सही है कि जो तुम पर संकट ले आते हैं, बदले में वह उन पर संकट ले आए।

7)  मगर तुम लोग जो संकट झेल रहे हो, तुम्हें हमारे साथ उस वक्‍त राहत दे जब प्रभु यीशु अपने शक्‍तिशाली दूतों के साथ धधकती आग में स्वर्ग से प्रकट होगा।

8)  वह उन लोगों से बदला लेगा जो परमेश्‍वर को नहीं जानते और हमारे प्रभु यीशु के बारे में खुशखबरी के मुताबिक नहीं चलते।

9)  उन्हें प्रभु के सामने से और उसकी शक्‍ति के तेज से दूर कर दिया जाएगा और उन्हें सज़ा देकर हमेशा के लिए नाश कर दिया जाएगा।

मत्ती 24:21 👇

21) जैसा दुनिया की शुरूवात से अब तक नहीं हुआ और न ही कभी होगा ऐसी पीड़ा का समय आने वाला है।

मरकुस 13:8👇

8) एक देश दूसरे देश के खिलाफ़ और एक राज्य दूसरे राज्य के खिलाफ़ उठ खड़ा होगा। अलग-अलग जगहों पर भूकम्प, अकाल और गड़बड़ियाँ होंगी। यह सब पीड़ा की शुरुआत ही होगी।

मत्ती 24:29👇

29) उन क्लेश के दिनों के तुरन्त बाद सूरज अन्धेरा हो जाएगा, चाँद की रोशनी भी जाती रहेगी, आसमान से तारे नीचे गिर पड़ेंगे और आसमान की शक्‍तियाँ हिलायी जाएँगी।

प्रकाशितवाक्य 15:1👇

1) फिर मैंने स्वर्ग में एक बड़ा और अजीब निशान देखा। वह यह कि सात स्वर्गदूतों के पास सातों आने वाली मुसीबतें थीं। उनके हो जाने पर परमेश्‍वर के ज़बरदस्त गुस्से का अन्त है।

प्रकाशितवाक्य 16:1👇

1) तब मैंने प्रार्थना भवन में से किसी को स्वर्गदूतों से ऊँची आवाज़ में यह कहते सुना, “जाओ और परमेश्‍वर के गुस्से के सात प्यालों को पृथ्वी पर उण्डेल दो”।

प्रकाशितवाक्य 8:5👇

5) तब स्वर्गदूत ने धूपदान में वेदी की आग भर कर पृथ्वी पर फेंक दी। इसके बाद शोर, बादल का गर्जन, बिजली का चमकना और भूकम्प हुआ।

प्रकाशितवाक्य 11:19👇

19) परमेश्‍वर का भवन जो स्वर्ग में है, वह खोला गया और उनके भवन में उन की वाचा का बक्सा दिखाई दिया। तभी बिजलियाँ, शब्द, गर्जन और भूकम्प हुए और बड़े ओले गिरे।

प्रकाशितवाक्य 16:18👇

18) फिर बिजलियाँ, शब्द, गर्जन और एक भूकम्प हुआ। यह ऐसा ज़बरदस्त भूकम्प था, जैसा पृथ्वी पर इन्सान के रखे जाने के समय से कभी भी नहीं हुआ था।

प्रकाशितवाक्य 3:10👇

10) इसलिए कि तुम ने मेरे धीरज के वचन को माना है, मैं भी तुम्हारे परखे जाने के समय में तुम्हें बचा रखूँगा, अर्थात् वह न्याय का समय जो सारी दुनिया पर आने वाला है, ताकि इस में सभी रहने वाले परखे जाएँ।

० मेरे भायों और बहनों कोरोना वायरस में भी कुछ इस तरह हो रहा है । आज पूरी दुनिया भर में लोगों को इस महामारि ने अपने चपेट में लेलिया है ।

कोई किसी के पास जाने को भी डरते हैं । लोग अपनो के लासों को तक छूने से डरते हैं । टेलीवज़न पर दिखाया जा रहा है बहुत से  बेजान लासें अनाथ पड़ी हुई दिखाई देती है ,

उन्हें घर ले जाने वाला कोई नहीं है उन के लिए रोने वाला कोई नहीं । आज शादी बीहा के घर में सच में कोई समिल तक नहीं हो पा रहा है ।

कहीं भी खुशियों का माहौल नहीं दिख रहा है । लोग अपने घरों में कैदी बने पड़े हैं । परमेश्वर पिता के आज्ञा ना मानने पर यह हो रहा है ।

हमे सतर्क रहने की जरूरत है ! बाईबल अध्यान करने की जरूरत है , निरंतर प्रार्थना की जरूरत है , विश्वासियों के साथ संगती करने की जरूरत है ।

तो आओ हम सारे मिल कर परमेश्वर पिता को माफी मांगते हैं । हमे अपना पूरा समय प्रभु को देने की जरूरत है ।

युद्ध, अकाल, भूकंप और महामारियाँ अंतिम दिनों की निशानियाँ हैं।—मत्ती 24:7; लूका 21:11.

इन अंतिम दिनों में ज़्यादातर लोग खुद से, पैसों से और सुखविलास से प्यार करते हैं, मगर परमेश्वर से नहीं।—2 तीमुथियुस 3:1-5.

इन अंतिम दिनों के दौरान, राज्य की खुशखबरी पूरी दुनिया में सुनायी जा रही है।—मत्ती 24:14.

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Amit kujur: नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Amit Kujur हे ,में इंडिया के Odisha States के रहने वाला हूँ | आछा लगता हे जब इन्टरनेट के मदत से कुछ सीखते हैं और उसे website/blog के जरिये आपही जसे दोस्तों के बिच शेयर करना आछा लगता हे और मुझे भी सिखने को बोहुत कुछ मिलता हे | इसी passion को लेकर sikhnaasanhe.com website नाम का ब्लॉग बनाएं जहा हिंदी भाषा के आसान सब्दों में हार तरह के technology और skills related आर्टिकल जरिये मेरा जितना जो experience और knowledge हे शेयर करता हूँ |
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